
ट्रंप की भारत यात्रा की तैयारी, व्यापार समझौता अंतिम चरण में: रुबियो
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप अगले साल की शुरुआत में भारत आ सकते हैं और द्विपक्षीय व्यापार समझौता 'अंतिम इंच' पर है।
अमेरिकी प्रशासन ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भारत यात्रा की तैयारी शुरू कर दी है। विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारतीय समाचार एजेंसी आईएएनएस को दिए साक्षात्कार में कहा कि वह इस वर्ष के अंत से पहले भारत जाकर यात्रा की रूपरेखा तैयार करेंगे और ट्रंप के 'अगले साल की शुरुआत' में आने की उम्मीद है। रुबियो ने यह भी बताया कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौता 'अंतिम इंच' पर है और जल्द ही पूरा हो सकता है। यह यात्रा ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की पहली भारत यात्रा होगी; इससे पहले वह फरवरी 2020 में अहमदाबाद आए थे।
अमेरिकी पक्ष ने भारत के साथ संबंधों को 'बेहद मजबूत' बताया है। रुबियो के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच व्यक्तिगत संबंध 'बहुत करीबी' हैं, जो कूटनीति में महत्वपूर्ण है। वहीं, भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने एच-1बी वीज़ा कार्यक्रम में बदलावों को लेकर स्पष्ट किया कि ये कदम 'भारत को निशाना बनाकर नहीं' उठाए गए हैं, बल्कि पूरी अमेरिकी आप्रवासन प्रणाली की समीक्षा का हिस्सा हैं। गोर ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी अवैध प्रवासन पर जो रुख रखते हैं, उससे ट्रंप प्रशासन पूरी तरह सहमत है। भारतीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने व्यापार समझौते को 'बहुत करीब' बताया, लेकिन जोर दिया कि जब तक भारतीय निर्यातकों को प्रतिस्पर्धी देशों पर टैरिफ लाभ नहीं मिलता, समझौता लागू नहीं होगा।
व्यापार समझौते का उद्देश्य भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में ऊंचे शुल्कों से बचाना और भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाने की मोदी सरकार की रणनीति को समर्थन देना है। अमेरिकी पक्ष के लिए यह समझौता दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक तक अधिक पहुंच प्रदान करेगा और चीन पर आपूर्ति-श्रृंखला निर्भरता कम करने की उसकी नीति को आगे बढ़ाएगा। ऊर्जा सहयोग के मोर्चे पर, रुबियो ने कहा कि भारत पहले ही अमेरिकी ऊर्जा खरीद बढ़ा चुका है और विविधीकरण से उसकी ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि वेनेजुएला के भारी क्रूड के प्रसंस्करण में भारत की क्षमता का लाभ उठाने पर चर्चा हो रही है।
पिछले वर्ष दोनों देशों के संबंधों में तनाव देखा गया था। अमेरिकी प्रशासन ने भारतीय वस्तुओं पर ऊंचे शुल्क लगाए थे, जिसके पीछे भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद जारी रखना और पाकिस्तान के साथ अमेरिकी जुड़ाव जैसे कारण बताए गए। हालांकि, हाल के महीनों में दोनों पक्षों ने बातचीत का रास्ता चुना। फरवरी में एक व्यापार ढांचे की घोषणा हुई, जिसके तहत भारतीय वस्तुओं पर शुल्क 50% से घटाकर 18% कर दिया गया, लेकिन बाद में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा ट्रंप की व्यापक वैश्विक टैरिफ नीति को अमान्य करार दिए जाने से कार्यान्वयन पर अनिश्चितता बनी हुई है। एच-1बी वीज़ा के मामले में, पिछले साल लगाए गए 1,00,000 डॉलर के नए शुल्क को एक अमेरिकी अदालत ने अवैध करार दिया था, लेकिन प्रशासन द्वारा अपील की संभावना है।
अगले कदमों में रुबियो की इस वर्ष के अंत में प्रस्तावित भारत यात्रा शामिल है, जिसके बाद ट्रंप की यात्रा की तारीख तय होगी। व्यापार वार्ता अंतिम चरण में है और आने वाले सप्ताहों या महीनों में समझौते पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है। दोनों देश क्वाड की अगली बैठक की भी योजना बना रहे हैं, जिसमें जापान और ऑस्ट्रेलिया भी शामिल होंगे।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
2 संपादकीय समूह · 5 भाषाएँ
ट्रम्प प्रशासन अगले साल की शुरुआत में भारत की राष्ट्रपति यात्रा पर काम कर रहा है, जिसका उद्देश्य व्यापार और भू-राजनीतिक तनाव के दौर के बाद संबंधों को सुधारना है। एक द्विपक्षीय व्यापार समझौता अंतिम चरण में है, जो दो प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के बीच संबंधों की दिशा को पुनर्निर्धारित कर सकता है। इस यात्रा में कूटनीतिक प्रतीकवाद और ठोस आर्थिक दांव दोनों शामिल हैं।
ट्रम्प और मोदी के बीच व्यक्तिगत केमिस्ट्री अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर है, और संबंधों को 'इससे करीब नहीं हो सकता' के रूप में वर्णित किया गया है। एक व्यापार समझौता बस कुछ ही दूरी पर है, और अगले साल की शुरुआत में ट्रम्प की यात्रा इस शानदार साझेदारी को प्रदर्शित करेगी। यह रिश्ता गहरे आपसी विश्वास और रणनीतिक समानता से प्रेरित है।
अपना नज़रिया बढ़ाएँ
यूरोपीय संघ और चीन के बीच व्यापार असंतुलन पर तीन महीने की बातचीत, अक्टूबर तक 'ठोस नतीजों' की समयसीमा
8 भाषाएँ · 16 स्रोत
Technology सेWhatsApp में अब बिना नंबर चैट: यूज़रनेम रिज़र्वेशन शुरू, भारतीय सीईओ ने दी जानकारी
7 भाषाएँ · 36 स्रोत
Science & Health सेकांगो में इबोला का चौथे प्रांत में विस्तार, फ्रांस में पहला मामला; बुंदिबुग्यो स्ट्रेन पर नियंत्रण की चुनौती
6 भाषाएँ · 12 स्रोत