
फीफा ने विश्व कप फाइनल की घास के टुकड़े 450 डॉलर में बेचने शुरू किए
फीफा 19 जुलाई को होने वाले फाइनल के मैदान की घास को स्मृति चिह्न के रूप में बेच रहा है, जिसकी कीमत 450 डॉलर से लेकर 3,000 डॉलर तक है।
फीफा ने 2026 विश्व कप के फाइनल मैदान की घास को सीमित संस्करण के स्मृति चिह्नों में बदल दिया है। न्यू जर्सी के मेटलाइफ स्टेडियम की वह प्राकृतिक घास, जिस पर 19 जुलाई को विश्व चैंपियन का फैसला होगा, अब चार मूल्य श्रेणियों—450, 900, 1,200 और 3,000 अमेरिकी डॉलर—में ऑनलाइन उपलब्ध है। हर श्रेणी के केवल 2,026 टुकड़े बनाए गए हैं, जिन्हें पारदर्शी ऐक्रेलिक में स्थायी रूप से संरक्षित किया गया है और साथ में एक यूएसबी ड्राइव भी दी जा रही है जिसमें प्रामाणिकता का डिजिटल प्रमाण होगा। सबसे महँगे ‘हीरो एडिशन’ में सोने से उकेरी गई एक लघु टिकट, फाइनल की गेंद की प्रतिकृति और क्रिस्टल ट्रॉफी भी शामिल है। हालाँकि, यह पेशकश केवल अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोप के पतों पर ही भेजी जाएगी, और सभी ऑर्डर फाइनल के बाद ही डिस्पैच होंगे। उत्तर अमेरिकी खेल मीडिया के अनुसार, इस पहल से फीफा को 1.1 करोड़ डॉलर से अधिक की आय होने का अनुमान है।
यह कदम उस व्यापक व्यावसायिक रणनीति का हिस्सा है जिसने इस विश्व कप को अब तक का सबसे महँगा आयोजन बना दिया है। फाइनल के सामान्य टिकट 32,970 डॉलर तक बिक रहे हैं, जबकि प्रीमियम आतिथ्य पैकेज 34,500 डॉलर तक पहुँच गए हैं। फीफा के आधिकारिक पुनर्विक्रय मंच पर तो एक टिकट की कीमत 1.14 करोड़ डॉलर (लगभग 207 अरब रुपये) तक दर्ज की गई। इस मूल्य वृद्धि के विरोध में यूरोपीय और अंतरराष्ट्रीय प्रशंसक समूहों ने कानूनी कार्रवाई की है, और न्यूयॉर्क तथा न्यू जर्सी की राज्य सरकारों ने मूल्य निर्धारण में पारदर्शिता की कमी को लेकर फीफा को सम्मन जारी किए हैं। फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो ने अमेरिकी वाणिज्यिक कानूनों का हवाला देते हुए इस रणनीति का बचाव किया है।
खिलाड़ियों और कोचों की ओर से इसी मैदान की गुणवत्ता पर पहले ही सवाल उठ चुके हैं। उत्तरी कैरोलिना के एक फार्म में उगाई गई इस घास को मई की शुरुआत में मेटलाइफ स्टेडियम में बिछाया गया था, जो आमतौर पर कृत्रिम सतह वाला एनएफएल स्टेडियम है। ब्राजील और फ्रांस के खिलाड़ियों ने इसे अत्यधिक शुष्क और खेलने में कठिन बताया, जबकि यूरोपीय कोचों ने भी इसकी बनावट पर निराशा जताई। दक्षिण एशियाई और मध्य पूर्वी मीडिया में इस पूरे प्रकरण को ‘खेल के अति-व्यावसायीकरण’ के रूप में रेखांकित किया गया है।
तीन देशों में 16 स्टेडियमों में खेले जा रहे इस 48-टीम विश्व कप के 104 मैचों की श्रृंखला 19 जुलाई को पूर्वी रदरफोर्ड में समाप्त होगी। फीफा ने स्पष्ट किया है कि घास के ये टुकड़े फाइनल की सीटी बजने के बाद ही खरीदारों तक पहुँचेंगे, यानी जिस ज़मीन पर विश्व विजेता का ताज पहना जाएगा, उसके अंश कुछ ही सप्ताह बाद दुनिया के चुनिंदा घरों की शोभा बनेंगे।
| लैटिन अमेरिकी प्रेस | −0.30 | critical |
|---|---|---|
| भारतीय और दक्षिण एशियाई प्रेस | −0.80 | critical |
| महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस | +0.20 | neutral |
फीफा पिच को एक लक्जरी उत्पाद में बदल देता है, दक्षिण अमेरिकी प्रशंसकों को बाहर कर देता है।
भौगोलिक विशिष्टता और उच्च कीमत पर जोर देकर, लालच और अन्याय की एक कथा बनाई जाती है।
यह फीफा के खिलाफ वैश्विक प्रतिक्रिया और उन प्रशंसकों के दृष्टिकोण को छोड़ देता है जो स्मारिका को एक पोषित स्मृति चिन्ह के रूप में देख सकते हैं।
फीफा बेतुकी कीमतों से प्रशंसकों को रौंदता है, मैदान को अमीरों की चीज़ में बदल देता है।
पिच की बिक्री को टिकट की कीमत विवाद से जोड़कर, लालच की एक श्रृंखला बनाई जाती है जो फीफा के हर कदम को नैतिक रूप से निंदनीय बनाती है।
यह किसी भी तटस्थ या सकारात्मक दृष्टिकोण को छोड़ देता है, जैसे संग्रहणीय मूल्य या राजस्व के आंकड़े एक साधारण व्यावसायिक तथ्य के रूप में।
फीफा एक अद्वितीय स्मारिका, फुटबॉल इतिहास का एक टुकड़ा प्रदान करता है, जो उन लोगों के लिए उपलब्ध है जो इसे खरीद सकते हैं।
पहल को बिना नैतिक निर्णय के एक साधारण वाणिज्यिक उत्पाद के रूप में प्रस्तुत करके, मैदान के वस्तुकरण को सामान्यीकृत किया जाता है।
यह अन्य ब्लॉकों में मौजूद आलोचना और प्रतिक्रिया को छोड़ देता है, साथ ही उच्च राजस्व आंकड़े और विशिष्टता के मुद्दे को भी।
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