
यूक्रेनी ड्रोन हमलों से रूस का पेट्रोल उत्पादन मांग के 65% पर, ईंधन संकट गहराया
रूस की प्रमुख रिफाइनरियों पर हमलों के बाद दैनिक 40-45 हजार टन की कमी, सरकार ने डीज़ल-पेट्रोल निर्यात पर रोक लगाई और बेलारूस-भारत से आयात बढ़ाया।
रूस में पेट्रोल उत्पादन गर्मियों की औसत मांग के मुकाबले घटकर लगभग 65 प्रतिशत रह गया है। यूक्रेनी ड्रोन हमलों के कारण कई बड़ी रिफाइनरियों का संचालन ठप होने से दैनिक आपूर्ति में 40 से 45 हजार टन की कमी आई है, जो कुल जरूरत का लगभग 35 प्रतिशत है। देश के अधिकांश क्षेत्रों में पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें और कुछ जगहों पर ईंधन की अनुपलब्धता देखी जा रही है।
10 जुलाई को यूक्रेन ने क्रास्नोदार की इल्स्की रिफाइनरी, लेनिनग्राद के उस्त-लुगा कॉम्प्लेक्स और रोस्तोव के तेल टर्मिनल व भंडारण केंद्र पर ड्रोन हमले किए। आज़ोव सागर में दस टैंकरों को भी निशाना बनाया गया। इससे पहले ही नॉरसी, ओम्स्क और सारातोव जैसी शीर्ष रिफाइनरियां क्षतिग्रस्त होकर बंद हो चुकी थीं। रूसी उप-प्रधानमंत्री अलेक्ज़ांदर नोवाक ने स्वीकार किया कि ड्रोन “हमलों” के कारण संयंत्र मरम्मत के लिए बंद हो रहे हैं और बाज़ार में कमी है।
संकट से निपटने के लिए सरकार ने डीज़ल, पेट्रोल और विमान ईंधन के निर्यात पर अस्थायी रोक लगा दी है। बेलारूस से प्रतिदिन 6,000 टन तक पेट्रोल का आयात रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, और भारत से समुद्री मार्ग से पेट्रोल मंगवाया जा रहा है। साथ ही, ईंधन की गुणवत्ता मानकों को घटाकर ‘यूरो-2’ करने और स्वैप संचालन जैसे कदमों पर विचार चल रहा है। काला सागर के अनापा शहर में कोसाक सुरक्षाकर्मी पेट्रोल पंपों पर भीड़ को नियंत्रित कर रहे हैं। राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि यूक्रेन इन हमलों से समाज में घबराहट पैदा करना चाहता है, लेकिन यह असंभव है।
उद्योग सूत्रों के अनुसार, यदि रिफाइनरियों पर नए हमले नहीं होते और आयात बढ़ता है तो जुलाई के दूसरे पखवाड़े में स्थिति में सुधार हो सकता है। हालांकि, यूक्रेनी सेना प्रमुख ओलेक्सांद्र सिर्स्की ने कहा कि युद्ध में निर्णायक मोड़ अभी दूर है, जिससे संकेत मिलता है कि ऊर्जा अवसंरचना पर हमले जारी रह सकते हैं। अगला ध्यान देने योग्य पड़ाव जुलाई के अंत में निर्यात प्रतिबंध की समीक्षा और रिफाइनरी बहाली की गति होगी।
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