
ईरान का दावा: जॉर्डन-कुवैत में अमेरिकी THAAD, पैट्रियट सिस्टम तबाह
ईरान के क्रांतिकारी गार्ड्स ने अमेरिकी हमलों के जवाब में जॉर्डन, कुवैत और कतर में सैन्य ठिकानों पर हमले कर THAAD रडार और पैट्रियट सिस्टम को नष्ट करने का दावा किया है।
ईरान की इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने बृहस्पतिवार को घोषणा की कि उसने जॉर्डन, कुवैत और कतर में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर सटीक हमले किए हैं। IRGC के बयान के अनुसार, इन हमलों में अमेरिकी THAAD मिसाइल रक्षा प्रणाली का रडार, एक पैट्रियट वायु रक्षा प्रणाली और C-RAM रडार नष्ट कर दिए गए। साथ ही, ईंधन भंडारण टैंकों में आग लगा दी गई और हेलीकॉप्टर रखरखाव हैंगर व उपकरण गोदाम को तबाह कर दिया गया। यह कार्रवाई अमेरिकी सेना द्वारा ईरानी क्षेत्र पर बार-बार किए जा रहे हमलों के प्रत्युत्तर में बताई गई है।
IRGC ने जॉर्डन की जनता को संबोधित एक संदेश में तर्क दिया कि अमेरिकी सैन्य अड्डे मेज़बान देशों की संप्रभुता का उल्लंघन हैं, क्योंकि वहाँ अमेरिकी कानून और सैन्य पुलिस का शासन होता है। बयान में कहा गया, 'यह अमेरिका है जिसने आपकी क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन किया है, हमने नहीं। हम अमेरिकी सेना द्वारा कब्ज़ा की गई भूमि पर हमला कर रहे हैं।' IRGC ने 28 फरवरी 2026 को मीनाब में अमेरिकी हमले में मारे गए 168 स्कूली बच्चों का हवाला देते हुए इसे अपना 'कानूनी, धार्मिक और तार्किक अधिकार' बताया कि आक्रामक को जहाँ से भी हमला किया जाए, वहाँ तक उसका पीछा किया जाए।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इसी दौरान ईरान पर लगातार बारहवीं रात हवाई हमले किए जाने की पुष्टि की है। वाशिंगटन के अनुसार, ये हमले ईरान की नौसैनिक क्षमताओं, मिसाइल भंडारों और वायु रक्षा प्रणालियों को निशाना बनाकर किए जा रहे हैं। दोनों पक्षों के बीच यह सैन्य टकराव 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के खिलाफ शुरू किए गए अभियान से उपजा है, जिसके बाद से ईरान खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों पर लगातार पलटवार कर रहा है। जून 2026 में हस्ताक्षरित 'इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग' के तहत 60 दिनों का युद्धविराम सहमति बनी थी, लेकिन दोनों पक्ष एक-दूसरे पर इसका उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए फिर से हमलों में जुट गए हैं।
पश्चिम एशिया में बढ़ते इस तनाव के दक्षिण एशिया, विशेषकर भारत के लिए दूरगामी प्रभाव हो सकते हैं। खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता से ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला और वैश्विक व्यापार मार्ग प्रभावित होने की आशंका है, जिस पर भारत की अर्थव्यवस्था काफी हद तक निर्भर है। फिलहाल, किसी भी पक्ष ने बातचीत की पहल नहीं की है और सैन्य कार्रवाइयाँ जारी हैं। क्षेत्रीय विशेषज्ञों के अनुसार, यदि यह संघर्ष और गहराया तो इसके परिणाम केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेंगे।
| ईरानी और संबद्ध प्रेस | +1.00 | aligned |
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| भारतीय और दक्षिण एशियाई प्रेस | 0.00 | neutral |
IRGC ईरान की ओर से बोलता है, बच्चों को मारने वाली अमेरिकी सेना को दंडित करने के कानूनी और नैतिक अधिकार का दावा करता है।
कथा आक्रामकता को नैतिक बनाती है, हमले को आक्रामकता के रूप में नहीं बल्कि उचित और आनुपातिक सजा के रूप में प्रस्तुत करती है।
ईरान पर पूर्व और समवर्ती अमेरिकी हमलों के संदर्भ को छोड़ दिया गया है, जो संघर्ष की एक सममित व्याख्या को उचित ठहराएगा।
रूस ईरानी दावों और अमेरिकी जवाबी कार्रवाइयों की रिपोर्ट करता है, एक सूचित पर्यवेक्षक की स्थिति बनाए रखता है।
स्रोतों को संतुलित करने की तकनीक निष्पक्षता का आभास कराती है, जबकि अमेरिकी कार्रवाइयों को शामिल करना संघर्ष में समरूपता का सुझाव देता है।
ईरानी हमले के नैतिक चरित्र-चित्रण को छोड़ दिया गया है, जिससे कथा घटनाओं के एक क्रॉनिकल तक सीमित हो जाती है।
भारत बिना किसी टिप्पणी के ईरानी दावे की रिपोर्ट करता है, एक अलग समाचार क्रॉनिकल स्वर अपनाता है।
मूल्यांकनात्मक परहेज पक्ष लेने से बचता है, समाचार को एक मात्र असत्यापित दावे के रूप में प्रस्तुत करता है।
संघर्ष या अमेरिकी कार्रवाइयों के किसी भी संदर्भ को छोड़ दिया गया है, दावे को व्यापक तस्वीर से अलग कर दिया गया है।
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