
अमेरिका-ईरान समझौते पर वेंस की इज़राइल को दो टूक: 'अपने इकलौते सहयोगी पर हमला मत करो'
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इज़राइली मंत्रियों को चेतावनी दी कि ट्रंप ही उनके एकमात्र शक्तिशाली सहयोगी हैं और सैन्य बल से हर सुरक्षा संकट का समाधान नहीं निकाला जा सकता।
अमेरिका और इज़राइल के बीच चार महीने पहले ईरान के ख़िलाफ़ संयुक्त सैन्य अभियान से शुरू हुई नज़दीकी अब एक ऐतिहासिक सार्वजनिक दरार में बदल गई है। व्हाइट हाउस में गुरुवार को उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इज़राइल के उन कैबिनेट मंत्रियों को अभूतपूर्व कड़े शब्दों में आड़े हाथों लिया, जिन्होंने अमेरिका-ईरान समझौता ज्ञापन (एमओयू) की खुलकर आलोचना की थी। वेंस ने कहा, 'डोनाल्ड जे. ट्रंप इस समय पूरी दुनिया में इज़राइल के प्रति सहानुभूति रखने वाले इकलौते राष्ट्राध्यक्ष हैं। अगर मैं इज़राइली सरकार के कैबिनेट में होता, तो शायद अपने बचे हुए इकलौते शक्तिशाली सहयोगी पर हमला नहीं करता।' उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-गवीर और वित्त मंत्री बेज़ालेल स्मोट्रिच का नाम लेते हुए याद दिलाया कि पिछले तीन महीनों में इज़राइल की रक्षा करने वाले दो-तिहाई हथियार अमेरिकी हाथों से बने और अमेरिकी करदाताओं के पैसे से ख़रीदे गए। यह बयान दोनों पुराने सहयोगियों के रिश्तों में आए तनाव की सबसे कठोर सार्वजनिक अभिव्यक्ति मानी जा रही है।
यह विवाद फ़्रांस में जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान हस्ताक्षरित उस एमओयू से उपजा है, जिसके तहत 60 दिनों के भीतर एक व्यापक अंतिम समझौते पर बातचीत होनी है। समझौते में हर मोर्चे पर स्थायी युद्धविराम, 30 दिनों में अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाना, होर्मुज़ जलडमरूमध्य से व्यापारिक जहाज़ों की आवाजाही बहाल करना और ईरान पर से तेल प्रतिबंध हटाकर कम से कम 300 अरब डॉलर की पुनर्निर्माण निधि जुटाना शामिल है। इज़राइल इसलिए नाराज़ है क्योंकि समझौता ईरान के परमाणु कार्यक्रम और बैलिस्टिक मिसाइल क्षमताओं पर अंकुश लगाने का स्पष्ट रास्ता नहीं देता, साथ ही लेबनान में हिज़्बुल्लाह के ख़िलाफ़ इज़राइली सैन्य कार्रवाई को सीमित करता है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सार्वजनिक रूप से ट्रंप पर सीधा हमला नहीं किया है, लेकिन उन्होंने दक्षिणी लेबनान में इज़राइली सैन्य नियंत्रण क्षेत्र बनाए रखने की घोषणा कर समझौते की शर्तों को चुनौती दी है।
क्षेत्रीय प्रतिक्रियाएं भी मिली-जुली हैं। खाड़ी देशों, विशेषकर संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन और कुवैत के अधिकारियों ने 'पूर्ण निराशा' व्यक्त की है, क्योंकि समझौता ईरान के ड्रोन और मिसाइल कार्यक्रमों पर कोई रोक नहीं लगाता, जिनसे युद्ध के दौरान उनके अपने बुनियादी ढाँचे को ख़तरा पैदा हुआ था। वहीं ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह मोजतबा ख़ामेनेई ने इसे अमेरिकी 'बेबसी' का नतीजा बताया है। स्वयं ट्रंप भी बेरूत में इज़राइली हमलों से बढ़ती नागरिक मौतों पर सवाल उठा चुके हैं और उन्होंने सोशल मीडिया पर सभी पक्षों से पूर्ण युद्धविराम का पालन करने को कहा है।
भारत और व्यापक दक्षिण एशिया के लिए इस समझौते के गहरे आर्थिक निहितार्थ हैं। होर्मुज़ जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति का सबसे अहम मार्ग है, और ईरान द्वारा इसे बंद किए जाने से कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया था। भारत, जो अपनी ज़रूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, के लिए जलडमरूमध्य का फिर से खुलना और प्रतिबंधों में ढील से ऊर्जा लागत में राहत मिल सकती है। हालाँकि, यदि इज़राइल लेबनान में सैन्य कार्रवाई जारी रखता है और ईरान इसे समझौते का उल्लंघन मानता है, तो यह राहत क्षणिक साबित हो सकती है।
आगे की राह अनिश्चित है। 60 दिनों की वार्ता अवधि के दौरान ईरान के परमाणु कार्यक्रम को नष्ट करने और क्षेत्रीय आतंकी वित्तपोषण रोकने के वादों को अमल में लाना होगा। वेंस ने भरोसा जताया कि अमेरिका ने इस क्षेत्र का विश्वास अर्जित किया है, लेकिन इज़राइल के भीतर 'अजीब घबराहट' और अविश्वास की भावना गहरी है। यदि नेतन्याहू सरकार दक्षिणी लेबनान में अपनी सैन्य उपस्थिति बनाए रखती है और हिज़्बुल्लाह पर हमले जारी रखती है, तो न केवल ईरान के साथ समझौता ख़तरे में पड़ेगा, बल्कि वाशिंगटन और यरुशलम के बीच यह ऐतिहासिक दरार और गहरा सकती है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने इज़राइल को कड़ी चेतावनी देते हुए ईरान समझौते पर उसकी प्रतिक्रिया को 'अजीब घबराहट' बताया और याद दिलाया कि अमेरिका ही उसका एकमात्र शक्तिशाली सहयोगी बचा है। इज़राइली कैबिनेट सदस्यों से कहा गया कि वे 'हकीकत को पहचानें' और समझौते पर हमला करना बंद करें। यह संदेश वाशिंगटन की हताशा को रेखांकित करता है और रिश्ते को अपरिहार्य संरक्षण के रूप में पेश करता है।
व्हाइट हाउस ईरान समझौते को एक बड़ी जीत के रूप में पेश करता है, लेकिन इज़राइल 14-सूत्रीय योजना से असंतुष्ट है, उसे डर है कि इससे तेहरान को आर्थिक राहत मिलेगी जबकि परमाणु चिंताओं का समाधान नहीं होगा। अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने इज़राइल को असामान्य रूप से सीधी फटकार लगाते हुए अपने एकमात्र सहयोगी की आलोचना न करने की चेतावनी दी। रिपोर्ट बिना पक्ष लिए तनाव को नोट करती है।
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