
अमेरिका ने पहली बार युद्ध में समुद्री ड्रोन का इस्तेमाल किया, ईरान के बंदर अब्बास नौसैनिक अड्डे पर हमला
अमेरिकी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजरानी पर ईरानी हमलों को रोकने के लिए पहली बार मानवरहित सतही जहाजों से हमला किया, जबकि ट्रंप ने नाकाबंदी और 20% शुल्क की घोषणा की।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने 12 जुलाई को ईरान के बंदर अब्बास नौसैनिक अड्डे पर तीन कोर्सेर समुद्री ड्रोन से हमला किया, जो युद्ध में अमेरिकी मानवरहित सतही जहाजों का पहला प्रयोग है। सेंटकॉम के अनुसार, इस ऑपरेशन में लड़ाकू विमानों, नौसैनिक पोतों और हवाई ड्रोन के साथ दर्जनों अन्य सैन्य ठिकानों—वायु रक्षा प्रणालियों, तटीय रडार, मिसाइल और ड्रोन क्षमताओं—को निशाना बनाया गया। अमेरिकी सेना का कहना है कि इन हमलों का उद्देश्य ईरान की वाणिज्यिक जहाजरानी पर हमले जारी रखने की क्षमता को कम करना था।
वाशिंगटन और तेहरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकाबंदी फिर से लागू करने और होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले सभी माल पर 20% शुल्क लगाने की घोषणा की। ट्रंप ने अमेरिका को 'जलडमरूमध्य का संरक्षक' बताते हुए कहा कि यह मार्ग सभी देशों के लिए खुला रहेगा। दूसरी ओर, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने कुवैत, बहरीन और जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमलों का दावा किया। ईरानी सैन्य प्रवक्ता ने चेतावनी दी कि क्षेत्रीय देशों द्वारा अमेरिका को कोई भी सहयोग या सैन्य समर्थन 'ईरान की संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ युद्ध का कार्य माना जाएगा' और कहा कि यदि युद्ध फैला तो इसकी आग पूरे क्षेत्र को भस्म कर देगी।
होर्मुज जलडमरूमध्य, जिससे युद्ध से पहले वैश्विक कच्चे तेल का पांचवां हिस्सा गुजरता था, में जहाजों की आवाजाही 52% तक गिर गई है। समुद्री ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, रविवार को केवल 14 जहाजों ने इस मार्ग का उपयोग किया। अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (आईएमओ) ने समुद्री खदानों और जहाजों पर हमलों के जोखिम की चेतावनी दी है। ऊर्जा विश्लेषकों के अनुसार, इस व्यवधान से अंतरराष्ट्रीय तेल की कीमतें 79 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं। भारत जैसे दक्षिण एशियाई देशों के लिए, जो अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से आयात करते हैं, आपूर्ति में रुकावट ऊर्जा सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती पैदा कर सकती है और आयात लागत बढ़ा सकती है।
यह सैन्य वृद्धि उस समय हुई जब ट्रंप ने 17 जून को हस्ताक्षरित युद्धविराम रूपरेखा समझौते को ईरान द्वारा जहाजों पर लगातार हमलों का हवाला देते हुए समाप्त कर दिया। सप्ताहांत में अमेरिकी बलों ने लगभग 140 ईरानी सैन्य ठिकानों पर हमले किए, जिसके जवाब में ईरान ने कुवैत, बहरीन, कतर, ओमान और संयुक्त अरब अमीरात में अमेरिकी सहयोगी ठिकानों पर बमबारी की। राजनयिक सूत्रों के अनुसार, हाल के महीनों में तनाव कम करने के प्रयास विफल हो गए हैं। अमेरिकी नाकाबंदी और शुल्क तुरंत प्रभाव से लागू होने की घोषणा की गई है, जबकि ईरान ने किसी भी बाहरी हस्तक्षेप को रोकने के लिए सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दी है। फिलहाल स्थिति अत्यधिक अस्थिर बनी हुई है और कूटनीतिक समाधान की कोई तत्काल संभावना नहीं दिखती।
| लैटिन अमेरिकी प्रेस | 0.00 | neutral |
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| अरब खाड़ी प्रेस | 0.00 | neutral |
| महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस | 0.00 | neutral |
| अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस | 0.00 | neutral |
The United States acted to protect navigation in the Strait of Hormuz, while Iran threatens retaliation against any country that supports the US.
By including Iranian threats and Trump's tariff, the bloc frames the US strike as a necessary response to an imminent danger and economic pressure.
The US strikes targeted Iranian naval capabilities to ensure freedom of navigation in the region.
The bloc presents the event as a straightforward military operation, omitting any broader political context or Iranian perspective.
The United States launched the first attack using one-way attack sea drones against an Iranian port, damaging Iran's ability to target commercial shipping.
The bloc focuses on the technical novelty and the stated military objective, avoiding any judgment or emotional language.
The U.S. military used seaborne drones in combat for the first time, striking an Iranian port facility.
The bloc reports the event as a factual milestone, without adding context or commentary.
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