
एजीआई सुरक्षा के लिए अमेरिकी मानक निकाय का प्रस्ताव, हसाबिस ने समय कम होने की दी चेतावनी
गूगल डीपमाइंड के सीईओ डेमिस हसाबिस ने फ्रंटियर एआई मॉडलों के परीक्षण के लिए अमेरिकी नेतृत्व में एक स्वतंत्र मानक संस्था बनाने का प्रस्ताव रखा है, जो वित्तीय उद्योग नियामक प्राधिकरण (फिनरा) की तर्ज पर काम करेगी।
डेमिस हसाबिस ने मंगलवार को एक्स और सबस्टैक पर प्रकाशित एक निबंध में चेतावनी दी कि कृत्रिम सामान्य बुद्धिमत्ता (एजीआई) संभवतः कुछ ही वर्ष दूर है, और इससे पहले कार्रवाई के लिए एक “कीमती खिड़की” मौजूद है। उन्होंने अमेरिकी नेतृत्व में एक ऐसी संस्था के गठन का आह्वान किया जो सबसे उन्नत एआई मॉडलों को सार्वजनिक रूप से जारी करने से पहले उनकी सुरक्षा का मूल्यांकन करे। यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब ट्रंप प्रशासन ने हाल ही में ओपनएआई और एंथ्रोपिक के मॉडलों की रिलीज़ को सीमित किया था, और एंथ्रोपिक के क्लॉड फेबल 5 व मिथोस 5 मॉडलों को एक जेलब्रेक घटना के बाद दो सप्ताह से अधिक के लिए पूरी तरह ऑफलाइन करना पड़ा था।
प्रस्तावित मानक निकाय फिनरा की तरह एक निजी, गैर-लाभकारी स्व-नियामक संगठन होगा, जो संघीय निगरानी में काम करेगा और मुख्य रूप से उद्योग द्वारा वित्त पोषित होगा। इसमें स्वतंत्र तकनीकी विशेषज्ञ और ओपन-सोर्स प्रतिनिधि शामिल होंगे। यह निकाय “फ्रंटियर-क्लास” मॉडलों के लिए बेंचमार्क तय करेगा और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े जोखिमों—जैसे साइबर, परमाणु और जैविक खतरों—का परीक्षण करेगा। शुरुआत में डेवलपर स्वेच्छा से रिलीज़ से 30 दिन पहले मॉडल जमा करेंगे, और परीक्षण व्यवस्था विश्वसनीय साबित होने पर अनुपालन अनिवार्य हो जाएगा।
हसाबिस का दृष्टिकोण ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन से भिन्न है। ऑल्टमैन एक अंतरराष्ट्रीय गठबंधन चाहते हैं, जबकि हसाबिस का मानना है कि वैश्विक सहमति की प्रतीक्षा बहुत धीमी होगी; उनके अनुसार अमेरिकी नेतृत्व वाली संस्था स्वतः ही वैश्विक मानक तय करेगी, क्योंकि विदेशी कंपनियों—संभवतः चीन सहित—को अमेरिकी बाजार तक पहुंच बनाए रखने के लिए इन नियमों को अपनाना होगा। चीन के डीपसीक और ज़ेड.एआई जैसे ओपन-सोर्स मॉडल अमेरिकी प्रतिस्पर्धियों के साथ अंतर कम कर रहे हैं, जिससे नियामकीय तात्कालिकता बढ़ी है। पिछले महीने जी7 शिखर सम्मेलन में भी तकनीकी अधिकारियों ने एआई सुरक्षा पर एकजुट कार्रवाई का आग्रह किया था।
हसाबिस के प्रस्ताव को सुंदर पिचाई, सत्य नडेला, मुस्तफा सुलेमान, सैम ऑल्टमैन और जैक डोर्सी जैसे उद्योग जगत के नेताओं का समर्थन मिला है। उन्होंने जोर देकर कहा कि एजीआई का प्रभाव औद्योगिक क्रांति से दस गुना अधिक और दस गुना तेज़ हो सकता है, इसलिए दार्शनिकों, अर्थशास्त्रियों और समाज के हर वर्ग को मिलकर इस नए अध्याय की रूपरेखा तय करनी चाहिए। अगला ठोस पड़ाव यह होगा कि क्या अमेरिकी प्रशासन इस ढाँचे को अपनाता है; इसके बाद अंतरराष्ट्रीय सहमति बनाने का प्रयास हो सकता है। भारत और दक्षिण एशिया के लिए, ऐसा अमेरिकी मानक वैश्विक एआई अभिशासन को आकार दे सकता है, जिसका असर उन्नत मॉडलों तक पहुँच और घरेलू नियामक दृष्टिकोण पर पड़ेगा।
| ईरानी और संबद्ध प्रेस | −0.10 | neutral |
|---|---|---|
| चीनी प्रेस | +0.20 | neutral |
| अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस | 0.00 | neutral |
| भारतीय और दक्षिण एशियाई प्रेस | −0.30 | critical |
The Google DeepMind CEO issues a cry of alarm: time is short and the Trump administration has already begun restricting rival models. The proposal is a necessary response to an imminent threat.
It uses emotional language ('shocking warning', 'precious window') and links the proposal to Trump administration actions to create a sense of urgency and necessity.
It omits the technical details of the proposal (FINRA model) and international cooperation, focusing solely on the alarm and US actions.
China recognizes the unique position of the United States to lead AI regulation and supports the creation of an independent agency modeled on FINRA. The proposal is seen as a pragmatic step.
It adopts a technical and descriptive tone, explicitly citing the FINRA model and the US economic position to legitimize the proposal as rational and feasible.
It omits the CEO disagreements and geopolitical tensions, presenting the proposal as a technical solution without conflict.
The West reports Hassabis's warning with detachment, presenting facts without taking a stance. The proposal is described as one of many in the ongoing debate.
It uses standard journalistic register, citing sources and statements, balancing urgency with a measured tone and avoiding judgment.
It does not delve into CEO disagreements or geopolitical context, keeping the focus on Hassabis's statement.
India highlights the disagreement between AI leaders and global tensions, presenting the proposal as part of a struggle for control. The US block on Anthropic's model is highlighted as an example of conflict.
It frames the news as a dispute, using terms like 'do not agree' and 'escalating global tensions' to create a narrative of division.
It omits the details of Hassabis's proposal (such as the FINRA model) and the technical urgency, focusing instead on corporate and government relations.
अपना नज़रिया बढ़ाएँ
जेलेंस्की के बड़े फेरबदल से यूक्रेन में राजनीतिक संकट, रक्षा मंत्री की छंटनी के खिलाफ सड़कों पर प्रदर्शन
9 भाषाएँ · 20 स्रोत
Economy & Markets सेApple ने Nvidia को पछाड़ा, AI रणनीति पर बदली निवेशकों की नज़र
10 भाषाएँ · 26 स्रोत
Science & Health सेअमेरिका में साइक्लोस्पोरा प्रकोप: मैक्सिकन आइसबर्ग लेट्यूस की आपूर्ति रोकी गई, टैको बेल ने हटाया
6 भाषाएँ · 27 स्रोत