
अल नीनो का प्रकोप: दक्षिण अमेरिका में तूफानों की चेतावनी, वैश्विक कृषि पर संकट के बादल
प्रशांत महासागर के गर्म होने से उत्पन्न अल नीनो ने दस्तक दे दी है, जिससे ब्राज़ील और अर्जेंटीना में भारी बारिश व तूफान की आशंका है, जबकि कोलंबिया और मैक्सिको में सूखे से कृषि निर्यात प्रभावित होने का खतरा है।
अल नीनो मौसम चक्र ने आधिकारिक रूप से दस्तक दे दी है, और इसके साथ ही दक्षिण अमेरिका के बड़े हिस्से में अगले कुछ दिनों में भीषण तूफानों की चेतावनी जारी कर दी गई है। अमेरिकी जलवायु पूर्वानुमान केंद्र (सीपीसी) के अनुसार, मई में उभरी यह स्थिति शीतकाल में चरम पर होगी, और इसके अक्टूबर-दिसंबर 2026 तक 'अत्यंत प्रबल' श्रेणी में पहुंचने की 81 प्रतिशत संभावना है। ब्राज़ील की राष्ट्रीय मौसम विज्ञान संस्था (इनमेट) ने गुरुवार 16 जुलाई से रियो ग्रांडे दो सुल राज्य में तूफान, ओलावृष्टि और 100 किमी प्रति घंटे तक की रफ्तार वाली हवाओं की चेतावनी दी है, जिससे 200 से 400 मिलीमीटर तक बारिश हो सकती है। अर्जेंटीना के मौसम विज्ञानियों ने भी मध्य और उत्तरी प्रांतों में अगस्त से जनवरी 2027 के बीच कई चरणों में भारी वर्षा की भविष्यवाणी की है, जिसमें एक ही दिन में 300 मिलीमीटर तक बारिश के असाधारण प्रकरण संभव हैं।
इन तत्काल खतरों के बीच, अल नीनो के दीर्घकालिक आर्थिक प्रभावों को लेकर चिंता गहरा रही है। कोलंबिया के विदेश व्यापार संघ (एनालडेक्स) के विश्लेषण के अनुसार, देश के दस प्रमुख गैर-खनिज कृषि निर्यातों में से आठ—कॉफी, केला, फूल, एवोकाडो, पाम तेल और चीनी—सूखे या अतिवृष्टि की चपेट में आ सकते हैं। लैटिन अमेरिका में जलवायु आपदाओं से होने वाली 82 प्रतिशत प्रत्यक्ष हानि कृषि क्षेत्र पर पड़ती है, और कोलंबिया का कृषि निर्यात इस वर्ष पहले ही 1.1 प्रतिशत गिर चुका है। मैक्सिको में, ऐतिहासिक आंकड़े बताते हैं कि 1997-98 के प्रबल अल नीनो के दौरान वर्षा में 50 प्रतिशत की कमी आई और कृषि उत्पादन 14 प्रतिशत गिर गया था, जिससे 20 लाख हेक्टेयर फसल बर्बाद हुई थी। अमेरिकी कृषि विभाग ने 2026 में खाद्य कीमतों में 4.7 प्रतिशत तक की वृद्धि का अनुमान लगाया है, जिसमें चीनी और कोको उत्पाद 8.4 प्रतिशत तक महंगे हो सकते हैं।
वैश्विक स्तर पर, अल नीनो के प्रभाव क्षेत्रीय विषमताएं दिखाते हैं। जहां दक्षिण अमेरिका का दक्षिणी शंकु (ब्राज़ील का दक्षिणी भाग, अर्जेंटीना, उरुग्वे) भारी बारिश और बाढ़ की चपेट में है, वहीं कोलंबिया, मध्य अमेरिका और मैक्सिको के कुछ हिस्से सूखे और ताप लहरों की ओर बढ़ रहे हैं। डार्टमाउथ कॉलेज के एक अध्ययन के अनुसार, 2015-16 के अल नीनो से वैश्विक उत्पादकता में 7.8 ट्रिलियन डॉलर से अधिक की हानि हुई थी, जिसका असर वर्षों तक रहा। जेपी मॉर्गन की जलवायु सलाहकार सारा कैपनिक के हवाले से कहा गया है कि इस घटना से केवल पारंपरिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र ही नहीं, बल्कि व्यापक अस्थिरता की उम्मीद की जानी चाहिए।
हालांकि, सभी पूर्वानुमानों में सावधानी बरती जा रही है। कोलंबिया के आइडियम संस्थान और अर्जेंटीना के मौसम विज्ञानी इस बात पर जोर देते हैं कि आने वाले महीनों में परिस्थितियां धीमी या तेज हो सकती हैं, और हर अल नीनो की अपनी अलग विशेषताएं होती हैं। फिलहाल, ब्राज़ील के रियो ग्रांडे दो सुल में स्थानीय प्रशासन ने बाढ़ संभावित क्षेत्रों में परिवारों की निगरानी शुरू कर दी है, जबकि अर्जेंटीना के सांता फे प्रांत ने आपातकालीन प्रतिक्रिया के लिए 10 अरब पेसो का कोष घोषित किया है। वैश्विक बाजारों की निगाहें अब प्रशांत महासागर के तापमान पर टिकी हैं, क्योंकि यह चक्र 2027 के वसंत तक जारी रहने की 97 प्रतिशत संभावना है।
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