
स्पेसएक्स के शेयरों में लगातार तीसरे दिन गिरावट, मस्क की संपत्ति 350 अरब डॉलर घटी
रिकॉर्ड आईपीओ के बाद स्पेसएक्स के शेयर 16% टूटे, कंपनी ने पहली बार बॉन्ड जारी करने की घोषणा की और नकदी 100.8 अरब डॉलर बताई।
सोमवार को स्पेसएक्स के शेयर 16.4% गिरकर 154.60 डॉलर पर बंद हुए, जो 12 जून को आईपीओ के पहले दिन के बंद भाव 160 डॉलर से नीचे है। 16 जून को 225.64 डॉलर के शिखर से अब तक 31% से अधिक की गिरावट आ चुकी है, जिससे कंपनी का बाजार पूंजीकरण लगभग 2.99 ट्रिलियन डॉलर से घटकर 2 ट्रिलियन डॉलर पर आ गया है। एलन मस्क की अनुमानित निजी संपत्ति 1.45 ट्रिलियन डॉलर से 1.1 ट्रिलियन डॉलर रह गई, हालांकि वे अब भी दुनिया के इकलौते ट्रिलियनेयर बने हुए हैं।
इस बिकवाली के पीछे कई कारक हैं। स्पेसएक्स ने पहली बार निवेश-ग्रेड बॉन्ड जारी करने की योजना की पुष्टि की, जिससे कम से कम 20 अरब डॉलर जुटाने का लक्ष्य है। यह राशि मुख्यतः एक ब्रिज लोन को चुकाने के लिए है, जो फरवरी में xAI के अधिग्रहण के लिए लिया गया था। साथ ही, MSCI ने कंपनी को ESG पैमाने पर सबसे निचली CCC रेटिंग दी, जिससे पर्यावरणीय और शासन जोखिमों को लेकर चिंता बढ़ी। आईपीओ के बाद शुरुआती तेजी में खुदरा निवेशकों की भारी भागीदारी थी—कुल शेयरों का केवल 4.2% ही कारोबार के लिए उपलब्ध था—लेकिन अब मुनाफावसूली हावी हो गई है।
अमेरिकी बाजारों में इस गिरावट का असर व्यापक तकनीकी शेयरों पर भी पड़ा। नैस्डैक कंपोजिट 1.3% टूटा, अल्फाबेट के शेयर एक साल से अधिक की सबसे बड़ी दैनिक गिरावट दर्ज कर गए। यूरोपीय विश्लेषकों ने इसे 'पहले से कीमत में शामिल सकारात्मक परिणाम' वाली सोच से जोड़ा, जबकि स्विसकोट के विश्लेषक ने स्पेसएक्स को संभावित 'मीम स्टॉक' करार दिया। दूसरी ओर, अमेरिका-ईरान शांति वार्ता में प्रगति से कच्चे तेल की कीमतें 3% तक गिरीं, जिससे मुद्रास्फीति के दबाव में कमी की उम्मीद बढ़ी है। भारतीय संदर्भ में, वैश्विक तकनीकी शेयरों में यह उतार-चढ़ाव आईटी क्षेत्र की कंपनियों के मूल्यांकन को प्रभावित कर सकता है, हालांकि प्रत्यक्ष जोखिम सीमित है।
आगे की राह में स्पेसएक्स के बॉन्ड इश्यू की अंतिम शर्तों का निर्धारण बाजार की नब्ज पर निर्भर करेगा। अगस्त-सितंबर में लॉक-अप अवधि समाप्त होने पर बड़ी मात्रा में शेयर बिक्री के लिए खुल सकते हैं, जिससे कीमतों पर और दबाव पड़ने की आशंका है। वृहद आर्थिक मोर्चे पर, बृहस्पतिवार को आने वाला अमेरिकी पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर (PCE) डेटा फेडरल रिजर्व की मुद्रास्फीति संबंधी सख्ती की उम्मीदों को परखेगा। बाजार फिलहाल सितंबर में 25 आधार अंकों की दर वृद्धि की संभावना तय कर रहे हैं।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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Jio IPO दाखिल करने से रिलायंस के शेयरों में तेजी आई है, जो भारत की अब तक की सबसे बड़ी सार्वजनिक पेशकश का संकेत है। इसे एक रणनीतिक मूल्य अनलॉक के रूप में देखा जा रहा है जो समूह की आय को दोगुना करेगा और दूरसंचार इकाई को वैश्विक दिग्गजों की बराबरी करने वाली बाजार पूंजीकरण वाली राष्ट्रीय चैंपियन के रूप में स्थापित करेगा।
Jio IPO को एक अरबपति के लिए और भी अधिक धन जमा करने का एक और तंत्र बताया जा रहा है, जो सार्वजनिक बाजारों से अरबों रुपये निकाल रहा है जबकि लाखों भारतीय डिजिटल असमानता का सामना कर रहे हैं। यह धन के बढ़ते संकेंद्रण पर चेतावनी देता है और सवाल उठाता है कि क्या ऐसी विशाल पेशकशें वास्तव में आम भलाई के लिए काम करती हैं।
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