
वाशिंगटन में त्रिपक्षीय समझौता: हिज़्बुल्लाह निरस्त्रीकरण और इज़राइली सेना की चरणबद्ध वापसी का खाका
अमेरिका की मध्यस्थता में हुए इस समझौते का उद्देश्य लेबनान में गैर-राज्य सशस्त्र समूहों का सत्यापित निरस्त्रीकरण और इज़राइली सेना की क्रमिक वापसी सुनिश्चित करना है, जिसे हिज़्बुल्लाह ने अस्वीकार किया है।
संयुक्त राज्य अमेरिका, इज़राइल और लेबनान ने शुक्रवार को वाशिंगटन में एक त्रिपक्षीय ढांचा समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच दशकों से चले आ रहे संघर्ष को समाप्त करना है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय द्वारा जारी 14-सूत्रीय दस्तावेज़ के अनुसार, इसके तहत लेबनानी सशस्त्र बल (एलएएफ) सभी गैर-राज्य सशस्त्र समूहों, विशेषकर ईरान समर्थित हिज़्बुल्लाह के सत्यापित निरस्त्रीकरण और संबंधित बुनियादी ढांचे को ध्वस्त किए जाने के बाद पूरे लेबनानी क्षेत्र पर प्रभावी संप्रभुता बहाल करेगा। इसके बदले इज़राइली रक्षा बल (आईडीएफ) लेबनानी क्षेत्र से चरणबद्ध तरीके से वापस तैनात हो जाएगा। समझौते में दो 'पायलट क्षेत्रों' की स्थापना की गई है, जहां एलएएफ धीरे-धीरे पूर्ण सुरक्षा जिम्मेदारी संभालेगा और अंतरराष्ट्रीय समर्थन से पुनर्निर्माण कार्य शुरू होंगे।
विभिन्न पक्षों की स्थिति इस समझौते की जटिलता को रेखांकित करती है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इसे 'शुरुआत की शुरुआत' बताते हुए 100 मिलियन डॉलर की मानवीय सहायता और लेबनानी सेना की क्षमता बढ़ाने के लिए 30 मिलियन डॉलर की प्रतिपूर्ति की घोषणा की। इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक पूर्व-रिकॉर्डेड वीडियो में स्पष्ट किया कि जब तक हिज़्बुल्लाह अपने हथियार नहीं छोड़ देता, आईडीएफ दक्षिणी लेबनान में बना रहेगा; हालांकि इज़राइल ने लेबनान में किसी क्षेत्रीय महत्वाकांक्षा से इनकार किया। लेबनानी राष्ट्रपति जोसेफ आउन ने अमेरिकी मध्यस्थता का स्वागत किया और प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने इसे पूर्ण इज़राइली वापसी और राज्य की संप्रभुता की बहाली का मार्ग बताया। वहीं, हिज़्बुल्लाह प्रमुख शेख नईम कासिम ने इज़राइल की बिना शर्त वापसी की मांग दोहराई और समूह के सांसद हसन फदलल्लाह ने चेतावनी दी कि अमेरिकी समर्थन से समझौते का कार्यान्वयन लेबनान को गृहयुद्ध की ओर ले जा सकता है। ईरान की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन फ़ार्स समाचार एजेंसी जैसे ईरानी मीडिया ने इसे हिज़्बुल्लाह के निरस्त्रीकरण और दक्षिणी लेबनान में 'प्रतिरोध' की समाप्ति की योजना करार दिया है।
यह ढांचा पांच दौर की सीधी वार्ता के बाद तैयार हुआ है और व्यापक अमेरिका-ईरान समझौते से जुड़े नाजुक युद्धविराम की पृष्ठभूमि में आया है। मार्च में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की हत्या के प्रतिशोध में हिज़्बुल्लाह के रॉकेट हमलों के बाद शुरू हुए इस संघर्ष में 4,200 से अधिक लोग मारे गए और दस लाख से अधिक लेबनानी विस्थापित हुए। समझौते के तहत लेबनान सरकार ने राज्य के बल प्रयोग के एकाधिकार को फिर से स्थापित करने और सभी गैर-राज्य समूहों के पूर्ण निरस्त्रीकरण की प्रतिबद्धता जताई है, जबकि इज़राइल ने कहा है कि खतरा समाप्त होने पर भविष्य में किसी सैन्य कार्रवाई या उपस्थिति की आवश्यकता नहीं होगी। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के अनुसार, एक त्रिपक्षीय सैन्य समन्वय समूह कार्यान्वयन की निगरानी करेगा और सत्यापन तंत्र स्थापित करेगा।
दस्तावेज़ के अनुसार, दोनों देश तुरंत कार्य समूह गठित करेंगे जो एक व्यापक शांति और सुरक्षा समझौते का मसौदा तैयार करेंगे, और अमेरिकी सुविधा से सीधी वार्ता जारी रहेगी। प्रारंभिक दो पायलट क्षेत्रों पर सहमति बन चुकी है, भविष्य के क्षेत्र आपसी सहमति से तय होंगे। यूरोपीय संघ ने समझौते के कार्यान्वयन का समर्थन करने की इच्छा पहले ही व्यक्त कर दी थी। फिलहाल, हिज़्बुल्लाह के निरस्त्रीकरण पर सहमति का अभाव और इज़राइल का सुरक्षा क्षेत्र में बने रहने का आग्रह इस प्रक्रिया की प्रमुख बाधाएं हैं। अगला ठोस कदम सैन्य समन्वय समूह का गठन और पायलट क्षेत्रों में एलएएफ की तैनाती की शुरुआत होगी, हालांकि इसके लिए कोई समय-सीमा घोषित नहीं की गई है।
| ईरानी और संबद्ध प्रेस | −0.80 | critical |
|---|---|---|
| अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस | +0.30 | aligned |
| अरब लेवांत-मगरिब प्रेस | −0.20 | neutral |
We, the Iranian nation, have upheld our end of the ceasefire, but the United States has once again shown its true colors by launching an unprovoked attack on our soil. This aggression will not go unanswered, and the world must see who is the real obstacle to peace.
The narrative inverts the blame by framing the US response as an unprovoked escalation, while ignoring Iran's prior attack on the cargo ship. It uses the language of victimhood to delegitimize the US action and rally domestic and international sympathy.
The Iranian bloc omits any mention of the Iranian drone attack on the M/V Ever Lovely that triggered the US strikes, as well as the fact that the US strikes were explicitly framed as a response to that attack. This omission is crucial to maintain the victim narrative.
The United States has shown restraint, but when Iran attacks commercial shipping in clear violation of the ceasefire, we have no choice but to respond decisively. Our strikes are targeted and proportional, aimed at preventing further aggression and upholding the agreement.
The narrative frames the US action as a defensive, rule-based response, using the language of proportionality and enforcement. It omits the broader context of the conflict and presents the US as a neutral enforcer rather than a party to the agreement.
The atlantica bloc omits any mention of the US strikes hitting coastal radar sites and storage facilities that could be considered civilian infrastructure, as well as the Iranian perspective that the attack was unprovoked. It also does not mention that the US itself is a signatory to the framework agreement, not an impartial arbiter.
The Israeli military says it targeted terrorists, but the fact that this strike happened just days after the framework agreement was signed suggests that the ceasefire is already under strain. We watch and report, but the situation remains volatile.
The narrative uses a 'he said' style without endorsing any side, but the juxtaposition of the agreement and the strike creates an implicit narrative of fragility. It avoids direct criticism but lets the facts speak for themselves.
The arabo_levante_maghreb bloc omits any mention of the broader context of the conflict, such as the US-Iran strikes or the details of the framework agreement. It also does not include any Lebanese or Hezbollah perspective on the airstrike, which would likely be more critical.
अपना नज़रिया बढ़ाएँ
वैश्विक बाजारों में इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़त, लैटिन अमेरिका और एशिया में नए मॉडलों की धूम
4 भाषाएँ · 7 स्रोत
Technology सेव्हाट्सएप का यूजरनेम फीचर भारत में अटका, सरकार ने सुरक्षा आकलन तक रोक लगाई
2 भाषाएँ · 6 स्रोत
Science & Health सेहफ्ते में दो बार कसरत, दिल के दौरे का खतरा आधा: रोज़मर्रा की आदतें कैसे बदल सकती हैं सेहत
5 भाषाएँ · 11 स्रोत