
सर्वेक्षण: 92% इज़राइली मानते हैं ईरान युद्ध जीता, नेतन्याहू का समर्थन गिरा
इज़राइली जनता में बढ़ते असंतोष और नेतन्याहू के प्रति विश्वास संकट के बीच अमेरिका-ईरान समझौते और लेबनान में सैन्य कार्रवाई पर बहस तेज़।
हिब्रू विश्वविद्यालय और अगाम संस्थान द्वारा 17 से 20 जून के बीच 3,644 इज़राइली नागरिकों पर किए गए सर्वेक्षण के अनुसार, 92.1 प्रतिशत उत्तरदाताओं का मानना है कि ईरान हाल के संघर्ष से अधिक मज़बूत होकर उभरा है, जबकि 82.9 प्रतिशत को लगता है कि इस सैन्य अभियान ने इज़राइल की दीर्घकालिक सुरक्षा को कमज़ोर किया है। यहाँ तक कि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के चुनावी आधार माने जाने वाले दक्षिणपंथी मतदाताओं में भी 93.1 प्रतिशत ने ईरान की जीत स्वीकार की।
इज़राइली जनता का यह रुख़ अमेरिका-ईरान समझौते के प्रति व्यापक विरोध में भी दिखता है—63.2 प्रतिशत ने इसका विरोध किया, जबकि मात्र 12.1 प्रतिशत समर्थन में थे। नेतन्याहू के नेतृत्व पर अविश्वास साफ़ झलका: 72.5 प्रतिशत ने उनके सैन्य सफलता के दावों पर यकीन नहीं किया, और 56.4 प्रतिशत ने उनके अभियान प्रबंधन को विफल या ख़राब बताया। सर्वेक्षण में यह भी उभरा कि भारी नकारात्मक मूल्यांकन के बावजूद 48.2 प्रतिशत इज़राइली लेबनान में हिज़्बुल्लाह के ख़िलाफ़ नए बड़े सैन्य अभियान का समर्थन करते हैं, भले ही इससे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से टकराव का जोखिम हो।
इस जनमत के राजनीतिक निहितार्थ गहरे हैं: नेतन्याहू की प्रधानमंत्री पद के लिए समर्थन दर मार्च के 40.5 प्रतिशत से गिरकर जून में 29.4 प्रतिशत पर आ गई है। इज़राइल के अति-दक्षिणपंथी मंत्री इतामार बेन गवीर जैसे नेताओं ने लेबनान को पूरी तरह ध्वस्त करने जैसे बयान दिए हैं। अमेरिकी खुफ़िया सूत्रों के अनुसार, घरेलू दबाव के चलते नेतन्याहू शांति वार्ता को कमज़ोर कर सकते हैं। दूसरी ओर, एसोसिएटेड प्रेस-एनओआरसी के 11-17 जून के सर्वेक्षण में 65 प्रतिशत अमेरिकी वयस्कों ने ट्रंप के ईरान संबंधी प्रबंधन को अस्वीकार किया, जो वाशिंगटन की कूटनीतिक पहल के लिए एक और जटिलता है।
इस बीच, ईरानी सूत्रों के अनुसार, इज़राइल द्वारा संघर्षविराम उल्लंघनों के जवाब में तेहरान ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से बंद कर दिया है। 17 जून को हस्ताक्षरित अमेरिका-ईरान समझौता ज्ञापन लेबनान सहित सभी मोर्चों पर शत्रुता समाप्त करने का प्रावधान करता है, लेकिन इज़राइल इसका पक्षकार नहीं है। रविवार (22 जून) को स्विट्ज़रलैंड में अंतिम समझौते के लिए बातचीत शुरू होनी थी, जिसमें ईरान ने लेबनान की स्थिति को मुख्य मुद्दा बताया है। यह वार्ता ऐसे समय में हो रही है जब नेतन्याहू का भ्रष्टाचार मुकदमा अपने अंतिम चरण में है और उनकी राजनीतिक ज़मीन लगातार खिसक रही है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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A new poll shows that 92% of Israelis believe Iran won the recent conflict, with even Netanyahu's own supporters acknowledging defeat. The survey reveals widespread opposition to the US-Iran agreement and a negative view of the outcome. The reporting is factual, focusing on the numbers without explicit criticism.
Public confidence is shaken as a majority of Israelis believe Iran emerged stronger and that Netanyahu's claims of victory are false. The poll highlights widespread dissatisfaction with the government's handling of the conflict, also reflected in US polls showing disapproval of Trump's Iran policy. The coverage blends facts with criticism of leadership.
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