
उरुग्वे विश्व कप से बाहर: मुस्लेरा की चूक, बिएल्सा का गुस्सा और केप वर्डे का कमाल
गोलकीपर फर्नांडो मुस्लेरा की बड़ी गलती से स्पेन के खिलाफ 1-0 की हार ने उरुग्वे को ग्रुप चरण से बाहर कर दिया, जबकि केप वर्डे ने पहली बार नॉकआउट में जगह बनाई।
गुआडालाहारा के अकरोन स्टेडियम में शुक्रवार रात उरुग्वे का विश्व कप अभियान शर्मनाक अंदाज में खत्म हुआ। स्पेन के खिलाफ 1-0 की हार ने दो बार की विश्व विजेता टीम को ग्रुप एच में तीसरे स्थान पर धकेल दिया, जहां वह केवल दो अंक लेकर बाहर हुई। मैच का एकमात्र गोल 42वें मिनट में आया जब गोलकीपर फर्नांडो मुस्लेरा ने एलेक्स बाएना के सीधे शॉट को हाथों से छोड़ दिया और गेंद धीरे-धीरे गोललाइन पार कर गई। यह मुस्लेरा की टूर्नामेंट में लगातार दूसरी बड़ी चूक थी; इससे पहले केप वर्डे के खिलाफ भी उनकी गलती से गोल हुआ था।
हाफटाइम पर मुस्लेरा ने खुद कोच मार्सेलो बिएल्सा से मैदान से बाहर जाने का अनुरोध किया, जिसे बाद में बिएल्सा ने पुष्टि की। दूसरे हाफ में कप्तान फेडेरिको वाल्वेर्डे को भी बाहर कर दिया गया, जिस पर वह बिना कोच की ओर देखे सीधे बेंच की ओर चले गए और अपनी शर्ट से मुंह ढककर स्टाफ से बात की। मैच के बाद बिएल्सा का गुस्सा फूट पड़ा जब उन्होंने टीवी क्रू पर चिल्लाते हुए कहा, "डाले दे उना वेज़!" (जल्दी करो!)। प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने पूरी जिम्मेदारी लेते हुए कहा, 'मैं उरुग्वे फुटबॉल के लिए कुछ नहीं छोड़ रहा।' उन्होंने माना कि टीम सात अंक की हकदार थी लेकिन सिर्फ दो ही ले सकी।
उरुग्वे की मीडिया ने इसे 'दक्षिण अमेरिका की निराशा' और 'वास्तविकता का स्नान' करार दिया। पूर्व कप्तान डिएगो लुगानो ने कहा कि बिएल्सा को कभी विश्व कप में नहीं होना चाहिए था और उन्होंने माहौल को दूषित किया। एक वायरल वीडियो में एक प्रशंसक ने खिलाड़ियों पर 'अंडे नहीं लगाने' का आरोप लगाया और सुआरेज़, कवानी जैसे दिग्गजों की कमी को महसूस किया। यूरोपीय रिपोर्टों ने बिएल्सा के आक्रोश और टीम के 'अपमानजनक' प्रदर्शन पर ध्यान केंद्रित किया, जबकि एशियाई कवरेज ने उरुग्वे को एकमात्र कॉनमेबोल टीम के रूप में रेखांकित किया जो नॉकआउट में नहीं पहुंची।
टीम के अंदर तनाव की खबरें पहले ही सामने आ चुकी थीं। स्थानीय मीडिया के अनुसार, वाल्वेर्डे, रोड्रिगो बेंटनकुर, मैनुअल उगार्टे और गोलकीपर सर्जियो रोचेत ने स्पेन मैच से पहले बिएल्सा से मुलाकात कर प्रशिक्षण की तीव्रता और रणनीति पर सवाल उठाए थे। उरुग्वे ने पूरे ग्रुप चरण में एक भी जीत दर्ज नहीं की—सऊदी अरब और केप वर्डे से ड्रॉ के बाद स्पेन से हार। यह लगातार दूसरा विश्व कप है जब टीम पहले दौर से बाहर हुई है।
इस हार के साथ, उरुग्वे 2026 विश्व कप में ग्रुप चरण से बाहर होने वाली एकमात्र दक्षिण अमेरिकी टीम बन गई, जबकि पदार्पण कर रहे केप वर्डे ने तीनों मैच ड्रॉ खेलकर ऐतिहासिक रूप से अंतिम 32 में जगह बना ली। बिएल्सा का अनुबंध समाप्त हो रहा है और उनके भविष्य पर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं, लेकिन फिलहाल उरुग्वे फुटबॉल के लिए यह एक गहरे आत्ममंथन का क्षण है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
2 संपादकीय समूह · 1 भाषाएँ
लैटिन अमेरिकी मीडिया बिएल्सा की कठोर आत्म-आलोचना, पूरी जिम्मेदारी लेने और टीम की क्षमता का उपयोग न कर पाने की स्वीकारोक्ति पर जोर देता है। रिपोर्टर पर चिल्लाने की घटना को दबी हुई निराशा और गहरी मायूसी का संकेत माना जाता है, जो व्यक्तिगत और सामूहिक विफलता की कहानी को मजबूत करता है।
भारतीय और दक्षिण एशियाई मीडिया इस घटना को अलग-थलग अंदाज में रिपोर्ट करता है, केवल बिएल्सा द्वारा रिपोर्टर पर चिल्लाने और बाद में जिम्मेदारी स्वीकार करने का उल्लेख करता है। लहजा तटस्थ और वर्णनात्मक है, जिसमें भावनात्मक संदर्भ या उरुग्वे फुटबॉल के लिए दीर्घकालिक प्रभावों की गहराई में नहीं जाया गया है।
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