
यूरोप में तीसरी भीषण गर्मी की लहर, WHO ने दी 'घातक सप्ताहों' की चेतावनी
इटली, स्पेन और पुर्तगाल में तापमान 43 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने के साथ, विश्व स्वास्थ्य संगठन ने यूरोप के लिए और अधिक घातक सप्ताहों की आशंका जताई है।
इटली इस वर्ष की अपनी तीसरी भीषण गर्मी की लहर का सामना कर रहा है, जिसमें पो वैली में तापमान 39 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है और सप्ताहांत तक सार्डिनिया में 40 डिग्री तथा पुगलिया व टस्कनी में 39 डिग्री दर्ज किए जाने की संभावना है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के यूरोपीय क्षेत्रीय निदेशक हांस क्लूगे ने आपात बैठक के बाद चेतावनी दी कि अटलांटिक के ऊपर बन रही नई गर्म हवा की प्रणाली से आने वाले सप्ताह 'घातक' हो सकते हैं। स्पेन और पुर्तगाल में तापमान 43 डिग्री सेल्सियस तक जा सकता है, जबकि मोरक्को में शेरगी हवाओं के कारण 48 डिग्री तक की संभावना है। जून की पिछली लहर में अकेले फ्रांस, नीदरलैंड और बेल्जियम में लगभग 3,700 अतिरिक्त मौतें दर्ज की गई थीं।
इस गर्मी की लहर का प्रमुख कारण सहारा से आने वाला एक शक्तिशाली अफ्रीकी प्रतिचक्रवात है, जो गर्म और शुष्क हवा को भूमध्य सागर की ओर धकेल रहा है। वैज्ञानिक नेटवर्क वर्ल्ड वेदर एट्रिब्यूशन के एक अध्ययन के अनुसार, मानव-जनित जलवायु परिवर्तन के बिना इस स्तर का अत्यधिक तापमान संभव नहीं था। भूमध्य सागर की सतह का तापमान इस मौसम के औसत से 2.6 डिग्री सेल्सियस अधिक रिकॉर्ड किया गया है, जो गर्मी को और बढ़ा रहा है। शहरी क्षेत्रों में सीमेंटीकरण और हरियाली की कमी के कारण 'हीट आइलैंड' प्रभाव स्थिति को गंभीर बना रहा है; मिलान में रात का तापमान 27 डिग्री सेल्सियस तक रहने से वह बैंकॉक और जकार्ता जैसे उष्णकटिबंधीय शहरों के बराबर पहुंच गया है।
स्वास्थ्य प्रणालियों पर दबाव स्पष्ट है: इटली के स्वास्थ्य मंत्रालय ने फ्लोरेंस के लिए अधिकतम जोखिम का 'रेड अलर्ट' और दस अन्य शहरों के लिए 'ऑरेंज अलर्ट' जारी किया है। कृषि क्षेत्र में, एड्रियाटिक तटीय लैगून में पानी का तापमान 32 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने से स्कारडोवारी में एक हजार क्विंटल मसल्स और गोरो में 90 प्रतिशत क्लैम्स की अचानक मृत्यु हो गई। कॉन्फकोऑपरेटिव के अनुसार, जलवायु परिवर्तन से इतालवी मत्स्य पालन को सालाना लगभग 200 मिलियन यूरो का प्रत्यक्ष नुकसान हो रहा है। पुर्तगाल, स्पेन, फ्रांस और ग्रीस में जंगल की आग से लगभग 20,000 हेक्टेयर भूमि जल चुकी है। साथ ही, 'कूलिंग पॉवर्टी' एक नई चुनौती के रूप में उभर रही है, जहां निम्न-आय वर्ग के परिवार बिजली बिल के डर से कूलिंग उपकरणों का उपयोग नहीं कर पाते।
यह गर्मी की लहर कम से कम 20-23 जुलाई तक बने रहने का अनुमान है। WHO ने सदस्य देशों से राष्ट्रीय हीट-हेल्थ एक्शन प्लान को मजबूत करने का आग्रह किया है, क्योंकि यूरोपीय क्षेत्र के आधे से भी कम देशों के पास ऐसी योजनाएं हैं। दक्षिण एशिया के संदर्भ में, भारत और पाकिस्तान में भी लगातार रिकॉर्ड तोड़ गर्मी की घटनाएं सार्वजनिक स्वास्थ्य और कृषि पर दबाव डाल रही हैं, जो इस वैश्विक पैटर्न की गंभीरता को रेखांकित करता है। तत्काल सुरक्षा के लिए नागरिकों को हाइड्रेटेड रहने, दोपहर के समय बाहर न निकलने और कमजोर समूहों की जांच करने की सलाह दी गई है। अगला ध्यान देने योग्य मील का पत्थर राष्ट्रीय स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा जारी मृत्यु दर और रुग्णता के आंकड़े होंगे, जो इस लहर के वास्तविक प्रभाव को स्पष्ट करेंगे।
| चीनी प्रेस | +0.30 | aligned |
|---|---|---|
| अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस | −0.50 | critical |
| अरब खाड़ी प्रेस | −0.30 | critical |
| महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस | −0.40 | critical |
Thailand turns Europe's climate crisis into a business opportunity, attracting tourists and boosting AC exports.
Presents the crisis as a competitive advantage for its own country, using marketing language for tourism and trade.
Omits the human casualties, infrastructure damage, and health alerts in Europe, focusing solely on opportunities for Thailand.
UK authorities and the WHO issue travel and health warnings, alerting the public to an imminent danger.
Uses emergency and civil protection language, with official alerts and categorical recommendations to create a sense of urgency.
Ignores economic opportunities and long-term adaptation measures, focusing solely on the immediate health emergency.
Europe must accelerate infrastructure adaptation, because extreme heat is already warping roads and rails.
Adopts a technical and analytical tone, citing UNECE reports and weather data, to argue for investment in asphalt and resilient materials.
Omits human health effects and business opportunities, focusing on infrastructure damage and the need for adaptation.
Europe faces a nightmare summer, but some companies profit from the demand for cooling and artificial intelligence.
Alternates alarmist tones (catastrophic forecasts, historical records) with opportunistic tones (cooling business), creating an ambivalent narrative that legitimizes both fear and profit.
Does not mention the impact on marine ecosystems nor opportunities for non-European countries, focusing on internal consequences and market reactions.
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