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यूक्लिड टेलीस्कोप ने आकाशगंगा के केंद्र का अब तक का सबसे बड़ा चित्र खींचा, 6 करोड़ तारे एक फ्रेम में

यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के यूक्लिड मिशन ने मार्च 2025 में मात्र 26 घंटों में आकाशगंगा के चमकीले केंद्र का मोज़ेक तैयार किया, जो एक्सोप्लैनेट खोज की माइक्रोलेंसिंग तकनीक के लिए नया आधार बनेगा।

यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ईएसए) के यूक्लिड अंतरिक्ष टेलीस्कोप ने 23 मार्च 2025 को आकाशगंगा (मिल्की वे) के केंद्रीय बल्ज क्षेत्र का अब तक का सबसे बड़ा और विस्तृत दृश्य-प्रकाश चित्र खींचा। 26 घंटे के अवलोकन में नौ अलग-अलग फ्रेम से बने इस मोज़ेक में 6 करोड़ से अधिक तारे, नीहारिकाएं और तारा समूह कैद हुए। यह क्षेत्र इतना चमकीला और सघन है कि सामान्यतः अलग-अलग तारों को पहचानना कठिन होता है, लेकिन यूक्लिड के संवेदनशील कैमरे ने बिना संतृप्त हुए यह जानकारी जुटाई।

यह उपलब्धि यूक्लिड के मुख्य मिशन—डार्क मैटर और डार्क एनर्जी के लिए ब्रह्मांड की बड़े पैमाने की संरचना का मानचित्रण—का एक सह-उत्पाद है। खगोलविदों के विशेष अनुरोध पर टेलीस्कोप ने एक दिन के लिए दूरस्थ आकाशगंगाओं से नज़र हटाकर हमारी अपनी आकाशगंगा के अत्यंत चमकीले आंतरिक भाग की ओर रुख किया। इस दौरान इन्फ्रारेड कैमरे को बंद रखना पड़ा ताकि अति-संवेदनशील सेंसर स्थायी रूप से प्रभावित न हों। इटली के राष्ट्रीय खगोरभौतिकी संस्थान (आईएनएएफ) और अंतरिक्ष एजेंसी एएसआई ने दृश्य-प्रकाश उपकरण (वीआईएस) के नियंत्रण इलेक्ट्रॉनिक्स के हार्डवेयर व सॉफ्टवेयर के डिजाइन और निर्माण में केंद्रीय भूमिका निभाई।

इस छवि का वैज्ञानिक महत्व माइक्रोलेंसिंग नामक तकनीक में निहित है, जो गुरुत्वाकर्षण लेंसिंग का एक सूक्ष्म रूप है। जब कोई तारा किसी दूसरे तारे के सामने से गुज़रता है, तो निकट वाला तारा एक ब्रह्मांडीय आवर्धक कांच की तरह पीछे के तारे के प्रकाश को मोड़ता और चमकीला करता है। यदि आगे वाले तारे के इर्द-गिर्द कोई ग्रह परिक्रमा कर रहा हो, तो उसका गुरुत्व भी प्रकाश में अत्यंत सूक्ष्म अनियमितता उत्पन्न करता है, जिससे ग्रह की उपस्थिति और द्रव्यमान का पता चलता है। पिछले 20 वर्षों में इसी विधि से लगभग 300 एक्सोप्लैनेट खोजे जा चुके हैं, सभी पृथ्वी-आधारित टेलीस्कोपों से और सभी आकाशगंगा के केंद्र की ओर। यूक्लिड की इस एकल छवि में 51 ज्ञात ग्रहीय प्रणालियां शामिल हैं, जिनमें एक ऐसा ग्रह भी है जो दो तारों की परिक्रमा करता है।

यूक्लिड की क्षमता का अंदाज़ा इस तुलना से लगता है: इसकी तीक्ष्णता और संवेदनशीलता हबल स्पेस टेलीस्कोप के वाइड-फील्ड कैमरे जैसी है, लेकिन यह कुछ घंटों में हबल के दृश्य-क्षेत्र से 270 गुना बड़ा क्षेत्र कवर कर लेता है। हवाई स्थित केक वेधशाला को इतना ही मोज़ेक तैयार करने में लगभग 2,000 घंटे लगते। यूक्लिड उन धुंधले तारों का विवरण भी पकड़ लेता है जो ज़मीन से अवलोकन में खो जाते।

इस छवि का चयनित आकाश-खंड वही है जिसकी निगरानी भविष्य का नैन्सी ग्रेस रोमन स्पेस टेलीस्कोप एक्सोप्लैनेट खोज के लिए करेगा। यूक्लिड का यह डेटा रोमन के अवलोकनों की योजना और तुलनात्मक अध्ययन का आधार बनेगा। फिलहाल, यूक्लिड एल2 लैग्रेंज बिंदु पर स्थित है और अपने छह-वर्षीय मिशन के तहत संपूर्ण आकाश के एक-तिहाई भाग का मानचित्रण जारी रखेगा, जिससे डार्क यूनिवर्स के रहस्यों के साथ-साथ हमारी अपनी आकाशगंगा के हृदय में छिपे ग्रहों की दुनिया पर भी रोशनी पड़ेगी।

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यूक्लिड टेलीस्कोप ने आकाशगंगा के केंद्र का अब तक का सबसे बड़ा चित्र खींचा, 6 करोड़ तारे एक फ्रेम में

यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के यूक्लिड मिशन ने मार्च 2025 में मात्र 26 घंटों में आकाशगंगा के चमकीले केंद्र का मोज़ेक तैयार किया, जो एक्सोप्लैनेट खोज की माइक्रोलेंसिंग तकनीक के लिए नया आधार बनेगा।

यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ईएसए) के यूक्लिड अंतरिक्ष टेलीस्कोप ने 23 मार्च 2025 को आकाशगंगा (मिल्की वे) के केंद्रीय बल्ज क्षेत्र का अब तक का सबसे बड़ा और विस्तृत दृश्य-प्रकाश चित्र खींचा। 26 घंटे के अवलोकन में नौ अलग-अलग फ्रेम से बने इस मोज़ेक में 6 करोड़ से अधिक तारे, नीहारिकाएं और तारा समूह कैद हुए। यह क्षेत्र इतना चमकीला और सघन है कि सामान्यतः अलग-अलग तारों को पहचानना कठिन होता है, लेकिन यूक्लिड के संवेदनशील कैमरे ने बिना संतृप्त हुए यह जानकारी जुटाई।

यह उपलब्धि यूक्लिड के मुख्य मिशन—डार्क मैटर और डार्क एनर्जी के लिए ब्रह्मांड की बड़े पैमाने की संरचना का मानचित्रण—का एक सह-उत्पाद है। खगोलविदों के विशेष अनुरोध पर टेलीस्कोप ने एक दिन के लिए दूरस्थ आकाशगंगाओं से नज़र हटाकर हमारी अपनी आकाशगंगा के अत्यंत चमकीले आंतरिक भाग की ओर रुख किया। इस दौरान इन्फ्रारेड कैमरे को बंद रखना पड़ा ताकि अति-संवेदनशील सेंसर स्थायी रूप से प्रभावित न हों। इटली के राष्ट्रीय खगोरभौतिकी संस्थान (आईएनएएफ) और अंतरिक्ष एजेंसी एएसआई ने दृश्य-प्रकाश उपकरण (वीआईएस) के नियंत्रण इलेक्ट्रॉनिक्स के हार्डवेयर व सॉफ्टवेयर के डिजाइन और निर्माण में केंद्रीय भूमिका निभाई।

इस छवि का वैज्ञानिक महत्व माइक्रोलेंसिंग नामक तकनीक में निहित है, जो गुरुत्वाकर्षण लेंसिंग का एक सूक्ष्म रूप है। जब कोई तारा किसी दूसरे तारे के सामने से गुज़रता है, तो निकट वाला तारा एक ब्रह्मांडीय आवर्धक कांच की तरह पीछे के तारे के प्रकाश को मोड़ता और चमकीला करता है। यदि आगे वाले तारे के इर्द-गिर्द कोई ग्रह परिक्रमा कर रहा हो, तो उसका गुरुत्व भी प्रकाश में अत्यंत सूक्ष्म अनियमितता उत्पन्न करता है, जिससे ग्रह की उपस्थिति और द्रव्यमान का पता चलता है। पिछले 20 वर्षों में इसी विधि से लगभग 300 एक्सोप्लैनेट खोजे जा चुके हैं, सभी पृथ्वी-आधारित टेलीस्कोपों से और सभी आकाशगंगा के केंद्र की ओर। यूक्लिड की इस एकल छवि में 51 ज्ञात ग्रहीय प्रणालियां शामिल हैं, जिनमें एक ऐसा ग्रह भी है जो दो तारों की परिक्रमा करता है।

यूक्लिड की क्षमता का अंदाज़ा इस तुलना से लगता है: इसकी तीक्ष्णता और संवेदनशीलता हबल स्पेस टेलीस्कोप के वाइड-फील्ड कैमरे जैसी है, लेकिन यह कुछ घंटों में हबल के दृश्य-क्षेत्र से 270 गुना बड़ा क्षेत्र कवर कर लेता है। हवाई स्थित केक वेधशाला को इतना ही मोज़ेक तैयार करने में लगभग 2,000 घंटे लगते। यूक्लिड उन धुंधले तारों का विवरण भी पकड़ लेता है जो ज़मीन से अवलोकन में खो जाते।

इस छवि का चयनित आकाश-खंड वही है जिसकी निगरानी भविष्य का नैन्सी ग्रेस रोमन स्पेस टेलीस्कोप एक्सोप्लैनेट खोज के लिए करेगा। यूक्लिड का यह डेटा रोमन के अवलोकनों की योजना और तुलनात्मक अध्ययन का आधार बनेगा। फिलहाल, यूक्लिड एल2 लैग्रेंज बिंदु पर स्थित है और अपने छह-वर्षीय मिशन के तहत संपूर्ण आकाश के एक-तिहाई भाग का मानचित्रण जारी रखेगा, जिससे डार्क यूनिवर्स के रहस्यों के साथ-साथ हमारी अपनी आकाशगंगा के हृदय में छिपे ग्रहों की दुनिया पर भी रोशनी पड़ेगी।

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