
ईरान में 560 दवाएं संकटग्रस्त, ब्राजील-कनाडा में भी स्वास्थ्य प्रणालियों पर दबाव
ईरान में सब्सिडी के बावजूद दवा की भारी कमी, ब्राजील में संसाधनों की तंगी और कनाडा में डॉक्टरों की कमी—तीनों देशों की स्वास्थ्य प्रणालियां समान चुनौतियों से जूझ रही हैं।
ईरान की संसदीय स्वास्थ्य समिति के अनुसार, देश में लगभग 560 दवाएं ‘संकटग्रस्त’ और 180 ‘अति-गंभीर’ स्थिति में हैं, जबकि दवा और कच्चे माल के आयात के लिए 28,500 तोमान प्रति डॉलर की सब्सिडी वाली मुद्रा आवंटित की गई है। यह विरोधाभास तब और गहरा गया जब समिति ने स्वीकार किया कि राष्ट्रीय विकास कोष से निकाले गए एक अरब डॉलर में से 70 करोड़ डॉलर का पता नहीं है। साथ ही, बैंकिंग व्यवधानों ने इलाज और दवा खरीद को प्रभावित किया है, जिससे मरीज़ या तो जेब से भुगतान करने को मजबूर हैं या ज़रूरी जांचें छोड़ रहे हैं।
ब्राज़ील में सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली (SUS) लगभग 75% आबादी को सेवाएं देती है, लेकिन संसाधनों की कमी बनी हुई है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने 2025 में 10,057 नए बिस्तर जोड़े और वैकल्पिक सर्जरी में 42% की वृद्धि की, फिर भी पेशेवरों और आपूर्ति की कमी अस्पतालों में भीड़ और लंबी प्रतीक्षा का कारण बनती है। साओ पाउलो के आइंस्टीन अस्पताल जैसे निजी संगठन SUS के तहत 34 इकाइयों का प्रबंधन कर रहे हैं, जो सार्वजनिक-निजी सहयोग का एक मॉडल प्रस्तुत करता है, लेकिन विशेषज्ञ बताते हैं कि सरकारी खर्च GDP का केवल 4.3% है, जो स्पेन जैसे देशों के 7% से काफी कम है।
कनाडा में संकट अधिक व्यक्तिगत रूप में सामने आया है—न्यूफ़ाउंडलैंड में एक पिता को अपने बीमार बच्चे के लिए अर्जेंट केयर क्लिनिक में साढ़े चार घंटे इंतज़ार के बाद हार मानकर आपातकालीन कक्ष जाना पड़ा। एक अन्य मरीज़ को एंडोस्कोपी के लिए चार महीने की प्रतीक्षा बताई गई, तो उसने बांग्लादेश जाकर अगले ही दिन जांच कराई। यहां डॉक्टरों की कमी का कारण मेडिकल स्कूल की सीमित सीटें और विदेशी प्रशिक्षित चिकित्सकों के लिए लाइसेंसिंग की जटिल प्रक्रिया है, जिसके चलते हज़ारों योग्य डॉक्टर टैक्सी चलाने को मजबूर हैं।
तीनों क्षेत्रों में एक समान धागा अक्षमताओं का है: ईरान में एंटीबायोटिक का अत्यधिक नुस्खा और इलेक्ट्रॉनिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड का अभाव, ब्राज़ील में प्राथमिक देखभाल के बिना सीधे विशेषज्ञों के पास जाना, और कनाडा में बजट को निवेश न मानकर लागत समझना। ईरानी संसद अब दवा आयातकों को दी गई मुद्रा और ‘सुनहरे हस्ताक्षरों’ की जांच कर रही है, जबकि ब्राज़ील 2026 के बजट में स्वास्थ्य पर न्यूनतम संवैधानिक खर्च से अधिक आवंटन की योजना बना रहा है। अगला ठोस कदम ईरान की उस जांच का नतीजा होगा जो 70 करोड़ डॉलर के गंतव्य को स्पष्ट करेगी, साथ ही तीनों देशों में इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और रेफ़रल प्रणाली को अनिवार्य करने की दिशा में उठाए जा रहे क़दम।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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स्वास्थ्य संकट अब नीतिगत बहस का विषय नहीं, बल्कि अंतहीन प्रतीक्षा और पारिवारिक डॉक्टरों की अनुपलब्धता की रोज़मर्रा की पीड़ा बन गया है। सिस्टम स्वास्थ्य को निवेश नहीं, बल्कि नियंत्रित करने की लागत मानता है, जिससे मरीज़ खुद को उपेक्षित और धोखा महसूस करते हैं। तत्काल प्रणालीगत बदलाव की माँग है, लेकिन समाधान की उम्मीद टूट रही है।
सार्वजनिक और निजी दोनों स्वास्थ्य क्षेत्र सीमित संसाधनों, उच्च लागत और कड़ी प्रतिस्पर्धा से जूझ रहे हैं, फिर भी नई नीतियाँ और साझेदारियाँ उभर रही हैं। सार्वभौमिक प्रणाली पर दबाव निर्विवाद है, भीड़भाड़ और कमी के बीच, लेकिन हाल के कार्यक्रम आगे का रास्ता दिखाते हैं। चुनौती को पूर्ण पतन के बजाय आर्थिक-वित्तीय संतुलन की खोज के रूप में देखा जा रहा है।
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