
जर्मनी-अमेरिका टॉमहॉक मिसाइल समझौता: यूरोपीय रक्षा में नया अध्याय
जर्मन चांसलर ने अंकारा नाटो शिखर सम्मेलन के इतर हुए इस सौदे को रणनीतिक अंतराल भरने वाला कदम बताया, जिसके तहत जर्मनी अपनी धरती पर लंबी दूरी की मिसाइलें तैनात करेगा।
जर्मनी और अमेरिका के बीच टॉमहॉक क्रूज मिसाइलों की खरीद को लेकर समझौता हो गया है। जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मेर्ज ने 9 जुलाई को बुंडेसटाग में यह घोषणा करते हुए बताया कि यह सौदा अंकारा में नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान तय हुआ। उन्होंने कहा कि इससे जर्मनी की रक्षा की एक अहम रणनीतिक कमी दूर होगी। सरकारी सूत्रों के अनुसार, अमेरिका अगस्त में निर्यात लाइसेंस जारी करेगा और जर्मनी जमीन से प्रक्षेपित किए जाने वाले टाइफॉन लॉन्चरों के साथ इन मिसाइलों को अपने यहां तैनात करेगा। मिसाइलों और लॉन्चरों की संख्या गोपनीय रखी गई है, और इस सौदे में अमेरिकी सैन्यकर्मियों की तैनाती शामिल नहीं है।
जर्मन सरकार के अनुसार, यह कदम रूस द्वारा कलिनिनग्राद में तैनात इस्कंदर मिसाइलों से उत्पन्न खतरे के मद्देनजर उठाया गया है, जो बर्लिन से लगभग 500 किलोमीटर दूर हैं और यूरोपीय लक्ष्यों को भेद सकती हैं। अमेरिकी प्रशासन ने इस सौदे को यूरोपीय सहयोगियों द्वारा अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी लेने और अमेरिकी हथियार खरीदने की नीति के अनुरूप बताया है। वहीं, नाटो के यूरोपीय सदस्य देश लंबी अवधि में अमेरिकी निर्भरता कम करने के लिए 50 अरब यूरो के निवेश से अपनी स्वदेशी लंबी दूरी की मिसाइल प्रणाली विकसित करने पर सहमत हुए हैं, जिसका आधा खर्च जर्मनी वहन करेगा।
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, 2,550 किलोमीटर तक की मारक क्षमता वाली टॉमहॉक मिसाइलें जर्मनी से रूस के भीतरी इलाकों तक निशाना साध सकती हैं, जिससे यूरोपीय प्रतिरोधक क्षमता में गुणात्मक बढ़ोतरी होगी। हालांकि, पश्चिमी विश्लेषक यह भी मानते हैं कि इस तैनाती से रूस के साथ तनाव बढ़ सकता है। यह समझौता पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन के उस प्रस्ताव का स्थान लेता है जिसमें 2026 से अमेरिकी संचालित टॉमहॉक जर्मनी में तैनात की जानी थीं, लेकिन ट्रंप प्रशासन ने उसे रद्द कर दिया था।
अंकारा शिखर सम्मेलन के दौरान मेर्ज ने नाटो की एकजुटता की सराहना की, हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की स्पेन पर टिप्पणियों और ग्रीनलैंड पर दावे से बैठक प्रभावित हुई। जर्मनी ने यह भी घोषणा की कि वह सकल घरेलू उत्पाद के पांच प्रतिशत रक्षा व्यय के लक्ष्य को तय समय से काफी पहले हासिल कर लेगा। अगले चरण में अगस्त में निर्यात अनुमति मिलने के बाद मिसाइलों की आपूर्ति की प्रक्रिया शुरू होगी, जबकि यूरोपीय स्वदेशी प्रणाली का विकास कार्य जारी रहेगा।
| रूसी और सीआईएस प्रेस | −0.30 | critical |
|---|---|---|
| महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस | +0.80 | aligned |
| भारतीय और दक्षिण एशियाई प्रेस | +0.20 | neutral |
जर्मनी अमेरिका के साथ संरेखित होता है, लेकिन रूस सावधानी से देखता है।
पश्चिमी स्रोतों के चयनात्मक उद्धरण यह संकेत देते हैं कि यह सौदा अमेरिका में भी विवादास्पद था, जिससे इसकी बुद्धिमत्ता पर संदेह पैदा होता है।
जर्मन सरकार के उत्सवपूर्ण लहजे और नाटो सहयोगियों के सौदे के समर्थन को छोड़ दिया गया है।
जर्मनी यूरोपीय रक्षा का नेतृत्व लेता है, ऐसी मिसाइलें खरीदता है जो रूस के दिल पर हमला करती हैं।
अतिशयोक्तिपूर्ण भाषा ('एंटी-पुतिन-राकेटन') सौदे को एक खतरे की आवश्यक प्रतिक्रिया के रूप में प्रस्तुत करती है, जिससे हथियारों की दौड़ को वैधता मिलती है।
पहले की अमेरिकी हिचकिचाहट और संभावित रूसी प्रतिक्रिया को छोड़ दिया गया है, केवल रणनीतिक लाभ पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
भारत इस सौदे को एक तकनीकी-सैन्य तथ्य के रूप में दर्ज करता है, बिना किसी पक्ष के संरेखित हुए।
एक तटस्थ और तथ्यात्मक लहजा और ऐतिहासिक संदर्भ (ईरान युद्ध) कहानी को राजनीतिकरण से मुक्त करता है, इसे एक नियमित हथियार लेनदेन के रूप में प्रस्तुत करता है।
नाटो शिखर सम्मेलन का राजनीतिक संदर्भ और सौदे के आसपास का विवाद, साथ ही अन्य गुटों के उत्सवपूर्ण या आलोचनात्मक लहजे को छोड़ दिया गया है।
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