
ट्रंप की नई धमकी: अगले सप्ताह ईरान के बिजली संयंत्रों और पुलों पर हमले की चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति ने फॉक्स न्यूज से कहा कि यदि तेहरान बातचीत के लिए नहीं लौटा तो सैन्य कार्रवाई का दायरा नागरिक बुनियादी ढांचे तक बढ़ाया जाएगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को घोषणा की कि यदि ईरान परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन स्वतंत्रता पर कोई समझौता नहीं करता तो अगले सप्ताह से अमेरिकी सेना ईरान के बिजली संयंत्रों और पुलों को निशाना बनाएगी। फॉक्स न्यूज के साथ साक्षात्कार में ट्रंप ने कहा, "हम उनके सभी बिजली संयंत्र ध्वस्त कर देंगे, सभी पुल नष्ट कर देंगे, जब तक वे बातचीत की मेज पर नहीं आते।" यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी सेना लगातार चौथे दिन ईरान पर हमले कर रही है और उसने ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकेबंदी पुनः लागू कर दी है। व्हाइट हाउस के अनुसार, यह कार्रवाई होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों पर ईरानी हमलों के जवाब में की जा रही है, जिसके कारण इस महत्वपूर्ण जलमार्ग से टैंकर यातायात लगभग ठप हो गया है और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है।
वाशिंगटन के रुख के अनुसार, ईरान का सैन्य बुनियादी ढांचा पहले ही काफी कमजोर हो चुका है और यदि अभी हमले रोक दिए जाएं तो भी उसे पुनर्निर्माण में बीस वर्ष लग सकते हैं। ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिकी वार्ताकारों ने मंगलवार शाम को ईरानी प्रतिनिधियों को संदेश दिया कि "बेहतर होगा कि आप समझौता कर लें, वरना आपके पास कुछ नहीं बचेगा।" हालांकि, उन्होंने जमीनी सैन्य अभियान की संभावना से इनकार नहीं किया, लेकिन संकेत दिया कि यह काम "दूसरे लोग" करेंगे। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने बताया कि नए हमले होर्मुज जलडमरूमध्य के निकट ईरानी मिसाइल, ड्रोन और तटीय रक्षा प्रणालियों को निशाना बनाकर किए गए हैं।
तेहरान ने इन धमकियों को खारिज करते हुए कहा कि अमेरिकी सैन्य दबाव और आर्थिक नाकेबंदी उसे बातचीत के लिए मजबूर नहीं कर सकती। ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने सरकारी टेलीविजन से कहा कि अमेरिका के साथ समझौता ज्ञापन "अब अस्तित्व में नहीं है।" इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने बहरीन में अमेरिकी पांचवें बेड़े के कमांड सेंटर, कुवैत में सैन्य ठिकानों और जॉर्डन में अमेरिकी प्रतिष्ठानों पर जवाबी हमलों की पुष्टि की है। आईआरजीसी ने चेतावनी दी कि यदि वाशिंगटन ने समुद्री मार्गों को नियंत्रित कर क्षेत्र के तेल और गैस निर्यात को रोकने का प्रयास किया तो "इस क्षेत्र से ऊर्जा निर्यात या तो सबके लिए होगा या किसी के लिए नहीं।"
अंतरराष्ट्रीय कानूनी नजरिए से, नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने की धमकी गंभीर चिंता का विषय है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने अप्रैल में इसी तरह की धमकियों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत जानबूझकर नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमला करना युद्ध अपराध है। 1949 के जिनेवा सम्मेलनों के तहत नागरिकों के लिए आवश्यक स्थलों पर हमले प्रतिबंधित हैं। इस बीच, खाड़ी देशों ने अमेरिकी नाकेबंदी और शुल्क योजना पर मिली-जुली प्रतिक्रिया दी है। ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले माल पर 20 प्रतिशत शुल्क लगाने की अपनी पूर्व घोषणा को वापस लेते हुए कहा कि खाड़ी देशों ने इसके बदले अमेरिका में "व्यापक" व्यापार और निवेश सौदे करने का विकल्प चुना है।
वर्तमान में, 17 जून का नाजुक युद्धविराम पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है और दोनों पक्षों के बीच सीधी सैन्य टकराव जारी है। राजनयिक सूत्रों के अनुसार, वार्ता के रास्ते अभी पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं, लेकिन अमेरिकी प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जब तक ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन पर प्रतिबंध जारी रखेगा, तब तक सार्थक बातचीत संभव नहीं है। अगले सप्ताह की संभावित कार्रवाई पर कोई औपचारिक समय-सीमा घोषित नहीं की गई है, लेकिन ट्रंप के बयान से संकेत मिलता है कि यदि कूटनीतिक प्रगति नहीं हुई तो सैन्य अभियान का विस्तार किया जाएगा।
| अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस | +0.20 | neutral |
|---|---|---|
| लैटिन अमेरिकी प्रेस | −0.60 | critical |
| अरब खाड़ी प्रेस | 0.00 | neutral |
| अरब लेवांत-मगरिब प्रेस | −0.20 | neutral |
Trump raises the stakes: we will hit Iranian civilian infrastructure if Tehran does not yield. Military pressure is the only language Iran understands.
By presenting the threat as a gradual and calculated strategy, it normalizes the use of force as a diplomatic tool.
It does not mention possible civilian casualties or objections under international law.
Trump threatens to annihilate Iran with attacks on power plants and bridges. It is a warmongering madness that will lead nowhere.
By using extreme lexicon like 'annihilate', it paints Trump as an irrational and dangerous leader, delegitimizing his position.
It does not acknowledge that the threat is part of a negotiation strategy and that Iran has rejected previous deals.
The US administration intensifies pressure on Tehran, moving from military to civilian infrastructure. A clear signal to push for negotiations.
By emphasizing the shift from military to civilian targets, it highlights the seriousness of US pressure, but without condemning it, maintaining an observer tone.
It does not highlight the risk of regional escalation nor the humanitarian implications of attacks on civilian infrastructure.
Trump's threats come amid an ongoing escalation in the Strait of Hormuz. The region is on the brink of a wider crisis.
By framing the threat within the context of the Strait of Hormuz escalation, it amplifies the sense of imminent danger for the region.
It does not mention the possibility of a diplomatic solution nor the fact that Iran could accept a deal.
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