
लुकाकू का जादू: बेल्जियम ने मिस्र के खिलाफ आत्मघाती गोल से हार टाली, विश्व कप में जारी रहा 'फराओ' का अभिशाप
सिएटल में खेले गए ग्रुप जी के मुकाबले में मिस्र ने एमाम अशूर के गोल से बढ़त बनाई, लेकिन रोमेलू लुकाकू के मैदान में आते ही मोहम्मद हानी के आत्मघाती गोल ने बेल्जियम को 1-1 की बराबरी दिला दी।
2026 फीफा विश्व कप के ग्रुप जी के शुरुआती मुकाबले में बेल्जियम को उस समय करारा झटका लगता दिखा, जब मिस्र के मिडफील्डर एमाम अशूर ने 19वें मिनट में एक शानदार गोल दागकर 'फराओ' को 1-0 की बढ़त दिला दी। अपने 34वें जन्मदिन पर खेल रहे मोहम्मद सलाह ने पेनल्टी एरिया के ठीक बाहर से अशूर को सटीक पास दिया, जिसके बाद अशूर ने गेंद को थिबॉ कोर्टोइस की पहुंच से दूर कोने में पहुंचा दिया। यह गोल मिस्र के लिए ऐतिहासिक जीत की ओर एक कदम लग रहा था, क्योंकि इससे पहले वे अपने चार विश्व कप प्रदर्शनों में कभी कोई मैच नहीं जीत पाए थे। हालांकि, दूसरे हाफ में बेल्जियम के कोच रूडी गार्सिया ने एक निर्णायक बदलाव किया, जिसने पूरे खेल का रुख बदल दिया।
66वें मिनट में जब रोमेलू लुकाकू को चार्ल्स डी केटेलेरे की जगह मैदान पर उतारा गया, तब तक बेल्जियम की 'गोल्डन जेनरेशन' हताश नजर आ रही थी। लुकाकू ने मैदान पर कदम रखने के महज 22 से 28 सेकंड के भीतर ही खेल को बदल दिया। थॉमस म्यूनियर के एक निचले क्रॉस पर लुकाकू ने आक्रामक तरीके से हमला बोला, जिससे दबाव में आए मिस्र के डिफेंडर मोहम्मद हानी ने गलती से गेंद को अपने ही गोल में डाल दिया। यह आत्मघाती गोल न केवल बेल्जियम के लिए राहत लेकर आया, बल्कि इसने मिस्र के उस सपने को भी चकनाचूर कर दिया जो पहले हाफ में बेहद करीब नजर आ रहा था।
यह मुकाबला दोनों टीमों की रणनीतिक विफलताओं और सफलताओं का मिश्रण था। यूरोपीय मीडिया ने बेल्जियम की पहले हाफ की सुस्ती पर सवाल उठाए, जहां टीम गोल पर एक भी शॉट नहीं लगा पाई, जबकि अफ्रीकी और मध्य-पूर्वी सूत्रों ने मिस्र की अनुशासित रक्षा और जवाबी हमलों की सराहना की। मिस्र के कोच हुसाम हसन ने सलाह को केंद्रीय भूमिका में रखने का जो दांव खेला, वह पहले हाफ में पूरी तरह सफल रहा। दूसरी ओर, बेल्जियम के कोच गार्सिया का बिना किसी पारंपरिक स्ट्राइकर के खेलने का प्रयोग तब तक विफल रहा जब तक लुकाकू को उतारा नहीं गया। केविन डी ब्रुने का एक फ्री-किक पोस्ट से टकराना बेल्जियम की निराशा का प्रतीक बन गया।
इस ड्रॉ के बाद ग्रुप जी की समीकरण और भी दिलचस्प हो गए हैं। मिस्र के लिए यह परिणाम एक नैतिक जीत है, लेकिन विश्व कप में पहली जीत का इंतजार अब ईरान और न्यूजीलैंड के खिलाफ होने वाले मैचों पर टल गया है। बेल्जियम, जो 2018 में तीसरे स्थान पर रही थी, के लिए यह प्रदर्शन चिंताजनक है और उसे अपनी उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए आगामी मुकाबलों में काफी सुधार करना होगा। कप्तान यूरी टिलेमैन्स ने स्वीकार किया कि टीम को कई पहलुओं पर काम करने की जरूरत है। अब सभी की निगाहें 21 जून को होने वाले मैचों पर होंगी, जहां बेल्जियम का सामना लॉस एंजिल्स में ईरान से और मिस्र का मुकाबला वैंकूवर में न्यूजीलैंड से होगा, जो नॉकआउट चरण की राह तय करने में निर्णायक साबित होंगे।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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इंडोनेशियाई मीडिया बेल्जियम-मिस्र मैच को ग्रुप G के निर्णायक प्रारंभिक संघर्ष के रूप में पेश करता है, जिसमें प्रसारण समय और स्टार खिलाड़ियों पर जोर है। दोनों टीमों की ताकत को मानते हुए भी बेल्जियम के पक्ष में हल्का पूर्वानुमान है। यह रिपोर्ट व्यवहारिक जानकारी और संतुलित पूर्वावलोकन प्रदान करने पर केंद्रित है।
लैटिन अमेरिकी प्रेस बेल्जियम-मिस्र मुकाबले को संदेह भरी नज़र से देखती है और बेल्जियम की सुनहरी पीढ़ी के बावजूद बार-बार अपेक्षाओं पर खरी न उतरने की आदत को उजागर करती है। नाममात्र के प्रबल दावेदार होते हुए भी, दबाव और पिछली नाकामियाँ मिस्र के लिए राह बना सकती हैं। कथ्य अधूरी संभावनाओं और पसंदीदा होने के बोझ पर केंद्रित है।
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