
मधुमेह के 73% रोगी अनजान, आंखों-पैरों पर चुपचाप बढ़ रहा खतरा
इंडोनेशिया के आंकड़े बताते हैं कि बिना पहचाने मधुमेह के कारण रेटिनोपैथी और डायबिटिक फुट जैसी गंभीर जटिलताएं तेजी से बढ़ रही हैं, जो भारत समेत दक्षिण एशिया के लिए भी चेतावनी है।
इंडोनेशिया की एंडोक्राइनोलॉजी सोसायटी (पर्केनी) के अनुसार, देश में अनुमानित दो करोड़ से अधिक मधुमेह रोगियों में से 73 प्रतिशत को अपनी बीमारी का पता ही नहीं है। यह आंकड़ा अंतरराष्ट्रीय मधुमेह महासंघ (आईडीएफ) 2023 के आकलन पर आधारित है और दर्शाता है कि करोड़ों लोग बिना जाने ही उच्च रक्त शर्करा के कारण अंग क्षति के जोखिम में जी रहे हैं। भारत, जो दुनिया की सबसे बड़ी मधुमेह आबादी वाला देश है, के लिए भी यह स्थिति समान चुनौती प्रस्तुत करती है, जहां बड़े पैमाने पर मामले अभी भी निदान के दायरे से बाहर हैं।
लंबे समय तक अनियंत्रित रक्त शर्करा रेटिना की छोटी रक्त वाहिकाओं और परिधीय तंत्रिकाओं को क्षति पहुंचाती है। गाजा मादा विश्वविद्यालय (यूजीएम) के नेत्र रोग विशेषज्ञ प्रो. मुहम्मद बायु सासोंगको बताते हैं कि डायबिटिक रेटिनोपैथी के शुरुआती चरण में कोई लक्षण नहीं दिखते, इसलिए मरीज़ धुंधली दृष्टि को मोतियाबिंद या उम्र का असर समझ लेते हैं। इसी तरह, ब्राज़ीलियन डायबिटीज़ सोसायटी के अनुसार, पैरों की नसों की क्षति (पेरिफेरल न्यूरोपैथी) से संवेदना खत्म हो जाती है, जिससे छोटे घाव संक्रमण और अल्सर में बदल जाते हैं। रूसी मूत्र रोग विशेषज्ञ लियोनिद बोखानोव ने भी सुबह की इरेक्शन के नियमित रूप से गायब होने को मधुमेह और हृदय रोग का प्रारंभिक संकेत बताया है, जो तंत्रिका व संवहनी क्षति की ओर इशारा करता है।
आंकड़े इस मूक प्रगति की गंभीरता को रेखांकित करते हैं। इंडोनेशिया में बीपीजेएस स्वास्थ्य डेटा के विश्लेषण से पता चला कि लगभग 52 लाख मधुमेह रोगी पहले ही रेटिनोपैथी से ग्रस्त हैं, जिनमें से 12 लाख को लेज़र, इंजेक्शन या सर्जरी जैसे उन्नत उपचार की आवश्यकता है। योग्याकार्ता में एक जनसंख्या अध्ययन में रेटिनोपैथी का प्रसार 43.1 प्रतिशत पाया गया, जो वैश्विक औसत 35.4 प्रतिशत से अधिक है। ब्राज़ील में 27 राजधानियों में दस वर्षों में डायबिटिक फुट की 45,000 से अधिक जटिलताएं दर्ज की गईं, और 2008 से 2018 के बीच यह संख्या तीन गुना हो गई। वहां गैर-दुर्घटनाजनित अंग-विच्छेदन के दो-तिहाई मामलों के लिए न्यूरोपैथी जिम्मेदार है।
विशेषज्ञ इस बात पर जोर देते हैं कि बिना लक्षणों के भी सभी मधुमेह रोगियों को नियमित रेटिना जांच करानी चाहिए। फंडस फोटोग्राफी से प्रारंभिक परिवर्तनों का पता लगाया जा सकता है। रक्त शर्करा नियंत्रण के साथ-साथ रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल प्रबंधन क्षति की गति को धीमा करने में कारगर है। इंडोनेशिया का स्वास्थ्य मंत्रालय मुफ्त स्वास्थ्य जांच कार्यक्रम (सीकेजी) के माध्यम से प्रारंभिक पहचान को मजबूत कर रहा है। भारत और दक्षिण एशिया के लिए, जहां मधुमेह का बोझ तेजी से बढ़ रहा है, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर व्यवस्थित स्क्रीनिंग और रोगी शिक्षा को प्राथमिकता देना अगला आवश्यक कदम है।
| दक्षिण-पूर्व एशियाई प्रेस | −0.20 | neutral |
|---|---|---|
| लैटिन अमेरिकी प्रेस | 0.00 | neutral |
| ईरानी और संबद्ध प्रेस | 0.00 | neutral |
इंडोनेशिया के स्वास्थ्य विशेषज्ञ और पत्रकार अलार्म बजा रहे हैं: 73% मधुमेह रोगियों का निदान नहीं हुआ है, और मूक रेटिनोपैथी हजारों लोगों को अंधा कर रही है। वे नियमित जांच और सार्वजनिक जागरूकता अभियानों की मांग करते हैं।
73% के चौंकाने वाले आंकड़े और विशेषज्ञों की चेतावनियों को बार-बार उद्धृत करके, यह ब्लॉक तात्कालिकता की भावना पैदा करता है जो पाठकों को कार्रवाई करने के लिए प्रेरित करता है। अलंकारिक तकनीक 'सांख्यिकीय अलार्म' है।
यह ब्लॉक मधुमेह पैर की जटिलताओं को संबोधित नहीं करता है, जो लैटिन अमेरिकी प्रेस द्वारा कवर किए गए हैं।
ब्राजील के स्वास्थ्य संचारक चेतावनी देते हैं कि मधुमेह पैर एक मूक खतरा है जो अक्सर तब तक किसी का ध्यान नहीं जाता जब तक बहुत देर न हो जाए। वे दैनिक पैर देखभाल और चिकित्सा जांच की आवश्यकता पर जोर देते हैं।
यह ब्लॉक मौन के रूपक और विच्छेदन के ठोस जोखिम का उपयोग करके खतरे को तत्काल और व्यक्तिगत बनाता है। तकनीक: 'लक्षण की मौनता'।
यह ब्लॉक 73% अज्ञात दर या मधुमेह रेटिनोपैथी का उल्लेख नहीं करता है, केवल पैर की समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करता है।
ईरानी चिकित्सा विशेषज्ञ इस बात पर जोर देते हैं कि मधुमेह अब युवाओं को प्रभावित कर रहा है, एक जनसांख्यिकीय बदलाव जो तत्काल सामाजिक ध्यान देने की मांग करता है। वे किशोरों की ओर रोकथाम के प्रयासों को पुनर्निर्देशित करने का आह्वान करते हैं।
मधुमेह को युवाओं की बीमारी के रूप में प्रस्तुत करके, यह ब्लॉक आम धारणा को चुनौती देता है और एक नई तात्कालिकता पैदा करता है। तकनीक: 'जनसांख्यिकीय बदलाव'।
यह ब्लॉक 73% अज्ञात आंकड़े या आंखों और पैरों की विशिष्ट जटिलताओं पर चर्चा नहीं करता है, इसके बजाय उम्र बदलाव पर ध्यान केंद्रित करता है।
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