
जब माँ बनना जीवन की योजना का हिस्सा नहीं रहा: अर्जेंटीना से वैश्विक मंच तक बदलते परिवार के सपने
अर्जेंटीना में एक बेटी की निःसंतान रहने की चाहत, संयुक्त राष्ट्र के सर्वेक्षण में आर्थिक बाधाओं का खुलासा और वैश्विक स्तर पर बांझपन के बढ़ते मामले—ये सब मिलकर परिवार निर्माण की बदलती परिभाषा की कहानी कहते हैं।
अर्जेंटीना की राजधानी ब्यूनस आयर्स में एक शाम, 75 वर्षीय अबीगैल एफ. अपनी 38 वर्षीय बेटी मरीना से एक पुरानी शिकायत दोहराती हैं: “तुझे अपने काम, करियर, यात्राओं और बिल्लियों से ही मतलब है, बच्चे कभी नहीं आए।” मरीना, जो एक वकील हैं, का जवाब हर बार एक ही होता है— “दादी बनने का कोई अधिकार नहीं होता।” यह संवाद सिर्फ एक परिवार की कहानी नहीं है। यूनिवर्सिडाड ऑस्ट्रल के एक हालिया अध्ययन के अनुसार, अर्जेंटीना में केवल 46 प्रतिशत लोग अब बच्चे पैदा करना बहुत महत्वपूर्ण मानते हैं, जबकि एक दशक पहले यह आँकड़ा 77 प्रतिशत था। जो लोग संतान नहीं चाहते, उनमें से 57.3 प्रतिशत का कहना है कि मातृत्व या पितृत्व उनकी जीवन-योजना का हिस्सा ही नहीं है। 18 से 34 वर्ष के युवाओं में तो यह अनुपात और भी कम है—मात्र 34 प्रतिशत इसे पूर्ण जीवन के लिए ज़रूरी मानते हैं।
लेकिन यह तस्वीर पूरी दुनिया में एक जैसी नहीं है। संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (यूएनएफपीए) ने 73 देशों और क्षेत्रों के 1,08,000 से अधिक युवाओं पर किए गए एक विशाल सर्वेक्षण में पाया कि अधिकांश लोग अब भी विवाह, दीर्घकालिक संबंध और पितृत्व चाहते हैं। 35 से 39 वर्ष की आयु के निःसंतान पुरुषों में 79 प्रतिशत और महिलाओं में 72 प्रतिशत अब भी माता-पिता बनने की इच्छा रखते हैं। यूएनएफपीए के अनुसार, असली बाधाएँ आर्थिक हैं—वित्तीय सुरक्षा, स्थिर रोज़गार और आवास की कमी। सर्वेक्षण में शामिल 57 प्रतिशत लोगों ने इन्हें विवाह या सहवास में सबसे बड़ी रुकावट बताया। यूएनएफपीए ने इस धारणा को भी खारिज किया कि नारीवाद या स्वार्थ के कारण प्रजनन दर गिर रही है; रिपोर्ट बताती है कि लगभग एक-चौथाई महिलाएँ अपने स्वास्थ्य संबंधी निर्णय नहीं ले पातीं और लगभग इतनी ही संख्या यौन संबंधों से इनकार करने में असमर्थ है।
इच्छा और वास्तविकता के बीच यह खाई जैविक घड़ी की सुइयों से और गहरी हो जाती है। द लैंसेट में प्रकाशित एक शोध के अनुसार, वैश्विक स्तर पर बांझपन के मामले 2023 के 5.36 करोड़ से बढ़कर 2036 तक 8 करोड़ तक पहुँच सकते हैं—यानी डेढ़ गुना वृद्धि। सबसे अधिक प्रभावित 35 से 39 वर्ष की महिलाएँ होंगी, क्योंकि उम्र के साथ अंडाणुओं का भंडार और निषेचन क्षमता घटती है। शोधकर्ताओं ने पाया कि यह वृद्धि विकसित देशों में सबसे तेज़ है, जहाँ महिलाएँ देर से गर्भधारण कर रही हैं, लेकिन विकासशील देशों में भी जीवनशैली और सामाजिक बदलावों के चलते बांझपन बढ़ रहा है। वहाँ एक अतिरिक्त चुनौती है—महँगे उपचार तक पहुँच सीमित है, जिससे समस्या और जटिल हो जाती है।
इस बीच, ब्रिटेन का एक सर्वेक्षण परिवार शुरू करने की एक और शर्त—खुद का घर—की ओर इशारा करता है। यॉर्कशायर बिल्डिंग सोसाइटी के लिए किए गए अध्ययन में पाया गया कि जो लोग मध्य आयु तक मकान नहीं खरीद पाते, उनमें गृहस्वामित्व की आकांक्षा तेज़ी से धुँधली पड़ जाती है। 25-34 वर्ष के गैर-गृहस्वामियों में 76 प्रतिशत घर खरीदना चाहते हैं, लेकिन 45-54 वर्ष की आयु तक यह आँकड़ा गिरकर 38 प्रतिशत रह जाता है। समाज के निदेशक टॉम सिम्पसन के अनुसार, “ब्रिटेन ने गृहस्वामित्व से प्रेम करना नहीं छोड़ा है, लेकिन विश्वास बदल रहा है—जो लोग 30 की उम्र के अंत तक नहीं खरीद पाते, उनके लिए सपना पहुँच से बाहर लगने लगता है।” स्थिरता और सुरक्षा का यह प्रतीक जब अधूरा रह जाता है, तो परिवार बनाने की नींव भी कमज़ोर पड़ती है।
अर्जेंटीना के स्वास्थ्य मंत्रालय के आँकड़े बताते हैं कि पिछले एक दशक में वहाँ जन्मों की संख्या 7,77,012 से गिरकर 4,13,135 रह गई—लगभग आधी। अबीगैल जैसी माँओं के घरों में एक खामोशी पसरी है, जहाँ कभी नाती-पोतों की आहट गूँजने की उम्मीद थी। दूसरी ओर, यूएनएफपीए की कार्यकारी निदेशक डिएन कीटा कहती हैं, “युवा अपने भीतर उम्मीद और अपने परिवारों के लिए एक स्पष्ट दृष्टि लेकर चलते हैं। जब हम आर्थिक बाधाएँ तोड़ते हैं, तब वे अपने लिए सही चुनाव कर सकते हैं।” यह दोहरी सच्चाई—एक ओर घटती आकांक्षा, दूसरी ओर अधूरी चाहत—दुनिया भर के शहरों और घरों में गूँज रही है।
| लैटिन अमेरिकी प्रेस | 0.00 | neutral |
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| उप-सहारा अफ़्रीकी प्रेस | −0.20 | neutral |
| दक्षिण-पूर्व एशियाई प्रेस | 0.00 | neutral |
Young Argentines choose career and personal freedom over parenthood.
The article uses a survey from a private university to present the decline in parenthood as a voluntary, value-driven shift, downplaying economic or structural factors.
The article omits the economic constraints highlighted by the UN survey, such as financial insecurity and unstable employment, which are central to the African bloc's framing.
Economic hardship, not feminism, prevents young people from starting families.
The article universalizes the UN survey's findings to counter a common narrative, using authoritative data to shift blame from cultural values to economic structures.
The article omits the medical infertility projections from the Southeast Asian bloc, which focus on age-related biological decline rather than economic factors.
Global infertility will rise due to delayed motherhood, an inevitable biological fact.
The article presents a Lancet study as an objective scientific projection, using numbers to depoliticize the issue and frame it as a natural consequence of age, ignoring social or economic factors.
The article omits the UN survey's finding that young people still want children but are blocked by economic constraints, which would complicate the biological determinism.
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