
चार्जर और केबल की आदतें बन सकती हैं साइबर व बिजली जोखिम का कारण
इंडोनेशिया से लेकर लैटिन अमेरिका तक सुरक्षा एजेंसियों ने चार्जर को प्लग में छोड़ने, सार्वजनिक यूएसबी पोर्ट के इस्तेमाल और हीटर को ज़ापिटिला से जोड़ने को लेकर चेतावनी जारी की है।
हाल के दिनों में इंडोनेशिया, रूस, स्पेन, अर्जेंटीना और मैक्सिको की साइबर सुरक्षा व विद्युत सुरक्षा एजेंसियों ने एक साथ रोज़मर्रा की तकनीकी आदतों को लेकर चेतावनी जारी की है। इंडोनेशिया की राष्ट्रीय साइबर एजेंसी बीएसएसएन ने चार्जिंग केबल में मैलवेयर छिपे होने की आशंका जताई है, जबकि लैटिन अमेरिकी मीडिया में विद्युत विशेषज्ञों ने चार्जर को लगातार प्लग में छोड़ने और हीटर जैसे उपकरणों को ज़ापिटिला (पावर स्ट्रिप) से जोड़ने के ख़तरों को रेखांकित किया है। यह वैश्विक स्तर पर पहली बार है जब इतने अलग-अलग क्षेत्रों से एक जैसी चेतावनियाँ सामने आई हैं, जो बताती हैं कि ये जोखिम पहले के अनुमान से कहीं अधिक व्यापक हैं और इनका असर अरबों उपयोगकर्ताओं पर पड़ सकता है।
ऊर्जा और सुरक्षा के नज़रिए से, चार्जर को बिना उपकरण के प्लग में छोड़ने पर 'फैंटम कंज़म्पशन' होता है—यह लगभग 0.2 वॉट प्रति घंटा की सूक्ष्म खपत है, लेकिन बेल्जियम की पर्यावरण संस्था बेबैट के अनुसार साल भर में कई चार्जरों का संचयी प्रभाव बिजली बिल पर दिखता है। एक औसत घर में पाँच-छह चार्जर हमेशा प्लग में लगे रहने से सालाना सैकड़ों रुपये का अतिरिक्त खर्च हो सकता है। इससे भी बड़ा ख़तरा आंतरिक कंपोनेंट्स का लगातार थर्मल स्ट्रेस है, जो सस्ते या बिना प्रमाणन वाले चार्जरों में ओवरहीटिंग और शॉर्ट सर्किट का कारण बन सकता है। स्पेन की डिजिटलईएस एसोसिएशन ने चार्जर की उम्र बढ़ाने के लिए केबल को न मोड़ने, नमी से बचाने और तूफ़ान के दौरान अनप्लग करने की सलाह दी है। अर्जेंटीना और मैक्सिको के विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि चार्जर को पहले दीवार के सॉकेट में और फिर डिवाइस में लगाना चाहिए, तथा हटाते समय इसका उल्टा क्रम अपनाना चाहिए, ताकि वोल्टेज स्पाइक से बचा जा सके। वहीं, अमेरिकी संस्थाएँ यूएल सॉल्यूशंस और एनएफपीए ने स्पष्ट किया है कि इलेक्ट्रिक हीटर जैसे उच्च-वाट क्षमता वाले उपकरणों को कभी भी ज़ापिटिला से नहीं जोड़ना चाहिए, क्योंकि इससे सर्किट ओवरलोड होकर आग का जोखिम पैदा कर सकता है।
साइबर ख़तरों का दायरा अब चार्जिंग केबल और मोबाइल ऐप तक फैल गया है। बीएसएसएन के अनुसार, सामान्य दिखने वाली चार्जिंग केबल के भीतर बेहद छोटे संशोधित कंपोनेंट लगाकर हैकर्स रिमोट तरीके से डिवाइस पर कब्ज़ा कर सकते हैं और डेटा चुरा सकते हैं, यहाँ तक कि अपनी गतिविधि के निशान भी मिटा सकते हैं। सार्वजनिक स्थानों जैसे एयरपोर्ट या होटलों में लगे यूएसबी पोर्ट भी इसी तरह छेड़छाड़ के शिकार हो सकते हैं, इसलिए एजेंसी ने अजनबियों से केबल उधार न लेने और निजी चार्जर का ही उपयोग करने की सलाह दी है। रूसी साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ निकिता पिनाएव (ऐपसेक सॉल्यूशंस) ने बताया कि किसी लोकप्रिय सेवा के नाम या लोगो की नकल करने वाले, अनजान डेवलपर वाले और अनाधिकृत स्रोतों से डाउनलोड किए गए ऐप सबसे ख़तरनाक होते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आधिकारिक ऐप स्टोर में मौजूदगी पूरी सुरक्षा की गारंटी नहीं है, इसलिए इंस्टॉल से पहले डेवलपर की जाँच, माँगी गई परमिशन और कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट पर दिए गए लिंक की पुष्टि करना ज़रूरी है।
भारतीय संदर्भ में ये चेतावनियाँ और भी प्रासंगिक हो जाती हैं, जहाँ स्मार्टफोन उपयोगकर्ताओं की संख्या दुनिया में दूसरे स्थान पर है और रेलवे स्टेशनों, एयरपोर्ट तथा कैफे में सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों का चलन तेज़ी से बढ़ रहा है। भारत में 1.2 अरब से अधिक मोबाइल कनेक्शन हैं और कम लागत वाले उपकरणों का बाज़ार बहुत बड़ा है, जिससे ये जोखिम और गंभीर हो जाते हैं। स्थानीय स्तर पर वोल्टेज में उतार-चढ़ाव और बिना बीआईएस प्रमाणन वाले सस्ते चार्जरों की व्यापक उपलब्धता बिजली और साइबर दोनों जोखिमों को बढ़ाती है। अगला ध्यान देने योग्य कदम यह होगा कि क्या भारत की साइबर सुरक्षा एजेंसी सीईआरटी-इन इंडोनेशिया की तर्ज पर सार्वजनिक यूएसबी चार्जिंग के जोखिमों पर औपचारिक परामर्श जारी करती है, और क्या भारतीय मानक ब्यूरो चार्जर सुरक्षा मानदंडों को और सख्त करता है। तब तक, उपयोगकर्ताओं के लिए सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।
| लैटिन अमेरिकी प्रेस | −0.20 | neutral |
|---|---|---|
| रूसी और सीआईएस प्रेस | 0.00 | neutral |
| दक्षिण-पूर्व एशियाई प्रेस | −0.30 | critical |
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