
अमेरिका-ईरान करार पर एर्दोआन का समर्थन और इज़राइल को सख्त चेतावनी
इस्तांबुल में पाकिस्तानी पीएम संग वार्ता के बाद तुर्की राष्ट्रपति ने इस्लामाबाद समझौते को दुनिया के लिए राहत बताया और इज़रायली सरकार द्वारा सौदे में अड़ंगा डालने की आशंका पर कड़ी निगरानी का संकेत दिया।
तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन ने शनिवार को इस्तांबुल में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के साथ एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा कि ‘मौजूदा इजरायली सरकार को हमारे क्षेत्र में फिर से बारूद और खून की गंध फैलाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।’ तुर्की मीडिया के अनुसार, एर्दोआन ने वाशिंगटन और तेहरान के बीच हाल ही में हुए ‘इस्लामाबाद समझौते’ का स्वागत करते हुए कहा कि इससे ‘दुनिया ने राहत की सांस ली है।’ उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कोई भी समाधान तभी टिकाऊ होगा जब वह क्षेत्रीय देशों की इच्छा और प्रत्यक्ष भागीदारी से निकले।
समझौते की घोषणा के बाद पहली बार सार्वजनिक रूप से बोलते हुए एर्दोआन ने कहा कि अंकारा ‘हर उस कदम का समर्थन करता है जो तनाव कम करने और हमारे क्षेत्र की समस्याओं के राजनयिक समाधान में मदद करे।’ ईरानी और अरब मीडिया सूत्रों के हवाले से, पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता वाले इस समझौते में 60 दिन का युद्धविराम, होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना, ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर सहमति और स्थायी संघर्ष-विराम की ओर एक रोडमैप शामिल है। हालांकि, पिछले सप्ताह ही समझौते की व्याख्या को लेकर मतभेदों के चलते अमेरिका और ईरान के बीच आपसी हमले हुए, जिससे इसकी नाजुकता साबित हुई।
तुर्की सरकार से जुड़े सूत्रों ने बताया कि एर्दोआन ने विशेष रूप से इजरायल की उन कोशिशों पर चिंता जताई जो ‘आम सहमति को कमजोर करने’ के लिए की जा रही हैं। एक प्रमुख इजरायली अखबार के अनुसार, तेल अवीव इस सौदे से लगातार असहज है और उसे तुर्की के सोमालिया स्थित नए अंतरिक्ष एवं बैलिस्टिक मिसाइल प्रक्षेपण केंद्र से सीधा सुरक्षा खतरा भी महसूस हो रहा है। इस संदर्भ में एर्दोआन का ‘बारूद और खून’ वाला बयान केवल गाजा या लेबनान तक सीमित नहीं रहकर एक व्यापक क्षेत्रीय अस्थिरता की ओर इशारा करता है।
पाकिस्तान की मध्यस्थ भूमिका को सराहते हुए एर्दोआन ने द्विपक्षीय संबंधों में ऊर्जा, परिवहन, दुर्लभ खनिज, सूचना प्रौद्योगिकी और रक्षा के क्षेत्रों में गहन सहयोग की योजना की घोषणा की और दोनों देशों के बीच व्यापार को पांच अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखा। विश्लेषकों की मानें तो इस वक्तव्य के जरिए तुर्की ने एक तरफ अपनी क्षेत्रीय नेतृत्व की आकांक्षा प्रदर्शित की है, वहीं दूसरी तरफ पश्चिमी गठबंधन के बावजूद इस्लामाबाद और तेहरान के करीबी रुख को बरकरार रखा है। मौजूदा कूटनीतिक प्रयास ऐसे समय में हो रहे हैं जब समझौता अभी शुरुआती चरण में है और इसके उल्लंघन की रिपोर्टिंग के लिए एक संचार माध्यम गठित किया गया है, लेकिन इसकी दीर्घकालिक सफलता सभी पक्षों की सद्भावना और परस्पर विश्वास पर निर्भर करेगी।
| अरब लेवांत-मगरिब प्रेस | +0.30 | aligned |
|---|---|---|
| ईरानी और संबद्ध प्रेस | +0.40 | aligned |
| इज़राइली प्रेस | −0.50 | critical |
| दक्षिण-पूर्व एशियाई प्रेस | 0.00 | neutral |
The Arab region rejects any external interference and insists that peace in the Middle East can only come through the will of local nations, not through Israeli sabotage.
It emphasizes regional legitimacy against an external enemy (Israel), constructing a 'we vs. them' opposition that strengthens Erdogan's position.
Iran and its allies view the deal as a triumph of regional diplomacy and warn that Israel must not undermine the newly achieved stability.
It uses the phrase 'sigh of relief' to frame the deal as a universal benefit, while delegitimizing Israeli criticism as destabilizing.
Israel sees Erdogan's statements as unacceptable interference and anti-Israeli rhetoric that ignores legitimate security concerns.
It downplays the significance of the agreement and highlights Erdogan's hostility, framing it as part of a broader anti-Israeli agenda.
Southeast Asia observes the diplomatic process with interest, acknowledging Pakistan's role but maintaining a neutral stance.
It adopts a descriptive and detached tone, presenting facts without explicit judgment to avoid alienating any party.
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