
मध्य अफ्रीकी गणराज्य में हैजा प्रकोप: 24 मौतें, वैश्विक यात्रा स्वास्थ्य चेतावनियाँ
अफ्रीका में हैजा, इबोला और अमेरिका में खसरा-पीत ज्वर के प्रकोप के बीच नाइजीरिया ने सीमा निगरानी कड़ी की, रूसी विशेषज्ञ ने विदेश यात्रा से बचने की सलाह दी।
मध्य अफ्रीकी गणराज्य (सीएआर) के स्वास्थ्य मंत्री पियरे सोमसे ने 26 जून 2026 को राजधानी बांगुई के दक्षिण-पश्चिम में स्थित बिम्बो और म्बाइकी स्वास्थ्य जिलों में हैजा प्रकोप की पुष्टि की। 197 पुष्ट मामलों में से 24 मौतें दर्ज की गईं, जिससे मृत्यु दर 12.2 प्रतिशत रही। यह देश का पाँचवाँ प्रकोप है; 2016 में हुए पिछले प्रकोप में 500 से अधिक संक्रमण और 23 मौतें हुई थीं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, हैजा वर्तमान में 14 अफ्रीकी देशों में फैला हुआ है, जिसमें पड़ोसी कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में इस वर्ष 21,000 मामले और 726 मौतें सर्वाधिक हैं।
यह प्रकोप जल-जनित जीवाणु से होता है और दूषित भोजन या पानी से फैलता है। सीएआर सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में रोकथाम के उपाय लागू कर दिए हैं और आस-पास के शहरों में भी कदम उठाए जा रहे हैं। मंत्री ने बताया कि अस्पताल में भर्ती मरीजों में कोई मौत नहीं हुई, जो त्वरित चिकित्सा सहायता का संकेत है। साथ ही, सीएआर ने पड़ोसी कांगो में घातक इबोला प्रकोप के मद्देनज़र अलर्ट जारी कर रखा है।
वैश्विक स्तर पर, रूसी महामारी विज्ञानी गेनाडी ओनिश्चेंको ने रूसी नागरिकों को अफ्रीका में इबोला और एशिया में मारबर्ग वायरस के जोखिम तथा उपोष्णकटिबंधीय जलवायु के स्वास्थ्य प्रभावों का हवाला देते हुए विदेश यात्रा न करने की सलाह दी। रूस में अप्रैल 2025 में भारत से लौटे दो यात्रियों में हैजा के मामले सामने आए थे। कोलंबिया के स्वास्थ्य मंत्रालय ने पीत ज्वर के प्रकोप (201 मामले, 89 मौतें) के चलते यात्रियों को 10 दिन पूर्व टीकाकरण की सलाह दी, जबकि पैन अमेरिकन हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन ने 2026 में अमेरिका में 20,000 से अधिक खसरा मामलों और 25 मौतों की पुष्टि की, जो विश्व कप जैसे आयोजनों के दौरान उच्च संचरण जोखिम पैदा कर सकता है।
नाइजीरिया रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) ने इबोला तैयारियाँ तेज़ कर दी हैं, हालाँकि देश में कोई मामला नहीं है। एनसीडीसी ने अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों वाले पाँच राज्यों में प्रवेश बिंदुओं पर निगरानी बढ़ाई है, यात्रियों के लिए स्वास्थ्य घोषणा पत्र अनिवार्य किया है और प्रयोगशालाओं व आइसोलेशन केंद्रों का आकलन किया है। इबोला तैयारी के लिए 78.53 करोड़ नायरा की आपात स्वीकृति दी गई, लेकिन कई सुविधाएँ जीर्ण-शीर्ण पाई गईं। हैजा पर एनसीडीसी ने बताया कि बोर्नो राज्य को छोड़कर अधिकांश प्रभावित राज्यों में मृत्यु दर एक प्रतिशत से नीचे आ गई है; बोर्नो में खराब जल आपूर्ति और स्वच्छता को उच्च मृत्यु दर का कारण बताया गया।
सीएआर प्रशासन प्रकोप के स्रोत की जाँच कर रहा है और पूर्ण रोकथाम के लिए जनता से स्वास्थ्य दिशानिर्देशों का पालन करने का आग्रह कर रहा है। अगला ध्यान देने योग्य कदम सीमा पार संचरण को सीमित करने के लिए क्षेत्रीय समन्वय और आगामी डब्ल्यूएचओ स्थिति रिपोर्ट होगी, जो वैश्विक हैजा नियंत्रण रणनीति को दिशा दे सकती है।
| रूसी और सीआईएस प्रेस | −0.40 | critical |
|---|---|---|
| उप-सहारा अफ़्रीकी प्रेस | 0.00 | neutral |
The cholera outbreak in the Central African Republic is proof of the failure of the Western-led world order, which abandons the most fragile countries while imposing sanctions and interference.
The cause of the crisis is attributed to external factors (the West) rather than local responsibilities, shifting moral judgment onto a geopolitical adversary.
Cholera in the Central African Republic is a health emergency requiring immediate resources and structural reforms, not a pretext for geopolitical polemics.
The political dimension of the story is downplayed by treating it as a recurring event in Africa, shifting focus to technical and local solutions.
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