
अमेरिकी-ईरानी टकराव से तेल 90 डॉलर के पार, हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजरानी ठप
लगातार नौवीं रात अमेरिकी हमलों और ईरानी जवाबी कार्रवाई के बीच हॉर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति बाधित, ब्रेंट क्रूड 91 डॉलर के पार, भारत जैसे आयातक देशों पर दबाव।
सोमवार को वैश्विक तेल बाजार में ब्रेंट क्रूड का भाव 3 प्रतिशत उछलकर 91 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जो 11 जून के बाद का सर्वोच्च स्तर है। यह तेजी अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव का नतीजा है, जिसमें अमेरिकी सेना ने लगातार नौवीं रात ईरानी सैन्य ठिकानों पर हमले किए और ईरान के क्रांतिकारी गार्ड्स ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य में दो तेल टैंकरों को विस्फोट के बाद निष्क्रिय करने का दावा किया। ब्रिटेन की समुद्री व्यापार एजेंसी (यूकेएमटीओ) के अनुसार, ओमान के कुमजार तट के पास एक जहाज में आग लगने की सूचना भी मिली है। नतीजतन, इस रणनीतिक जलमार्ग से जहाजों की आवाजाही तेजी से घटी है—रविवार को मात्र चार जहाज ही गुजर सके, जबकि एक दिन पहले यह संख्या आठ थी।
अमेरिकी केंद्रीय कमान (सेंटकॉम) के अनुसार, ये हमले ईरान की उस सैन्य क्षमता को कमजोर करने के लिए हैं जिसका इस्तेमाल वाणिज्यिक जहाजों पर हमले में किया जा रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि हॉर्मुज अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग है और ईरान इसे नियंत्रित करने की कोशिश कर रहा है, जिसका जवाब देना जरूरी है। दूसरी ओर, ईरान के क्रांतिकारी गार्ड्स ने चेतावनी दी कि जब तक अमेरिकी 'आक्रामकता' जारी रहेगी, तब तक 'तेल और गैस की एक बूंद भी' इस जलडमरूमध्य से नहीं गुजर सकेगी। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने हालांकि यह भी कहा कि मध्यस्थों के जरिए अमेरिका के साथ कूटनीतिक आदान-प्रदान जारी है और कुछ प्रस्ताव तेहरान तक पहुंचाए गए हैं।
तेल की कीमतों में यह उछाल ऐसे समय हुआ है जब वैश्विक भंडार पिछले पांच वर्षों के सबसे निचले स्तर पर हैं। यूरोपीय बैंक आईएनजी के विश्लेषकों के अनुसार, यदि यह तनाव अनियंत्रित रहा तो पूरे खाड़ी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर हमलों का माहौल लौट सकता है। भारत जैसे प्रमुख तेल आयातक देशों के लिए यह स्थिति गंभीर आर्थिक दबाव पैदा कर सकती है। भारत अपनी जरूरत का 80 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात करता है, जिसका बड़ा हिस्सा खाड़ी क्षेत्र से आता है। कच्चे तेल के दाम बढ़ने से आयात बिल, पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतें और महंगाई बढ़ने की आशंका है। साथ ही, खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा और उनके द्वारा भेजी जाने वाली विदेशी मुद्रा पर भी असर पड़ सकता है।
यह संघर्ष 28 फरवरी को ईरान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों को निशाना बनाकर किए गए अमेरिकी-इजरायली हमलों से शुरू हुआ था। जून में हुए अंतरिम युद्धविराम समझौते के बावजूद, जुलाई के पहले सप्ताह से लड़ाई फिर तेज हो गई और दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर समझौते के उल्लंघन का आरोप लगाया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 8 जुलाई को समझौते को 'खत्म' घोषित कर दिया था। अब अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकेबंदी फिर से लागू कर दी है, जबकि ईरान ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य में अपनी नाकेबंदी बरकरार रखी है। कुवैत और बहरीन जैसे अमेरिकी सहयोगी देशों पर भी ईरानी ड्रोन और मिसाइल हमले हुए हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री ने अन्य देशों से वैश्विक जहाजरानी की सुरक्षा का बोझ साझा करने का आह्वान किया है। फिलहाल, मध्यस्थता के प्रयास जारी हैं, लेकिन सैन्य कार्रवाइयों में कमी के कोई ठोस संकेत नहीं हैं। तेल बाजार पर नजर रखने वाली अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों का मानना है कि अगले कुछ सप्ताह इस क्षेत्र से तेल निर्यात की स्थायी स्थिति तय करेंगे।
| दक्षिण-पूर्व एशियाई प्रेस | −0.20 | neutral |
|---|---|---|
| लैटिन अमेरिकी प्रेस | 0.00 | neutral |
| उप-सहारा अफ़्रीकी प्रेस | 0.00 | neutral |
Indonesia and its neighbors watch with alarm as a widening conflict unfolds, with the US striking nonstop and Iran responding blow for blow.
By piling up details of successive nights and using terms like 'gempur' (assault), the coverage conveys an impression of unstoppable, symmetric violence.
Latin America watches a distant escalation with detachment, reporting facts without taking sides.
By using descriptive language and attributing quotes to both sides, the coverage avoids taking a stance, presenting the conflict as a sequence of separate events.
Sub-Saharan Africa documents facts impartially, reporting the positions of both sides without favoring any party.
By extensively using official statements and attributing quotes, the coverage constructs a narrative of objective events, avoiding emotional interpretation.
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