
सुपरमैन की पोशाक में सड़क पर: युवा आंदोलन की नई भाषा
नीट पेपर लीक से उपजे कॉकरोच जनता पार्टी आंदोलन ने एक पीढ़ी की रचनात्मक असहमति को सामने ला दिया, जहाँ हास्य और साहस साथ चल रहे हैं।
मुंबई की एक सुबह, 21 वर्षीय नीरव ने खुद के बनाए सुपरमैन के कपड़े पहने। उसके लिए यह पोशाक कवच थी—कुछ ऐसा जो न जाने कैसे विरोध प्रदर्शन के बीच हौसला दे सकती थी। उसने बाद में बताया, “मुझे ज़मीन पर उतरने से डर लग रहा था, लेकिन इस पोशाक ने माहौल को थोड़ा हल्का कर दिया।” यह सिर्फ एक वेशभूषा नहीं थी; यह एक संकेत था उस पीढ़ी का जो अपनी लड़ाई को मीम संस्कृति, गुलाब के फूल और स्पाइडरमैन के मुखौटों के साथ लड़ रही है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर हफ्तों से डेरा डाले हज़ारों युवाओं ने इसे ‘जेन-ज़ी का आंदोलन’ नाम दिया है, जहाँ तिरपाल के नीचे रातें गुज़रीं और ब्लूटूथ ऐप ‘बिटचैट’ इंटरनेट कटौती के बीच संवाद का ज़रिया बना।
इस आंदोलन की शुरुआत एक चुटकुले से हुई थी। मई में स्थापित ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) ने जून में दिल्ली में तंबू गाड़ दिए, मांग थी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफ़ा और नीट पेपर लीक में मारे गए छात्रों के परिवारों को मुआवज़ा। लेकिन जुलाई के तीसरे हफ्ते तक आते-आते यह आंदोलन किसी एक मांग से आगे बढ़ चुका था। 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान पुलिस की लाठियों और आंसू गैस ने इसे राष्ट्रीय सुर्खियों में ला दिया। सोनम वांगचुक, जो 26 दिनों की भूख हड़ताल पर थे, उन्हें ज़बरन अस्पताल ले जाया गया तो प्रदर्शन और भड़का। इसके बाद दिल्ली ही नहीं, मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु और बिहार तक सड़कों पर युवा उतर आए।
सरकार ने एक साथ कई मोर्चों पर प्रतिक्रिया दी। जंतर-मंतर के आसपास 18 मेट्रो स्टेशन बंद कर दिए गए, इंटरनेट सेवाएँ बार-बार निलंबित की गईं और ब्लूटूथ-आधारित ऐप ‘बिटचैट’ के रिपॉज़िटरी को ब्लॉक करने का आदेश जारी किया गया। इस बीच प्रधानमंत्री मोदी ने इंस्टाग्राम पर एक सेल्फी वीडियो जारी कर पेपर लीक को “गंभीर मुद्दा” बताया और सख्त कानून बनाने का वादा किया। मंत्रिमंडल ने सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम में संशोधन को मंज़ूरी दी, जिसमें संगठित लीक के लिए 10 साल की सज़ा और 10 करोड़ रुपये जुर्माने का प्रावधान है। राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) से 47 अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया गया और संस्थान के पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू हुई।
लेकिन यह आंदोलन सिर्फ नारों तक सीमित नहीं रहा। जेन-ज़ी की भागीदारी ने इसे एक सांस्कृतिक छवि दे दी। जहाँ इंटरनेट ठप हुआ, वहाँ ब्लूटूथ मैसेजिंग चालू रही। पुलिस बैरिकेड के पास खड़ी युवतियों ने झुमके और “रीढ़” का ‘फिट चेक’ रील बनाया। किसी ने पुलिस को गुलाब देकर भागते हुए सबवे सर्फ़र के संगीत पर वीडियो बनाया। जैसा कि एक प्रदर्शनकारी ने एएफपी से कहा, “वे सोचते हैं हम बेवकूफ हैं, लेकिन असल में हम काफी समझदार हैं।” यह बात अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी गूँजी—बीबीसी, खलीज टाइम्स और एबीसी ऑस्ट्रेलिया ने इस आंदोलन को मोदी सरकार के लिए सबसे बड़ी युवा चुनौती बताया।
रात के सन्नाटे में एक और तस्वीर उभरी: वांगचुक को सूप पिलाते दो केंद्रीय मंत्री, उनकी पत्नी गीतांजलि आंगमो का वह बयान कि “पहले 26 दिन के उपवास का आचरण समझो, तब आलोचना करो,” और प्रधानमंत्री का वह सेल्फी वीडियो जिसने रातोंरात दस लाख नए इंस्टाग्राम फॉलोअर जोड़ लिए। मोदी ने कहा, “आपका प्यार बना रहेगा, हमारा नाता और सक्रिय होगा।” लेकिन जंतर-मंतर पर भीड़ कम नहीं हुई, और अगली सुबह फिर वही मुखौटे, वही तख्तियाँ और वही एक सवाल—क्या सिस्टम बदलेगा?
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26 दिन बाद सोनम वांगचुक का अनशन समाप्त, सरकार ने पेपर लीक पर सख्त कानून का वादा किया
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