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अर्थव्यवस्थासोमवार, 15 जून 2026

G-7 से पहले ट्रंप की फ्रांस को धमकी: डिजिटल टैक्स नहीं हटाया तो वाइन पर 100% शुल्क लगेगा

अमेरिकी राष्ट्रपति ने फ्रांस से डिजिटल कर हटाने को कहा, वरना वाइन पर 100% टैरिफ लगाने की धमकी दी; फ्रांस के इनकार से जी-7 से पहले व्यापारिक तनाव बढ़ गया।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस के खिलाफ उस समय नया व्यापारिक मोर्चा खोल दिया जब दोनों नेता जी-7 शिखर सम्मेलन में शामिल होने वाले थे। न्यूयॉर्क पोस्ट को दिए साक्षात्कार में ट्रंप ने साफ कहा कि यदि फ्रांस अमेरिकी प्रौद्योगिकी कंपनियों पर 2019 से लगे 3 प्रतिशत डिजिटल सेवा कर को समाप्त नहीं करता, तो अमेरिका के पास ‘फ्रेंच वाइन और शैंपेन पर 100 प्रतिशत आयात शुल्क लगाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा’। यह कर गूगल, ऐपल, फेसबुक और अमेज़न जैसी दिग्गज कंपनियों की फ्रांस में होने वाली आय पर लागू होता है और पिछले कई वर्षों से दोनों देशों के बीच विवाद का कारण बना हुआ है।

फ्रांस के लिए यह धमकी इसलिए भी गंभीर है क्योंकि अमेरिका उसके वाइन और स्पिरिट निर्यात का सबसे बड़ा बाजार है, जो कुल निर्यात का 21 प्रतिशत हिस्सा खरीदता है। फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ‘ऐसे काम नहीं चलता’ और उन्होंने जी-7 में ‘सम्मानजनक लेकिन कड़े’ तरीके से इस मुद्दे पर बात करने का संकल्प जताया। मैक्रों ने स्पष्ट किया कि यूरोपीय कानून अमेरिकी दबाव से नहीं बदले जा सकते और जब तक वे राष्ट्रपति हैं, यह कर हटाया नहीं जाएगा।

विभिन्न क्षेत्रों की मीडिया ने इस विवाद को अपने-अपने नजरिए से देखा। यूरोपीय प्रेस ने इसे फ्रांस की कर संप्रभुता का मामला बताया, जबकि रूसी और एशियाई मीडिया ने इसे अमेरिकी एकपक्षीयता और जी-7 की एकजुटता के लिए खतरे के रूप में पेश किया। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल फ्रांस पर शुल्क लगाकर अमेरिका यूरोपीय संघ की सामूहिक व्यापार नीति को चुनौती दे सकता है, जिससे पूरा यूरोपीय ब्लॉक जवाबी कार्रवाई कर सकता है। दरअसल, डिजिटल कर को लेकर ओईसीडी स्तर पर वैश्विक समझौते की कोशिशें पहले ही लड़खड़ा चुकी हैं और इस तरह की द्विपक्षीय टकराव से बहुपक्षीय ढांचे को और धक्का लग सकता है।

भारत जैसे दक्षिण एशियाई देशों के लिए यह घटनाक्रम इसलिए अहम है क्योंकि भारत ने भी अमेरिकी डिजिटल कंपनियों पर समानीकरण शुल्क लागू कर रखा है। यदि फ्रांस-अमेरिका विवाद गहराता है और अमेरिका एकतरफा टैरिफ की राह पकड़ता है, तो डिजिटल अर्थव्यवस्था पर कर लगाने वाले अन्य देशों को भी इसी तरह के व्यापारिक प्रतिशोध का सामना करना पड़ सकता है। जी-7 समिट में होने वाली बातचीत इस बात का संकेत देगी कि दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं डिजिटल कराधान के विवाद को सुलझाने के लिए सहयोग का रास्ता चुनती हैं या संरक्षणवाद की नई लड़ाई में उलझ जाती हैं।

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

2 संपादकीय समूह · 7 भाषाएँ

34%
लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
Stampa russa e CSIStampa europea continentale
Stampa russa e CSI/ stato
scetticismodistaccoschadenfreude

G7 से पहले व्यापार विवाद पश्चिमी सहयोगियों के बीच बढ़ती दरार को उजागर करता है। वाशिंगटन दंडात्मक शुल्क की धमकी देता है जबकि यूरोपीय भागीदार अमेरिकी दबाव में खड़े हैं, जो गहरे ट्रान्साटलांटिक मतभेद दिखाता है। मास्को से यह प्रकरण पश्चिमी असंगति का एक और संकेत माना जा रहा है।

Stampa europea continentale/ mediterranea
indignazioneallarmeurgenza

फ्रांसीसी शराब पर 100% शुल्क लगाने की ट्रम्प की धमकी को शिखर सम्मेलन से पहले एक उकसावे के रूप में देखा जा रहा है जिसका उद्देश्य पेरिस को अमेरिकी तकनीकी दिग्गजों पर डिजिटल कर हटाने के लिए मजबूर करना है। यह अल्टीमेटम अमेरिकी व्यापार आक्रमकता पर चिंता पैदा करता है और G7 के एजेंडे को पटरी से उतारने का जोखिम उठाता है। यूरोपीय टिप्पणीकार इस कदम को सीधी आर्थिक बदमाशी मानते हैं।

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G-7 से पहले ट्रंप की फ्रांस को धमकी: डिजिटल टैक्स नहीं हटाया तो वाइन पर 100% शुल्क लगेगा

अमेरिकी राष्ट्रपति ने फ्रांस से डिजिटल कर हटाने को कहा, वरना वाइन पर 100% टैरिफ लगाने की धमकी दी; फ्रांस के इनकार से जी-7 से पहले व्यापारिक तनाव बढ़ गया।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस के खिलाफ उस समय नया व्यापारिक मोर्चा खोल दिया जब दोनों नेता जी-7 शिखर सम्मेलन में शामिल होने वाले थे। न्यूयॉर्क पोस्ट को दिए साक्षात्कार में ट्रंप ने साफ कहा कि यदि फ्रांस अमेरिकी प्रौद्योगिकी कंपनियों पर 2019 से लगे 3 प्रतिशत डिजिटल सेवा कर को समाप्त नहीं करता, तो अमेरिका के पास ‘फ्रेंच वाइन और शैंपेन पर 100 प्रतिशत आयात शुल्क लगाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा’। यह कर गूगल, ऐपल, फेसबुक और अमेज़न जैसी दिग्गज कंपनियों की फ्रांस में होने वाली आय पर लागू होता है और पिछले कई वर्षों से दोनों देशों के बीच विवाद का कारण बना हुआ है।

फ्रांस के लिए यह धमकी इसलिए भी गंभीर है क्योंकि अमेरिका उसके वाइन और स्पिरिट निर्यात का सबसे बड़ा बाजार है, जो कुल निर्यात का 21 प्रतिशत हिस्सा खरीदता है। फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ‘ऐसे काम नहीं चलता’ और उन्होंने जी-7 में ‘सम्मानजनक लेकिन कड़े’ तरीके से इस मुद्दे पर बात करने का संकल्प जताया। मैक्रों ने स्पष्ट किया कि यूरोपीय कानून अमेरिकी दबाव से नहीं बदले जा सकते और जब तक वे राष्ट्रपति हैं, यह कर हटाया नहीं जाएगा।

विभिन्न क्षेत्रों की मीडिया ने इस विवाद को अपने-अपने नजरिए से देखा। यूरोपीय प्रेस ने इसे फ्रांस की कर संप्रभुता का मामला बताया, जबकि रूसी और एशियाई मीडिया ने इसे अमेरिकी एकपक्षीयता और जी-7 की एकजुटता के लिए खतरे के रूप में पेश किया। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल फ्रांस पर शुल्क लगाकर अमेरिका यूरोपीय संघ की सामूहिक व्यापार नीति को चुनौती दे सकता है, जिससे पूरा यूरोपीय ब्लॉक जवाबी कार्रवाई कर सकता है। दरअसल, डिजिटल कर को लेकर ओईसीडी स्तर पर वैश्विक समझौते की कोशिशें पहले ही लड़खड़ा चुकी हैं और इस तरह की द्विपक्षीय टकराव से बहुपक्षीय ढांचे को और धक्का लग सकता है।

भारत जैसे दक्षिण एशियाई देशों के लिए यह घटनाक्रम इसलिए अहम है क्योंकि भारत ने भी अमेरिकी डिजिटल कंपनियों पर समानीकरण शुल्क लागू कर रखा है। यदि फ्रांस-अमेरिका विवाद गहराता है और अमेरिका एकतरफा टैरिफ की राह पकड़ता है, तो डिजिटल अर्थव्यवस्था पर कर लगाने वाले अन्य देशों को भी इसी तरह के व्यापारिक प्रतिशोध का सामना करना पड़ सकता है। जी-7 समिट में होने वाली बातचीत इस बात का संकेत देगी कि दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं डिजिटल कराधान के विवाद को सुलझाने के लिए सहयोग का रास्ता चुनती हैं या संरक्षणवाद की नई लड़ाई में उलझ जाती हैं।

स्रोतों में मतभेद

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34%मध्यम

स्रोत कैसे एक ही तथ्यों को अलग-अलग तरीके से बयाँ करते हैं।

विभाजन कैसे है

न्यूनत्र22%
निंदक78%

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

2 संपादकीय समूह · 7 भाषाएँ

लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
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Stampa russa e CSI/ stato
scetticismodistaccoschadenfreude

G7 से पहले व्यापार विवाद पश्चिमी सहयोगियों के बीच बढ़ती दरार को उजागर करता है। वाशिंगटन दंडात्मक शुल्क की धमकी देता है जबकि यूरोपीय भागीदार अमेरिकी दबाव में खड़े हैं, जो गहरे ट्रान्साटलांटिक मतभेद दिखाता है। मास्को से यह प्रकरण पश्चिमी असंगति का एक और संकेत माना जा रहा है।

Stampa europea continentale/ mediterranea
indignazioneallarmeurgenza

फ्रांसीसी शराब पर 100% शुल्क लगाने की ट्रम्प की धमकी को शिखर सम्मेलन से पहले एक उकसावे के रूप में देखा जा रहा है जिसका उद्देश्य पेरिस को अमेरिकी तकनीकी दिग्गजों पर डिजिटल कर हटाने के लिए मजबूर करना है। यह अल्टीमेटम अमेरिकी व्यापार आक्रमकता पर चिंता पैदा करता है और G7 के एजेंडे को पटरी से उतारने का जोखिम उठाता है। यूरोपीय टिप्पणीकार इस कदम को सीधी आर्थिक बदमाशी मानते हैं।

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