
IOC के फैसले के बाद FIFA रूसी फुटबॉल टीमों की वापसी पर करेगा विचार
अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति द्वारा प्रतिबंध हटाने के बाद फीफा ने रूसी टीमों पर लगे निलंबन की समीक्षा का संकेत दिया, जिससे विश्व फुटबॉल में बड़े बदलाव की संभावना।
अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) ने मंगलवार को रूसी खिलाड़ियों पर से प्रतिबंध हटाने की सिफारिश कर दी, और इसके कुछ ही घंटों बाद फीफा ने भी रूसी फुटबॉल टीमों की वापसी का रास्ता खोलने के संकेत दे दिए। फीफा ने कहा कि वह IOC के इस निर्णय का विश्लेषण करेगा और संबंधित हितधारकों के साथ समन्वय में अगले कदम तय करेगा। यह बयान ऐसे समय आया है जब रूस की पुरुष और महिला राष्ट्रीय टीमें फरवरी 2022 से अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं से बाहर हैं और केवल मैत्री मैच खेल रही हैं।
यह प्रतिबंध तब लगा था जब यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद फीफा और यूरोपीय फुटबॉल संघ (UEFA) ने सुरक्षा और प्रतियोगिता की अखंडता का हवाला देते हुए सभी रूसी क्लबों और राष्ट्रीय टीमों को निलंबित कर दिया था। इस दौरान रूसी फुटबॉल संघ (RFU) ने एशियाई फुटबॉल परिसंघ में जाने का विचार त्याग दिया और यूरोपीय फुटबॉल में बने रहने की रणनीति अपनाई। फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो पहले ही कह चुके हैं कि संगठन को रूसी टीमों की वापसी पर विचार करना चाहिए, जबकि UEFA अध्यक्ष अलेक्जेंडर चेफरिन का रुख सख्त रहा है कि यूक्रेन में युद्ध समाप्त होने के बाद ही वापसी संभव है।
IOC के निर्णय के बाद रूसी खेल मंत्री मिखाइल देगत्यारेव ने इसे अंतरराष्ट्रीय खेलों में वापसी का ‘त्वरक’ बताया, और विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया ज़खारोवा ने इसे ‘सामान्य बुद्धि की जीत’ करार दिया। हालांकि, सभी खेल संघ एकमत नहीं हैं—अंतरराष्ट्रीय बायथलॉन संघ (IBU) ने साफ कह दिया कि रूसी एथलीटों पर प्रतिबंध बरकरार रहेगा। दूसरी ओर, 20 से अधिक खेल संघ पहले ही जूनियर स्तर पर रूसी खिलाड़ियों को अपने झंडे और राष्ट्रगान के साथ भाग लेने की अनुमति दे चुके हैं।
फीफा ने हाल ही में एक छोटा कदम उठाते हुए अक्टूबर में अज़रबैजान में होने वाली अंडर-15 विश्व चैंपियनशिप के लिए रूस और बेलारूस सहित सभी सदस्य संघों को आमंत्रित किया है। यह इस बात का संकेत है कि युवा स्तर पर प्रतिबंधों में ढील दी जा रही है। अब सबकी निगाहें फीफा की उस विश्लेषण प्रक्रिया पर हैं जो वरिष्ठ टीमों की पूर्ण वापसी का मार्ग प्रशस्त कर सकती है। IOC ने साथ ही यह शर्त भी रखी है कि किसी भी रूसी एथलीट को अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में उतरने से पहले कई डोपिंग-रोधी परीक्षणों से गुजरना होगा।
इस घटनाक्रम ने 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक के लिए रूसी खिलाड़ियों की क्वालीफिकेशन की राह आसान कर दी है, लेकिन फुटबॉल की दुनिया में असली परीक्षा तब होगी जब फीफा और UEFA आपसी समन्वय से कोई ठोस निर्णय लेंगे। फिलहाल, रूसी पुरुष टीम फीफा रैंकिंग में 35वें और महिला टीम 27वें स्थान पर है, और दोनों ही बड़े टूर्नामेंटों से दूर केवल अभ्यास मैचों के सहारे अपनी प्रतिस्पर्धी धार बनाए हुए हैं।
| अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस | −0.20 | neutral |
|---|---|---|
| महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस | −0.50 | critical |
| रूसी और सीआईएस प्रेस | +0.60 | aligned |
FIFA proceeds with institutional caution, without taking sides.
The bloc neutralizes the moral dimension by turning the decision into a bureaucratic routine.
The bloc omits explicit reference to Russia's invasion of Ukraine, using the euphemism 'war-related sanctions'.
The war in Ukraine is the inescapable backdrop; any discussion of Russia's return must first acknowledge the aggression.
The bloc anchors the news in the moral context of the invasion, making the lifting of sanctions appear premature or unjustified.
Russia's exclusion was unjust; the IOC's decision is a step toward correcting that wrong.
The bloc frames the IOC decision as a restoration of rights, omitting the war context to present the lifting as a natural and fair process.
The bloc omits any mention of the war in Ukraine or the reasons for the original sanctions, framing the IOC decision as a purely administrative correction.
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