
रूस में मार्केटप्लेस पर शिकंजा: विक्रेताओं के शोषण पर भारी जुर्माने की तैयारी
मॉस्को ने प्लेटफॉर्म अर्थव्यवस्था को अनुशासित करने के लिए कड़े कदम उठाए हैं, वहीं इटली में छोटे डिजिटल भुगतानों की लागत घटाने पर बैंकों और व्यापारियों के बीच सहमति बनी।
रूसी सरकार ने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्मों पर विक्रेताओं के खिलाफ दबावपूर्ण रणनीति अपनाने पर भारी जुर्माना लगाने की योजना को मंजूरी दे दी है। आर्थिक विकास मंत्रालय द्वारा तैयार प्रस्तावित संशोधनों के तहत, मार्केटप्लेस को न्यूनतम 20 से 50 हज़ार रूबल के जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है, जबकि गंभीर उल्लंघनों—जैसे विक्रेता के निजी खाते तक पहुंच रोकना या शिकायतों के निपटारे में 15 दिन से अधिक की देरी—के लिए 5 लाख रूबल तक का दंड प्रस्तावित है। सबसे अहम प्रावधान मूल्य निर्धारण से जुड़ा है: प्लेटफॉर्मों को यह सुनिश्चित करना होगा कि विक्रेता अपने माल पर अपनी लागत पर कीमत घटाने पर रोक लगा सके, जिससे बिना सहमति के डिस्काउंट थोपने की प्रथा पर लगाम लगेगी।
इसी कड़ी में रूस के संवैधानिक न्यायालय ने एक अलग मामले में मार्केटप्लेसों की नकली सामान की बिक्री के लिए जवाबदेही स्पष्ट की है। अदालत ने कहा कि भुगतान स्वीकार करने और विज्ञापन जैसी अतिरिक्त सेवाएं देने मात्र से प्लेटफॉर्म अपना 'सूचना मध्यस्थ' का दर्जा नहीं खोते, लेकिन उन्हें दंड से बचने के लिए उल्लंघनों को प्रभावी ढंग से और समय पर रोकना होगा। यह फैसला एक घरेलू खिलौना निर्माता की शिकायत पर आया, जिसने वाइल्डबेरीज़ जैसे प्लेटफॉर्म पर अपने उत्पादों की नकल बिकते पाई थी। इससे साफ है कि रूस अब प्लेटफॉर्मों को केवल तकनीकी मध्यस्थ मानकर छोड़ने को तैयार नहीं, बल्कि उनसे सक्रिय अनुपालन की मांग कर रहा है।
दूसरी ओर, इटली में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए एक अलग किस्म का हस्तक्षेप देखने को मिला। वहां बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं के संघों ने व्यापारिक संगठनों के साथ मिलकर छोटे इलेक्ट्रॉनिक लेन-देन पर कमीशन घटाने का समझौता किया है। खासतौर पर 10 यूरो से कम के भुगतानों पर 'काफी प्रतिस्पर्धी' दरें देने का आग्रह किया गया है, ताकि दुकानदार नकदी के बजाय कार्ड स्वीकार करने को प्रोत्साहित हों। यह पहल यूरोपीय संघ की उस व्यापक रणनीति से मेल खाती है, जो डिजिटल भुगतान की लागत को कम करके छोटे व्यापारियों और ग्राहकों दोनों को लाभ पहुंचाना चाहती है।
ये दोनों घटनाक्रम वैश्विक स्तर पर प्लेटफॉर्म अर्थव्यवस्था के नियमन की बदलती दिशा को रेखांकित करते हैं। रूस का कदम चीन के ई-कॉमर्स कानूनों की याद दिलाता है, जहां एल्गोरिदमिक पारदर्शिता और विक्रेता संरक्षण पर जोर है, जबकि इटली का समझौता यूरोपीय संघ के डिजिटल भुगतान पैकेज की भावना के अनुरूप है। भारत जैसे दक्षिण एशियाई बाजारों के लिए ये संकेत महत्वपूर्ण हैं। भारत में ई-कॉमर्स नियमों के तहत गहरी छूट और निजी लेबल को लेकर पहले ही बहस छिड़ी है, और यूपीआई जैसे डिजिटल भुगतान माध्यमों पर शून्य एमडीआर की नीति छोटे कारोबारियों के लिए राहत लेकर आई है।
आगे देखें तो रूसी प्रस्ताव के कानून बनने पर वाइल्डबेरीज़ और ओज़ोन जैसे दिग्गजों को अपने एल्गोरिदम और शिकायत प्रणाली में बुनियादी बदलाव करने होंगे। इटली में समझौते की सफलता इस पर निर्भर करेगी कि बैंक वास्तव में कितनी आक्रामक दरें पेश करते हैं। भारत के लिए सबक यह है कि प्लेटफॉर्म की जवाबदेही और डिजिटल भुगतान की सुलभता के बीच संतुलन बनाना ही दीर्घकालिक डिजिटल अर्थव्यवस्था की कुंजी है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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Russia is preparing fines of up to 400,000 rubles for marketplaces that exert price pressure on sellers. The Constitutional Court has also ruled that platforms must actively block suspected counterfeit listings, not merely forward complaints. These measures tighten accountability for digital platforms toward both sellers and buyers.
In Italy, banks and payment service providers are being encouraged to offer lower fees for small electronic transactions, especially those under 10 euros. The move aims to boost digital payments and support small merchants by cutting acceptance costs.
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