
मिस्र के विरोध और सवालों के घेरे में अर्जेंटीना: क्या मेसी और चैंपियन टीम को मिल रहा विशेष लाभ?
मिस्र के खिलाफ नाटकीय जीत के बाद अर्जेंटीना पर पक्षपात के आरोप तेज, फीफा से जांच की मांग और ऐतिहासिक विवादों ने फिर जन्मी बहस।
अटलांटा में खेले गए प्री-क्वार्टर फाइनल में अर्जेंटीना ने मिस्र को 3-2 से हराकर अगले दौर में जगह बनाई, लेकिन यह जीत विवादों के साए में आई। मिस्र 2-0 की बढ़त गंवा बैठा और अंतिम क्षणों में एंज़ो फर्नांडीज़ के हेडर से मैच हार गया। मिस्र के खिलाड़ियों और कोच हुसाम हसन ने रेफरी फ्रांस्वा लेटेक्सियर के फैसलों पर कड़ी आपत्ति जताई। हसन ने कहा कि उनकी टीम के साथ 'अन्याय' हुआ और यह 'साजिश' हो सकती है ताकि 'विश्व चैंपियन टूर्नामेंट में बनी रहे और मेसी दौड़ में बने रहें'। मिस्र फुटबॉल संघ ने फीफा से आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई और रेफरी टीम को हटाने की मांग की।
मैच के दौरान तीन बड़े फैसले विवाद का केंद्र बने। पहला, मिस्र के मोस्टफा ज़िको का गोल वीएआर के हस्तक्षेप के बाद इस आधार पर रद्द कर दिया गया कि मारवान अटिया ने लिसांद्रो मार्टिनेज़ के पैर पर पैर रख दिया था। दूसरा, मिस्र ने दो पेनल्टी की मांग की—हम्दी फथी को एलेक्सिस मैक एलिस्टर द्वारा खींचने और मोहम्मद सलाह को जूलियन अल्वारेज़ द्वारा गिराए जाने पर—लेकिन रेफरी ने कोई पेनल्टी नहीं दी। तीसरा, अर्जेंटीना के विजयी गोल से ठीक पहले सलाह के साथ हुए संपर्क को लेकर सवाल उठे। अफ्रीकी मीडिया और मिस्र के प्रशंसकों ने इसे 'दोहरे मापदंड' का मामला बताया, जबकि यूरोपीय विशेषज्ञों ने कहा कि ये फैसले विवादास्पद तो हैं, लेकिन स्पष्ट साजिश का प्रमाण नहीं देते।
यह पहला मौका नहीं जब अर्जेंटीना पर पक्षपात के आरोप लगे हों। 2022 विश्व कप में टीम को पांच पेनल्टी मिली थीं, जो किसी भी टीम से सबसे अधिक थीं। इस बार भी अर्जेंटीना के खिलाफ कार्ड का अनुपात चर्चा में है: टीम ने हर 19.7 फाउल पर एक कार्ड देखा, जबकि इंग्लैंड को हर 6.8 फाउल पर कार्ड मिला। अल्जीरिया के खिलाफ शुरुआती मैच में मेसी को एक कठोर चुनौती पर रेड कार्ड नहीं दिया गया, जिसे पूर्व खिलाड़ियों ने 'सौ प्रतिशत रेड कार्ड' बताया। फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फैंटिनो ने भी अर्जेंटीना के एक मैच के बाद कहा कि वे 'अर्जेंटीना के साथ पीड़ा सह रहे थे', हालांकि बाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि वे तटस्थ थे।
फ्रांस और मोरक्को के बीच क्वार्टर फाइनल के लिए पूरी तरह अर्जेंटीनी रेफरी टीम की नियुक्ति ने आग में घी डाला। दक्षिण अमेरिकी मीडिया ने इसे सामान्य नियुक्ति बताया, लेकिन यूरोपीय और मध्य-पूर्वी हलकों में इसे लेकर सवाल उठे कि क्या अर्जेंटीना अपने सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी फ्रांस के मैच में दखल दे सकता है। इसके अलावा, फीफा ने शीर्ष चार वरीयता प्राप्त टीमों—अर्जेंटीना, फ्रांस, स्पेन और इंग्लैंड—को अलग-अलग ग्रुप में रखा, जिससे अर्जेंटीना को अपेक्षाकृत आसान रास्ता मिला: केप वर्डे, मिस्र और अब स्विट्ज़रलैंड।
ऐतिहासिक संदर्भ भी इन आरोपों को बल देते हैं। 1978 में अर्जेंटीना की मेज़बानी में हुए विश्व कप में पेरू के खिलाफ 6-0 की जीत पर साजिश के आरोप लगे थे। 1990 में ब्राज़ील ने आरोप लगाया कि अर्जेंटीना के मेडिकल स्टाफ ने उनके खिलाड़ी ब्रांको को पानी की बोतल में कोई पदार्थ देकर चक्कर खिलाए। हालांकि इनमें से कोई भी आरोप कभी सिद्ध नहीं हुआ। अब अर्जेंटीना का सामना स्विट्ज़रलैंड से क्वार्टर फाइनल में होगा, जबकि मिस्र की शिकायत पर फीफा का रुख आना बाकी है।
| अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस | −0.70 | critical |
|---|---|---|
| अरब खाड़ी प्रेस | 0.00 | neutral |
| लैटिन अमेरिकी प्रेस | 0.00 | neutral |
| ईरानी और संबद्ध प्रेस | −0.10 | neutral |
Egypt denounces a rigged refereeing and demands justice from FIFA.
The bloc builds credibility for the Egyptian complaint by repeating the 'engineered match' accusation and quoting the coach, without offering the Argentine side.
Any reference to the Argentine perspective or justification of the referee decisions is absent.
The Arab Gulf raises the doubt: is Argentina favored? The Egyptian protests deserve attention.
The bloc uses the interrogative form to introduce the controversy without directly accusing, leaving the conclusion to the reader.
Context on the referee decisions and FIFA's response is missing.
Latin America records the Egyptian protest without adding commentary.
The bloc simply reports the facts and official statements, without emphasis or downplaying.
The Argentine perspective and analysis of individual decisions are missing.
Iran (BBC) examines the Egyptian accusations with critical detachment, seeking to assess their validity.
The bloc uses an in-depth article structure, citing sources and offering multiple perspectives, without taking a clear stance.
The official reply from Argentina or FIFA is missing, but the bloc leaves room for doubt.
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