
मोटापा और दुबलापन: सेहत का पैमाना सिर्फ वजन नहीं, विशेषज्ञों ने तोड़े आम भ्रम
इंडोनेशिया से रूस तक के चिकित्सकों ने वजन संबंधी गलतफहमियों को खारिज कर बच्चों में मोटापे, दुबले लोगों में उच्च रक्तचाप और वैज्ञानिक वजन प्रबंधन पर रोशनी डाली।
वजन को लेकर आम धारणाएं अक्सर भ्रामक होती हैं। इंडोनेशिया के सुरकार्ता स्थित आरएसयूडी बुंग कार्नो अस्पताल की आंतरिक रोग विशेषज्ञ डॉ. मेलिसा कुर्नियावती ने चेताया कि बच्चों का मोटापा केवल दिखने में भारी होने का मामला नहीं है, बल्कि शरीर में अतिरिक्त वसा का जमाव है जो वयस्कों जैसी गंभीर बीमारियों की शुरुआत कर सकता है। वहीं ईरानी पोषण विशेषज्ञ डॉ. मोहम्मद हसन अबोलहसनी ने 'पानी पीने से भी मोटा होने' के मिथक को वैज्ञानिक रूप से गलत बताया—पानी में कैलोरी नहीं होती, लेकिन सख्त डाइटिंग से घटी चयापचय दर या आनुवंशिक प्रवृत्ति वजन घटाने को कठिन बना सकती है।
दूसरी ओर, रूसी हृदय रोग विशेषज्ञ इरीना वासिल्येवा ने इस भ्रम को तोड़ा कि उच्च रक्तचाप केवल मोटे लोगों को होता है। उनके अनुसार दुबले-पतले व्यक्ति भी उम्र, वंशानुगत कारणों, दीर्घकालिक तनाव, गतिहीन जीवनशैली और छिपे हुए नमक के अधिक सेवन से हाइपरटेंशन के शिकार हो सकते हैं। सॉसेज, चीज़, सॉस और डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों में मौजूद सोडियम शरीर में तरल पदार्थ रोककर रक्तचाप बढ़ा देता है। यह दर्शाता है कि वजन का पैमाना अकेले सेहत की गारंटी नहीं है।
वजन प्रबंधन के लिए ब्राज़ील की पोषण विशेषज्ञ एना क्रिस्टीना गुतिएरेज़ ने तृप्ति बढ़ाने वाले उपाय सुझाए। अमेरिकन जर्नल ऑफ क्लिनिकल न्यूट्रीशन में प्रकाशित समीक्षा के हवाले से उन्होंने बताया कि फाइबर और प्रोटीन युक्त आहार पेट को देर तक भरा रखते हैं और जीएलपी-1 जैसे हार्मोन सक्रिय कर भूख कम करते हैं। भोजन की शुरुआत प्रोटीन और सब्जियों से करने पर ग्लूकोज के उतार-चढ़ाव कम होते हैं, और भोजन से 30 मिनट पहले 500 मिली पानी पीने से पेट भरे होने का अहसास बढ़ता है। दूसरी तरफ, ईरानी विशेषज्ञों ने कम वजन वालों को कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और स्वस्थ वसा से भरपूर खाद्य पदार्थों के साथ प्रतिरोधक व्यायाम करने की सलाह दी ताकि बढ़ा वजन मांसपेशियों के रूप में हो, न कि हानिकारक चर्बी के रूप में।
अमेरिकी स्वास्थ्य दिशानिर्देशों के अनुसार, वजन चाहे जो भी हो, नियमित जांच आवश्यक है। 18 वर्ष की आयु से हर दो साल में रक्तचाप, 20 के बाद हर 4-6 साल में कोलेस्ट्रॉल, और 45 की उम्र से रक्त शर्करा व कोलोरेक्टल कैंसर की जांच शुरू कराने की सिफारिश की गई है। त्वचा की मासिक स्व-परीक्षा और 40 के बाद मैमोग्राम पर चर्चा भी जरूरी है। ये सभी उपाय इस बात पर जोर देते हैं कि स्वास्थ्य का आकलन केवल तराजू के आंकड़ों से नहीं, बल्कि समग्र जांच और जीवनशैली से होता है।
| दक्षिण-पूर्व एशियाई प्रेस | −0.20 | neutral |
|---|---|---|
| रूसी और सीआईएस प्रेस | 0.00 | neutral |
| ईरानी और संबद्ध प्रेस | +0.10 | neutral |
The doctor warns parents: childhood obesity is a real danger requiring immediate action.
Builds plausibility through medical authority and emotional appeal to parental responsibility, presenting risk data without balancing with the limitations of BMI.
Does not mention that thin children can also have health issues, nor that obesity definitions are often based on imperfect BMI.
The cardiologist debunks the common belief linking hypertension and overweight: even thin people are at risk.
Uses specialist authority to counter popular belief with scientific evidence, citing multiple causes like stress and genetics.
Silent on the serious health risks of obesity, focusing only on the fact that thin people can also get sick.
The nutritionist corrects false beliefs about weight and offers practical advice both for those wanting to lose and gain weight.
Presents two complementary articles balancing skepticism toward myths with pragmatic tips, creating a narrative of balance and completeness.
Does not delve into the link between weight and long-term metabolic health, nor socioeconomic inequalities in access to healthy food.
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