
विश्व कप 2026: इंग्लैंड के सामने कांगो की पांच-डिफेंडर दीवार, टूर्नामेंट का पहला बड़ा इम्तिहान
इंग्लैंड और डीआर कांगो के बीच अटलांटा में होने वाले मुकाबले में थॉमस टूशेल की टीम को अपनी आक्रामक क्षमता साबित करनी होगी, जबकि कांगो की ऐतिहासिक यात्रा जारी रखने की कोशिश होगी।
अटलांटा के मर्सिडीज-बेंज स्टेडियम में बुधवार को जब इंग्लैंड और डीआर कांगो विश्व कप के प्री-क्वार्टर फाइनल में आमने-सामने होंगे, तो निगाहें एक ऐसे मुकाबले पर होंगी जो यूरोपीय दबदबे और अफ्रीकी जुझारूपन के बीच संतुलन तलाशेगा। ग्रुप एल में क्रोएशिया को 4-2 से हराने और पनामा को 2-0 से मात देने वाली इंग्लिश टीम ने घाना के खिलाफ गोलरहित ड्रॉ के बाद अपनी कमजोर कड़ी पहचान ली है—पांच-डिफेंडर वाली रक्षात्मक संरचनाएं। कोच थॉमस टूशेल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ कहा कि ‘हम अपनी उम्मीदों के मुताबिक खेलते हैं और प्रशंसकों से भी यही अपेक्षा रखते हैं’, लेकिन साथ ही यह भी स्वीकारा कि पैराग्वे और मोरक्को जैसी टीमों के हाथों जर्मनी-नीदरलैंड की विदाई ने नॉकआउट फुटबॉल की संकीर्णता को रेखांकित कर दिया है।
दूसरी ओर, डीआर कांगो पहली बार विश्व कप के नॉकआउट चरण में पहुंचा है और उसकी यात्रा किसी परीकथा से कम नहीं। पुर्तगाल से 1-1 का ड्रॉ, कोलंबिया से 0-1 की हार और उज्बेकिस्तान पर 3-1 की जीत ने साबित किया कि सेबेस्टियन डेसाब्रे की टीम बड़े विपक्षियों के खिलाफ पांच-डिफेंडर के साथ उतरकर भी दो स्ट्राइकरों—योआने विसा और सेड्रिक बाकाम्बू—के जरिए पलटवार करना जानती है। विसा ने अकेले तीन गोल किए हैं और इंग्लिश प्रीमियर लीग में खेलने वाले आरोन वान-बिसाका, नोआ सादिकी जैसे खिलाड़ी इस टीम को अतिरिक्त आत्मविश्वास देते हैं।
इंडोनेशियाई और ब्राजीलियाई मीडिया में छपी रिपोर्टों के अनुसार, टूशेल ने घाना और पनामा के खिलाफ मिले अनुभव से सबक लेते हुए आक्रामक मिडफील्ड तिकड़ी में बदलाव किया है। जूड बेलिंगहम को हैरी केन के ठीक पीछे खिलाने और मार्कस रैशफोर्ड, बुकायो साका जैसे तेज विंगरों को उतारने की योजना है, ताकि कांगो की रक्षापंक्ति को लगातार दबाव में रखा जा सके। वहीं, डेक्लान राइस और इलियट एंडरसन की जोड़ी मध्य में नियंत्रण बनाए रखेगी। चोटिल रीस जेम्स और जेरेल क्वांसा की अनुपस्थिति में राइट-बैक की भूमिका जेड स्पेंस या एज़री कोंसा को संभालनी पड़ सकती है।
भारतीय और स्पेनिश विश्लेषण इस बात पर जोर देते हैं कि इंग्लैंड के लिए यह मैच सिर्फ अगले दौर में प्रवेश का नहीं, बल्कि अपनी चैंपियन मानसिकता साबित करने का भी है। पिछले दो यूरो फाइनल में हार के बाद टूशेल पर 60 साल के खिताबी सूखे को खत्म करने का दबाव है। गोलकीपर जॉर्डन पिकफोर्ड ने कहा कि ‘विश्व कप जीतना हर किसी का सपना है’, लेकिन साथ ही यह भी जोड़ा कि टीम का पूरा ध्यान कांगो पर है। दूसरी तरफ, कांगो के कोच डेसाब्रे को भरोसा है कि इंग्लिश लीग में खेलने वाले उनके खिलाड़ी इस चुनौती के लिए तैयार हैं।
इस मुकाबले का विजेता अगले दौर में मेक्सिको या इक्वाडोर से भिड़ेगा, जो 5 जुलाई को मेक्सिको सिटी में होगा। ऐसे में अटलांटा की यह रात न केवल एक टीम की यात्रा समाप्त करेगी, बल्कि क्वार्टर फाइनल की राह भी तय करेगी।
| लैटिन अमेरिकी प्रेस | +0.30 | aligned |
|---|---|---|
| भारतीय और दक्षिण एशियाई प्रेस | +0.40 | aligned |
Belgium overturns the match with a heroic Tielemans, showing its resilience.
The narrative focuses on the individual player as a symbol of the comeback, creating a national hero.
It omits details about the VAR review that awarded the penalty, avoiding any doubt about the decision.
Belgium stages a breathtaking comeback, using VAR technology to secure victory.
The article uses language of amazement and technology to make the victory even more spectacular.
It does not delve into Senegal's reaction to the defeat, focusing solely on Belgium's comeback.
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