
ईरान ने इजरायली हमले के बाद अमेरिका से शांति वार्ता तोड़ने की चेतावनी दी
तेहरान के वार्ताकार ने कहा कि अगर अमेरिका लेबनान में अपनी प्रतिबद्धताएं पूरी नहीं करता तो बातचीत जारी रखना व्यर्थ है, जिससे रविवार को प्रस्तावित समझौते पर अनिश्चितता बढ़ गई।
रविवार को बेरूत के दहिये उपनगर पर इजरायली हवाई हमले के बाद ईरान ने अमेरिका के साथ जारी शांति वार्ता को स्थगित करने की धमकी दी है। ईरान के मुख्य वार्ताकार और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर कलीबाफ ने सोशल मीडिया पर कहा कि यह हमला दर्शाता है कि अमेरिका या तो अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने की इच्छाशक्ति नहीं रखता या उसमें सक्षम नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसी स्थिति में बातचीत जारी रखने का कोई औचित्य नहीं है। इस बयान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे को गहरा झटका दिया है जिसमें उन्होंने रविवार—अपने 80वें जन्मदिन—तक एक अंतरिम शांति समझौते पर हस्ताक्षर होने की बात कही थी।
यह समझौता मध्य पूर्व में जारी युद्ध को समाप्त करने और रणनीतिक हॉर्मुज जलडमरूमध्य को तुरंत खोलने से जुड़ा था, जिसके बंद होने से वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है। ईरान ने शुरू से ही किसी ठोस समय-सीमा से इनकार किया था और उसकी अर्ध-सरकारी फार्स समाचार एजेंसी ने बताया कि सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने अभी तक समझौते के मसौदे को मंजूरी नहीं दी थी। इजरायली सेना ने रविवार को बेरूत के दक्षिणी इलाके में लेज़र-निर्देशित मिसाइलों से हिजबुल्लाह के ठिकानों को निशाना बनाया, जिसमें तीन लोग मारे गए और 15 घायल हुए। ईरान का कहना है कि अमेरिका इजरायल पर लगाम लगाने में विफल रहा है और वह केवल रियायतें हासिल कर लेबनान में हमलों को हरी झंडी दे रहा है।
इस घटनाक्रम को लेकर पश्चिमी मीडिया ने ट्रंप प्रशासन की कूटनीतिक साख पर सवाल उठाए हैं, जबकि लैटिन अमेरिकी सूत्रों ने वैश्विक तेल बाजारों पर पड़ने वाले प्रभाव की आशंका जताई है। दक्षिण एशिया, विशेषकर भारत, जो अपनी तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा हॉर्मुज जलडमरूमध्य से प्राप्त करता है, इस गतिरोध से चिंतित है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि वार्ता टूटती है तो तेल की कीमतों में उछाल आ सकता है और क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ सकती है। ईरान ने पहले ही संकेत दिया था कि समझौते में लेबनान पर इजरायली बमबारी रोकने की शर्त शामिल होनी चाहिए, जिसे अमेरिका अभी तक पूरा नहीं कर पाया है।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि वार्ता पूरी तरह समाप्त होगी या नहीं, लेकिन आने वाले दिनों में अमेरिकी प्रतिक्रिया और ईरान के सर्वोच्च नेता के रुख पर बहुत कुछ निर्भर करेगा। ट्रंप प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, हालांकि एक मध्यस्थ के रूप में उसकी विश्वसनीयता गंभीर संकट में पड़ गई है। यदि कूटनीतिक प्रयास विफल होते हैं तो मध्य पूर्व में संघर्ष और गहरा सकता है, जिसके वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा पर दूरगामी परिणाम होंगे।
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