
अमेरिका ने ईरान पर तीसरी रात हमले किए, होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ा
पांच घंटे के ऑपरेशन में अमेरिकी सेना ने ईरानी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया, जबकि ईरान ने यूएई के टैंकरों पर हमला कर एक भारतीय नागरिक की मौत की पुष्टि की।
अमेरिकी केंद्रीय कमान (CENTCOM) ने 13 जुलाई की रात को ईरान के सैन्य ठिकानों पर तीसरी लगातार रात हमले किए। पांच घंटे तक चले इस अभियान में बुशहर, चाहबहार, जास्क, कोनारक, अबू मूसा और बंदर अब्बास स्थित तटीय रक्षा प्रणालियों, मिसाइल और ड्रोन प्रतिष्ठानों तथा नौसैनिक क्षमताओं को निशाना बनाया गया। CENTCOM के अनुसार, इन हमलों का उद्देश्य ईरान की वाणिज्यिक जहाजरानी पर हमला करने की क्षमता को कम करना है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इससे कुछ घंटे पहले होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी जहाजरानी की नाकाबंदी फिर से लागू करने और जलडमरूमध्य की सुरक्षा के लिए माल ढुलाई पर 20 प्रतिशत शुल्क लगाने की घोषणा की थी।
ईरान की ओर से भी जवाबी कार्रवाई की गई। ईरानी राज्य मीडिया और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के अनुसार, ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के दो तेल टैंकरों 'मोम्बासा' और 'अल बाहिया' पर क्रूज मिसाइलों से हमला किया। UAE के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि इस हमले में एक भारतीय चालक दल सदस्य की मौत हो गई और आठ अन्य घायल हुए, जिनमें छह भारतीय और दो यूक्रेनी नागरिक शामिल हैं। IRGC का दावा है कि इन टैंकरों ने बार-बार चेतावनियों को अनदेखा किया और नेविगेशन सिस्टम बंद कर दिए थे। इसके अलावा, ईरानी बलों ने जॉर्डन और बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइल हमलों की बात कही, हालांकि जॉर्डन और बहरीन के अधिकारियों ने दावा किया कि उनकी वायु रक्षा प्रणालियों ने इन हमलों को विफल कर दिया।
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल व्यापार का एक महत्वपूर्ण मार्ग है, जहां से दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल आपूर्ति गुजरती है। ऊर्जा बाजार विशेषेषज्ञों के अनुसार, भारत जैसे दक्षिण एशियाई देशों के लिए इस मार्ग में स्थिरता महत्वपूर्ण है, क्योंकि उनकी आयातित कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से आता है। संयुक्त अरब अमीरात के टैंकर पर हमले में एक भारतीय नागरिक की मौत हुई है, जिससे खाड़ी क्षेत्र में कार्यरत प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित हुआ है। क्षेत्रीय सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि यदि तनाव जारी रहा तो तेल की कीमतों में उछाल और आपूर्ति श्रृंखला में बाधा आ सकती है, जिसका सीधा प्रभाव दक्षिण एशियाई अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ेगा।
यह ताजा हिंसा उस युद्धविराम के टूटने के बाद हुई है जो 17 जून को अमेरिका और ईरान के बीच हस्ताक्षरित एक समझौते के तहत लागू हुआ था। इस समझौते में होर्मुज जलडमरूमध्य में नाकाबंदी हटाने, ईरानी परिसंपत्तियों को चरणबद्ध तरीके से जारी करने, प्रतिबंधों में ढील और ईरानी बंदरगाहों की अमेरिकी घेराबंदी समाप्त करने का प्रावधान था। हालांकि, 7 जुलाई को वाशिंगटन ने तेहरान पर वाणिज्यिक जहाजों पर हमले का आरोप लगाते हुए युद्धविराम समाप्त कर दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कांग्रेस को आधिकारिक रूप से सूचित किया है कि अमेरिका ईरान के साथ युद्ध की स्थिति में है, जिससे 60 दिनों की अवधि शुरू हो गई है जिसके दौरान विधायी मंजूरी के बिना सैन्य हमले किए जा सकते हैं। CENTCOM के अनुसार, इस समय मध्य पूर्व में 50,000 से अधिक अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। ईरानी अधिकारियों ने कहा है कि जब तक क्षेत्र में अमेरिकी हस्तक्षेप समाप्त नहीं होता, तब तक होर्मुज जलडमरूमध्य बंद रहेगा। दोनों पक्षों के बीच फिलहाल किसी कूटनीतिक पहल की कोई सूचना नहीं है।
| रूसी और सीआईएस प्रेस | −0.20 | neutral |
|---|---|---|
| अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस | 0.00 | neutral |
| अरब खाड़ी प्रेस | +0.30 | aligned |
Russia projects the conflict as a symmetrical exchange, where Iran is not only a victim but also an actor capable of striking back.
By placing the Iranian retaliation immediately after the US strike report, it creates a temporal sequence of reciprocity, normalizing the Iranian response and balancing the narrative.
It omits that the source for the Iranian retaliation is Press TV, an Iranian state channel, and provides no independent verification.
BBC takes the role of a neutral but global reporter, linking local events to broader economic and diplomatic consequences.
By alternating CENTCOM statements and news of Iranian attacks, it builds a cause-effect narrative that avoids taking sides.
It does not report the Iranian strikes on US bases in Kuwait, present in Russian media, thus limiting the scope of Iran's response.
The Gulf aligns with the security perspective, presenting the United States as the guarantor of stability in the Strait of Hormuz.
Omitting any mention of Iranian attacks or civilian casualties focuses attention on the necessity of the American intervention, reinforcing its legitimacy.
It does not mention the Iranian attack on UAE tankers, which would be highly relevant for a Gulf audience, nor the retaliation against US bases in Kuwait.
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