
जून में वैश्विक अर्थव्यवस्था के मिले-जुले संकेत: स्वीडन में खाद्य कीमतों में गिरावट, मिस्र व बांग्लादेश में मंदी के आसार
स्वीडन में वैट कटौती से खाद्य पदार्थ सस्ते हुए, जबकि ब्राज़ील में थोक मूल्य सूचकांक गिरा और मिस्र-बांग्लादेश के पीएमआई आँकड़े आर्थिक सुस्ती की ओर इशारा कर रहे हैं।
जून 2026 के आर्थिक आँकड़े वैश्विक स्तर पर एक साथ विपरीत दिशाओं में गति दर्शा रहे हैं। स्वीडन में खाद्य कीमतों में लगातार गिरावट दर्ज की गई, जहाँ मैटप्रिसकोलेन के मासिक सर्वेक्षण के अनुसार 43,000 उत्पादों पर आधारित सामान्य मूल्य मई की तुलना में 0.2 प्रतिशत घटे। वर्ष की शुरुआत से यह गिरावट 6 प्रतिशत और वार्षिक आधार पर 5.6 प्रतिशत रही, जिसका प्रमुख कारण 1 अप्रैल से लागू मूल्य वर्धित कर (वैट) में कमी को बताया गया। फल, डेयरी और पनीर खंड में सर्वाधिक गिरावट देखी गई, जबकि गोमांस की कीमतों में वृद्धि जारी रही। संस्था के प्रमुख उल्फ़ माज़ूर के अनुसार, खुदरा शृंखलाओं पर आपूर्तिकर्ताओं से मूल्य वृद्धि रोकने का दबाव अभी भी बहुत अधिक है, और उपभोक्ता स्तर पर मूल्य वृद्धि के कोई संकेत नहीं हैं।
दूसरी ओर, दक्षिण एशिया और मध्य पूर्व के उभरते बाज़ारों में आर्थिक गतिविधियों की रफ़्तार धीमी पड़ती दिखी। बांग्लादेश का क्रय प्रबंधक सूचकांक (पीएमआई) मई के 62.8 से गिरकर जून में 52.9 पर आ गया, जो 9.9 अंकों की बड़ी गिरावट है। मेट्रोपॉलिटन चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री और पॉलिसी एक्सचेंज बांग्लादेश द्वारा जारी इस रिपोर्ट में ईद की लंबी छुट्टियों, मानसून की शुरुआत और त्योहार के बाद माँग में कमी को प्रमुख कारण बताया गया। हालाँकि सूचकांक 50 के विस्तार-सीमा से ऊपर रहा, कृषि और सेवा क्षेत्र में वृद्धि धीमी हुई, जबकि विनिर्माण और निर्माण क्षेत्र संकुचन में चले गए। निर्माण क्षेत्र का सूचकांक 40.2 तक गिरना विशेष रूप से चिंताजनक रहा।
मिस्र में गैर-तेल निजी क्षेत्र की स्थिति और भी कमज़ोर रही। एसएंडपी ग्लोबल मिस्र पीएमआई मई के 47.1 से गिरकर 46.0 पर आ गया, जो जनवरी 2023 के बाद का सबसे निचला स्तर है। यह लगातार छठा महीना है जब सूचकांक 50 की तटस्थ सीमा से नीचे रहा। सर्वेक्षण में शामिल कंपनियों ने तरलता की कमी, कच्चे माल की किल्लत, आपूर्ति शृंखला में व्यवधान और क्षेत्रीय संघर्ष के कारण बढ़ती लागत को प्रमुख बाधाएँ बताया। नए ऑर्डर में नवंबर 2022 के बाद की सबसे तेज़ गिरावट दर्ज की गई, जिससे उत्पादन में लगातार पाँचवें महीने कमी आई। हालाँकि, भविष्य को लेकर कारोबारी धारणा अपेक्षाकृत सकारात्मक बनी रही, जिसे क्षेत्रीय तनाव कम होने और सरकारी सहायता की उम्मीदों से बल मिला।
लैटिन अमेरिका से ब्राज़ील के सामान्य मूल्य सूचकांक-आंतरिक उपलब्धता (आईजीपी-डीआई) ने जून में 0.79 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की, जबकि मई में 0.80 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी। फ़ुंडाकाओ गेतुलियो वार्गास (एफजीवी) के अनुसार, इस गिरावट के पीछे थोक मूल्य सूचकांक (आईपीए) में 1.36 प्रतिशत की कमी प्रमुख रही, विशेषकर कच्चे माल की कीमतों में 3.19 प्रतिशत की भारी गिरावट के कारण। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (आईपीसी) में वृद्धि की दर घटकर 0.36 प्रतिशत रह गई, जिसमें आवास और खाद्य समूहों में नरमी आई। वार्षिक आधार पर आईजीपी-डीआई 3.59 प्रतिशत बढ़ा है, जो मुद्रास्फीति के दबाव में कमी का संकेत है।
ये आँकड़े एक ऐसी वैश्विक अर्थव्यवस्था की तस्वीर पेश करते हैं जहाँ विकसित बाज़ारों में उपभोक्ता मूल्य दबाव कम हो रहा है, जबकि कई उभरती अर्थव्यवस्थाएँ आपूर्ति व्यवधानों और भू-राजनीतिक तनावों से जूझ रही हैं। आगे की निगाहें जुलाई के पीएमआई और मूल्य सूचकांक आँकड़ों पर होंगी, जो यह बताएँगे कि मिस्र और बांग्लादेश में सुस्ती अस्थायी है या लंबी अवधि की मंदी का संकेत।
| महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस | +0.20 | neutral |
|---|---|---|
| लैटिन अमेरिकी प्रेस | 0.00 | neutral |
| अरब खाड़ी प्रेस | −0.40 | critical |
Sweden celebrates falling food prices as a success of fiscal policy, benefiting households.
The mechanism isolates the positive deflation data from the global context, presenting it as a virtuous national outcome.
The article omits comparison with contraction in Egypt and deflation in Brazil, which might suggest a more complex global trend.
Brazil frames the monthly deflation as a normal statistical adjustment, without alarm.
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The article omits comparison with contraction in Egypt and deflation in Sweden, which might suggest a global trend.
Egypt is portrayed as suffering a prolonged crisis, with the private sector in distress.
The mechanism emphasizes the duration and depth of the decline, using the multi-year low comparison to amplify the sense of urgency.
The article omits the context of deflation in Sweden and Brazil, which might offer a less gloomy global picture.
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