
कोलंबिया के खिलाफ परफेक्ट प्रदर्शन की गुहार: कार्लोस क्वेरोज़ ने घाना को अफ्रीका की उम्मीदों का ठेका सौंपा
विश्व कप के प्री-क्वार्टर फाइनल से पहले घाना के कोच ने दबाव को विशेषाधिकार बताया और महाद्वीप की निराशाजनक नॉकआउट यात्रा को बदलने का संकल्प जताया।
कैनसस सिटी स्टेडियम में गुरुवार को प्री-मैच प्रेस कॉन्फ्रेंस में घाना के मुख्य कोच कार्लोस क्वेरोज़ ने एक साथ दो मोर्चों पर स्पष्ट संदेश दिया—कोलंबिया के खिलाफ शुक्रवार के नॉकआउट मुकाबले में गलती की कोई गुंजाइश नहीं है, और यह टीम पूरे अफ्रीका की उम्मीदों का बोझ उठाने के लिए तैयार है। पुर्तगाली कोच ने कहा, “कल का खेल विजेता के लिए सब कुछ है, हारने वाले के लिए कुछ नहीं। गलतियों की कोई जगह नहीं है, हमें 90 मिनट या ज़रूरत पड़ी तो 120 मिनट तक हर काम सही करना होगा।” उन्होंने इस दबाव को समस्या नहीं, बल्कि विशेषाधिकार बताते हुए खिलाड़ियों से मंच का आनंद लेने और अपनी आत्मा से खेलने का आह्वान किया।
यह आह्वान ऐसे समय आया है जब अफ्रीकी टीमें इस विश्व कप के नॉकआउट चरण में लगातार निराश कर रही हैं। सेनेगल, आइवरी कोस्ट और डीआर कांगो बाहर हो चुके हैं, केवल मोरक्को अंतिम 16 में पहुंचा है। क्वेरोज़ ने इसे अपनी टीम का “कर्तव्य” बताया कि वह आंकड़ों को सुधारे और एक और अफ्रीकी टीम को अगले दौर में पहुंचाए। कप्तान जॉर्डन आय्यू ने 2010 में दक्षिण अफ्रीका में घाना के क्वार्टर फाइनल तक के सफर को याद करते हुए कहा कि हर मैच 50-50 से शुरू होता है और टीम अफ्रीका को गौरवान्वित करने का वादा करती है।
क्वेरोज़ के लिए यह मुकाबला व्यक्तिगत यादों से भी जुड़ा है। 2019-20 में कोलंबिया के कोच रह चुके पुर्तगाली ने वर्तमान टीम की तारीफ की, लेकिन साथ ही कहा कि “कोई भी टीम परफेक्ट नहीं है, कोलंबिया भी नहीं।” उन्होंने कोविड-19 महामारी के दौरान बोगोटा में अकेलेपन और अवसाद से जूझकर जान गंवाने वाले अपने पूर्व गोलकीपर कोच डेस मैकएलीनन को भावुक होकर याद किया और कोलंबियाई फुटबॉल महासंघ से उनके परिवार के प्रति क्षतिपूर्ति की अपील की। साथ ही, जेम्स रोड्रिग्ज के साथ कथित मनमुटाव की खबरों को उन्होंने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि हर खिलाड़ी के साथ उनका व्यवहार समान रहा है और मैदान पर प्रदर्शन ही एकमात्र कसौटी है।
कोलंबियाई मीडिया ने क्वेरोज़ के “कोलंबिया परफेक्ट नहीं है” वाले बयान को मुकाबले की गर्माहट बढ़ाने वाला कदम बताया, जबकि अफ्रीकी और अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने घाना की महाद्वीपीय जिम्मेदारी को केंद्र में रखा। नेस्टर लोरेंजो की कोचिंग वाली कोलंबियाई टीम को उच्च रैंकिंग का लाभ है, लेकिन घाना के खिलाड़ियों की लड़ाकू प्रवृत्ति और 2010 की ऐतिहासिक यादें इस मुकाबले को संतुलित बनाती हैं।
शनिवार तड़के भारतीय समयानुसार खेले जाने वाले इस मैच का इनाम क्वार्टर फाइनल का टिकट है। घाना पहली बार 2010 के बाद विश्व कप नॉकआउट में पहुंचा है, और क्वेरोज़ के शब्दों में, “कल हम जीवन का जश्न मनाएंगे”—एक ऐसा वाक्य जो मैदान के भीतर और बाहर दोनों जगह गूंजेगा।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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क्विरोज़ का कथन कि 'दबाव एक विशेषाधिकार है' को कोलंबिया को डराने के लिए एक मनोवैज्ञानिक चाल के रूप में देखा जाता है। कहानी कोलंबिया के हालिया फॉर्म को कम आंकती है और घाना की लड़ाई की भावना पर जोर देती है, लेकिन इस बारे में संदेह के साथ कि क्या यह पर्याप्त होगा।
क्विरोज़ के शब्दों को एक शक्तिशाली प्रेरक उपकरण के रूप में मनाया जाता है, जो घाना को चुनौती स्वीकार करने के लिए प्रेरित करता है। कहानी घाना को एक दृढ़ अंडरडॉग के रूप में चित्रित करती है जो लड़ने के लिए तैयार है, कोच के अनुभव को एक महत्वपूर्ण संपत्ति के रूप में देखा जाता है।
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