
होर्मुज़ तनाव और बहरीन पर ड्रोन हमले से खाड़ी में अस्थिरता, युद्धविराम समझौते पर संकट
अमेरिकी हवाई हमलों, ईरानी जवाबी कार्रवाई और बहरीन की संप्रभुता के उल्लंघन के बाद क्षेत्रीय शक्तियों ने तेहरान की निंदा की, जबकि कूटनीतिक वार्ता जारी रहने की उम्मीद है।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य में एक वाणिज्यिक जहाज़ पर ईरानी ड्रोन हमले के बाद अमेरिका ने ईरानी तट पर सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए, जिसके प्रत्युत्तर में ईरान के सैन्य प्रतिष्ठान ने क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया। इसी दौरान बहरीन ने घोषणा की कि उसकी धरती पर कई ईरानी ड्रोन से हमला हुआ, जिसे उसने अपनी संप्रभुता का स्पष्ट उल्लंघन बताया और आत्मरक्षा का पूर्ण अधिकार सुरक्षित रखा।
वाशिंगटन के अनुसार, सिंगापुर के ध्वज वाले व्यापारिक पोत पर ड्रोन हमला 17 जून को हस्ताक्षरित ‘इस्लामाबाद याददाश्त तफ़हम’ का उल्लंघन था, जिसके तहत दोनों पक्षों ने स्थायी युद्धविराम और क्षेत्रीय संप्रभुता के सम्मान का वचन दिया था। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने कहा कि यदि तेहरान को समझौते के क्रियान्वयन पर कोई आपत्ति है तो वह फ़ोन उठा सकता है, लेकिन ‘हिंसा का जवाब हिंसा से दिया जाएगा।’ वहीं ईरानी विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी हमलों को संयुक्त राष्ट्र चार्टर और याददाश्त का घोर उल्लंघन बताते हुए अपनी कार्रवाई को रक्षात्मक बताया।
खाड़ी देशों और अरब जगत ने बहरीन पर हमले की कड़ी निंदा की। सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, मिस्र, जॉर्डन, कुवैत और क़तर ने अलग-अलग बयानों में इसे बहरीन की संप्रभुता का उल्लंघन और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए ख़तरा बताया। खाड़ी सहयोग परिषद ने भी इस हमले को शांति प्रयासों को कमज़ोर करने वाला क़दम क़रार दिया। बहरीन, जो अमेरिकी नौसेना के पाँचवें बेड़े की मेज़बानी करता है, ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से हमलावर को जवाबदेह ठहराने की माँग की और कहा कि तेहरान का यह रवैया क्षेत्र में अराजकता फैलाने की नीति को दर्शाता है।
इन घटनाक्रमों ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य से मुक्त आवाजाही पर नए सिरे से प्रश्नचिह्न लगा दिया है, जहाँ से वैश्विक तेल और एलएनजी का पाँचवाँ हिस्सा गुज़रता है। दक्षिण एशियाई दृष्टिकोण से, भारत अपनी ऊर्जा आपूर्ति के लिए इसी मार्ग पर निर्भर है, ऐसे में लंबित अस्थिरता उसकी आयात लागत और ऊर्जा सुरक्षा को प्रभावित कर सकती है। अमेरिकी सेन्ट्रल कमान ने वाणिज्यिक नौवहन की सुरक्षा सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता दोहराई, जबकि ईरान ने जलडमरूमध्य के प्रबंधन को अपने और ओमान के अधिकार क्षेत्र में बताया तथा खाड़ी देशों को वाशिंगटन के साथ खड़े होने के प्रति आगाह किया।
फ़िलहाल कूटनीतिक मार्ग पूरी तरह बंद नहीं हुआ है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, तकनीकी वार्ता का अगला दौर अगले सप्ताह स्विट्ज़रलैंड में प्रस्तावित है, जिसका उद्देश्य याददाश्त तफ़हम के क्रियान्वयन पर बनी असहमतियों को सुलझाना है। इस बीच बहरीन ने अंतरराष्ट्रीय क़ानून के तहत अपनी सुरक्षा के लिए क़दम उठाने का संकेत दिया है, जिससे टकराव के नए मोर्चे खुलने की आशंका बनी हुई है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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बहरीन का ईरानी ड्रोन हमले का आरोप निराधार बताया गया है, जबकि तेहरान ने क्षेत्र में अमेरिकी-संबंधित ठिकानों पर हमलों की जिम्मेदारी ली है। युद्धविराम संकट को अमेरिकी दबाव का परिणाम बताया गया है, न कि खाड़ी पड़ोसी के खिलाफ ईरानी आक्रामकता।
ईरान ने बहरीन पर ड्रोन हमला किया, उसकी संप्रभुता का उल्लंघन किया, और होर्मुज जलडमरूमध्य में एक वाणिज्यिक जहाज पर हमला किया। अमेरिका ने ईरानी मिसाइल और रडार स्थलों पर हवाई हमलों से जवाब दिया, जबकि उपराष्ट्रपति वेंस ने चेतावनी दी कि हिंसा का जवाब हिंसा से दिया जाएगा। ईरानी आक्रामकता के कारण नाजुक युद्धविराम खतरे में है, जिसकी अरब देशों ने व्यापक निंदा की है।
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