
चोरी, बवंडर की चेतावनी और गोलीबारी: विश्व कप से पहले इंग्लिश टीम की मुसीबतों का पहाड़
कैनसस सिटी में 18 हजार डॉलर के उपकरण चोरी, बवंडर की चेतावनी और गोलीबारी ने इंग्लैंड की तैयारी को प्रभावित किया, जबकि आप्रवासन व मौसम संबंधी दिक्कतों ने टूर्नामेंट की चुनौतियाँ उजागर कीं।
इंग्लैंड की फुटबॉल टीम को विश्व कप 2026 के अपने पहले मुकाबले से पहले ही बड़ा झटका लगा, जब कैनसस सिटी में टीम के उपकरण चोरी हो गए। फ्लोरिडा से शहर में स्थानांतरण के दौरान शुक्रवार रात हुई इस चोरी में जूते, गेंदें, दस्ताने, प्रशिक्षण किट और यहां तक कि एक लेगो नाइकी स्नीकर सेट और दो शेर के आकार के सॉफ्ट टॉय भी शामिल थे। अभियोजन पक्ष के अनुसार, चुराई गई वस्तुओं की कुल कीमत लगभग 18,000 डॉलर (लगभग 15 लाख रुपये) आंकी गई, जिसमें तीन हस्ताक्षरित जर्सी अकेले 15,000 डॉलर की थीं। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए दो संदिग्धों—मुस्तफा सालिक और इरफान कमाल—को गिरफ्तार कर लिया और अधिकांश सामान बरामद कर लिया। फिर भी, इस घटना ने टीम के मनोबल को हिला दिया।
मगर यह सिलसिला यहीं नहीं रुका। अगले ही दिन, जहां टीम स्वोप सॉकर विलेज में पहला सार्वजनिक प्रशिक्षण सत्र कर रही थी, वहां बवंडर की “गंभीर, आसन्न खतरे की चेतावनी” ने अभ्यास को बीच में ही रोक दिया। स्थानीय मीडिया के अनुसार, खिलाड़ियों और स्टाफ को तुरंत अपने मीडोब्रुक होटल में शरण लेनी पड़ी। इससे पहले, प्रशिक्षण केंद्र से मात्र छह किलोमीटर दूर हुई एक गोलीबारी की घटना ने भी सुरक्षा चिंताएं बढ़ा दी थीं। ये लगातार झटके अमेरिकी धरती पर इंग्लैंड की तैयारियों को लगातार चुनौती दे रहे थे।
इंडोनेशियाई मीडिया ने इन सबको “चार दुर्भाग्य” के रूप में रेखांकित किया है, जिनमें जटिल आप्रवासन प्रक्रिया, विषम मौसम, सुरक्षा की कमी और अभ्यास स्थलों की स्थिति शामिल हैं। तीन मेजबान देशों—अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको—में फैले इस पहले विश्व कप में शुरुआती दिनों से ही विवाद सामने आ रहे हैं। कड़ी वीजा जांच और लंबी कतारों ने न केवल टीमों, बल्कि दुनिया भर से आने वाले प्रशंसकों के लिए भी परेशानी खड़ी कर दी है। खासतौर पर दक्षिण एशियाई देशों—भारत, बांग्लादेश, पाकिस्तान—से आने वाले फुटबॉल प्रेमियों के लिए ये दिक्कतें और बढ़ सकती हैं, क्योंकि वे पहले से ही सख्त अमेरिकी आप्रवासन नीतियों का सामना करते हैं।
अब सारी निगाहें इंग्लैंड और क्रोएशिया के बीच होने वाले शुरुआती मुकाबले पर टिकी हैं। “थ्री लायंस” पहले से ही पसंदीदा होने के दबाव में है, और इन अतिरिक्त मैदानेतर झंझटों ने मानसिक चुनौती को और बढ़ा दिया है। क्रोएशिया, जो पिछले टूर्नामेंटों में अपनी मजबूती के लिए जाना जाता है, विरोधी की किसी भी कमजोरी का फायदा उठाने को तैयार होगा। हालांकि इंग्लिश टीम ने चोरी के मामले में तेजी से सुधार कर लिया है, बवंडर और सुरक्षा की घटनाएं यह संकेत देती हैं कि इस विश्व कप में सिर्फ मैदान के भीतर ही नहीं, बाहर भी कांटे की टक्कर होगी। प्रशंसकों को उम्मीद है कि ये रुकावटें टीम के जुनून को कम नहीं कर पाएंगी।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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अभी एक भी मैच खेले बिना ऐसा लगता है कि इंग्लैंड पहले ही हार चुका है—मैदान के बाहर की दुर्घटनाओं की झड़ी ने उसे पटक दिया: 18 हज़ार डॉलर की चोरी, प्रशिक्षण केंद्र के पास गोलीबारी और टॉरनेडो की चेतावनी। लैटिन अमेरिकी कवरेज में व्यंग्य और आक्रोश है, मानो अमेरिका की अव्यवस्था के सामने इंग्लैंड की बुरी क़िस्मत पर हँसी आ रही हो।
दक्षिण पूर्व एशियाई कवरेज इंग्लैंड की चार दुर्घटनाओं को गिनवाती है और इसे क्रोएशिया के ख़िलाफ़ मैच से पहले टीम की मानसिक तैयारी पर एक आघात मानती है। यह चोरी, गोलीबारी और मौसम की चेतावनी को व्यापक आयोजन संबंधी विवादों—जटिल आव्रजन प्रक्रिया जैसे मुद्दों—से जोड़ता है और संकेत देता है कि मेज़बान देशों की अव्यवस्था टूर्नामेंट को कमज़ोर कर रही है।
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