
रजोनिवृत्ति में जोड़ों का दर्द: हार्मोन की भूमिका और व्यायाम से राहत के उपाय
एस्ट्रोजन में गिरावट से जोड़ों, मांसपेशियों और मस्तिष्क पर असर; विशेषज्ञ व्यायाम और हार्मोन थेरेपी को प्रभावी विकल्प मानते हैं।
ब्राज़ील के राष्ट्रीय सांख्यिकी संस्थान (IBGE) के आंकड़ों के अनुसार, 2003 से 2019 के बीच 20 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं में मोटापे की दर 14.5% से बढ़कर 30.2% हो गई, जो पुरुषों की तुलना में अधिक वृद्धि है। इसी अवधि में रजोनिवृत्ति से गुज़र रही महिलाओं में जोड़ों के दर्द, विशेषकर घुटने और पीठ के निचले हिस्से में, की शिकायतें भी तेज़ी से बढ़ी हैं। उत्तरी अमेरिका के स्वास्थ्य नेटवर्क नॉर्थवेल हेल्थ के अनुसार, लगभग 80% महिलाएं किसी न किसी हार्मोनल असंतुलन का अनुभव करती हैं, जो रजोनिवृत्ति के दौरान और गंभीर हो जाता है।
ब्राज़ीलियाई एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ. अलिदा हेरेडिया बताती हैं कि एस्ट्रोजन के स्तर में गिरावट से मांसपेशियों का द्रव्यमान घटता है, ऊर्जा व्यय कम होता है और पेट के आसपास वसा जमा होने लगती है। यही हार्मोनल बदलाव जोड़ों के कार्टिलेज को भी प्रभावित करता है, जिससे सूजन और दर्द बढ़ता है। अर्जेंटीना के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. कोनराडो एस्टोल इस बात पर ज़ोर देते हैं कि एस्ट्रोजन की कमी केवल शरीर तक सीमित नहीं रहती; इससे ‘मस्तिष्क कोहरा’ यानी याददाश्त और एकाग्रता में कमी भी हो सकती है, जिसे अक्सर अन्य बीमारियों का लक्षण समझ लिया जाता है।
अमेरिकन अकादमी ऑफ ऑर्थोपेडिक सर्जन्स (AAOS) के अनुसार, पीठ के निचले हिस्से का दर्द अक्सर मांसपेशियों में खिंचाव, लिगामेंट में तनाव या डिस्क में बदलाव से उत्पन्न होता है, और लंबे समय तक बैठे रहने या कमज़ोर पेट-पीठ की मांसपेशियों से जुड़ा होता है। ब्रिटिश पिलाटेस प्रशिक्षक हेलेन ओ’लेरी गर्दन और कंधों के दर्द के लिए केवल मालिश के बजाय मांसपेशियों को मज़बूत करने वाले व्यायामों पर ज़ोर देती हैं। वे ‘कैट-काउ’, ‘सुई में धागा’ और ‘डार्ट’ जैसे सरल पिलाटेस मूवमेंट्स की सिफ़ारिश करती हैं, जो रीढ़ की पूरी गतिशीलता बढ़ाते हैं और ऊपरी पीठ को मज़बूती देते हैं। इसी तरह, इंडोनेशियाई स्वास्थ्य रिपोर्टों में सलाह दी गई है कि यदि घुटने का दर्द आराम के बाद भी हफ़्तों बना रहे, सीढ़ियाँ चढ़ना मुश्किल हो या जोड़ में सूजन के साथ आवाज़ आए, तो इसे नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए।
डॉ. एस्टोल के अनुसार, 60 वर्ष से कम उम्र की या रजोनिवृत्ति के पहले दस वर्षों के भीतर की महिलाओं को हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (एचआरटी) पर विचार करना चाहिए, बशर्ते कोई चिकित्सकीय विरोधाभास न हो। यह थेरेपी जोड़ों के दर्द, गर्मी के झोंकों और नींद की समस्याओं में सुधार ला सकती है। हालांकि, विशेषज्ञ एकमत हैं कि हर मामले में व्यक्तिगत मूल्यांकन ज़रूरी है—केवल हार्मोन या केवल व्यायाम पर्याप्त नहीं, बल्कि जीवनशैली, आहार और तनाव प्रबंधन को मिलाकर एक समग्र दृष्टिकोण अपनाना होगा। अगला कदम यह है कि स्वास्थ्य प्रणालियाँ मध्यवयी महिलाओं के लिए ऐसे एकीकृत क्लीनिक विकसित करें जो हड्डी-जोड़ स्वास्थ्य, हार्मोन परामर्श और निर्देशित व्यायाम कार्यक्रम एक ही छत के नीचे उपलब्ध कराएँ।
| दक्षिण-पूर्व एशियाई प्रेस | 0.00 | neutral |
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| लैटिन अमेरिकी प्रेस | +0.20 | neutral |
महिलाओं को अपने शरीर के संकेतों को पहचानना और तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।
सामान्य लक्षणों को सूचीबद्ध करके और ठोस कदम पेश करके, यह नियंत्रण और सामान्यता की भावना पैदा करता है।
इसमें वजन बढ़ने या मानसिक धुंध का उल्लेख नहीं है, न ही हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी का।
60 वर्ष से कम उम्र की सभी महिलाओं को रजोनिवृत्ति के लक्षणों का मुकाबला करने के लिए हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी लेनी चाहिए।
एक न्यूरोलॉजिस्ट का हवाला देकर और स्पष्ट भाषा का उपयोग करके, यह हार्मोन थेरेपी को एक सार्वभौमिक आवश्यकता के रूप में प्रस्तुत करता है।
इसमें हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी के जोखिम या वैकल्पिक दृष्टिकोण का उल्लेख नहीं है।
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