
2025 में वैश्विक निजी संपत्ति 10.8% बढ़ी, रिकॉर्ड 10 लाख नए डॉलर करोड़पति बने
यूबीएस की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका में 4.4 लाख नए अमीर जुड़े, जबकि भारत में 31 हज़ार से अधिक लोग डॉलर करोड़पति बने।
स्विस बैंक यूबीएस की ग्लोबल वेल्थ रिपोर्ट 2026 के अनुसार, 2025 में वैश्विक निजी संपत्ति में डॉलर के संदर्भ में 10.8% की वृद्धि हुई, जो 2017 के बाद की सबसे तेज़ गति है। इस दौरान दुनिया भर में लगभग 10 लाख नए डॉलर करोड़पति (जिनकी कुल नेटवर्थ 10 लाख डॉलर से अधिक है) जुड़े—यानी हर दिन औसतन 2,600 लोग इस श्रेणी में शामिल हुए। कुल करोड़पतियों की संख्या 5.75 करोड़ तक पहुंच गई।
वृद्धि का मुख्य कारण मज़बूत वित्तीय बाज़ार और अचल संपत्ति जैसी गैर-वित्तीय परिसंपत्तियों के मूल्य में उछाल रहा। क्षेत्रीय रूप से, यूरोप, मध्य-पूर्व और अफ्रीका (EMEA) में संपत्ति 17.5% बढ़ी, जिसे डॉलर के कमज़ोर होने से भी बल मिला। अमेरिका में 8.5% और एशिया-प्रशांत में 5.9% की वृद्धि दर्ज की गई। अमेरिका ने अकेले 4.41 लाख नए करोड़पति जोड़े, जो वैश्विक वृद्धि का लगभग आधा है। भारत में 31,033 नए डॉलर करोड़पति बने, जिससे देश में इनकी कुल संख्या लगभग 9.44 लाख हो गई। प्रतिशत वृद्धि के हिसाब से लिथुआनिया (8%), तुर्की (6.4%) और लातविया (5.7%) शीर्ष पर रहे।
रिपोर्ट संपत्ति के बढ़ते केंद्रीकरण को भी रेखांकित करती है। 2020 के बाद से अधिकांश देशों में मीडियन संपत्ति (जनसंख्या के बीच के व्यक्ति की संपत्ति) में गिरावट आई है, जबकि 50 लाख डॉलर से अधिक की संपत्ति वालों की दौलत तेज़ी से बढ़ी। वैश्विक अरबपतियों की संख्या 13.1% बढ़कर 3,302 हो गई, जिनमें अमेरिका में 1,000 से अधिक, चीन में 562 और भारत में 211 शामिल हैं। ब्राज़ील 0.81 के गिनी गुणांक के साथ दुनिया में चौथी सबसे अधिक संपत्ति असमानता वाला देश बना रहा।
भारत के संदर्भ में, 31 हज़ार से अधिक नए करोड़पतियों के बावजूद, देश की कुल वयस्क आबादी का एक बड़ा हिस्सा अभी भी 10,000 डॉलर से कम की संपत्ति श्रेणी में है। रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि डॉलर करोड़पति होने का अर्थ बैंक में नकद राशि नहीं, बल्कि आवासीय संपत्ति सहित कुल परिसंपत्तियों का मूल्य है। यूबीएस का यह वार्षिक आकलन 56 बाज़ारों को कवर करता है और अगली रिपोर्ट में 2026 के रुझान सामने आएंगे, जो वैश्विक संपत्ति वितरण की निरंतर निगरानी का आधार बनेगी।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
2 संपादकीय समूह · 2 भाषाएँ
The increase of one million millionaires in a year is read as a symptom of worsening structural inequality. Wealth concentrates in few hands while Latin American majorities remain excluded from the benefits of global growth. The figure is not cause for celebration but a warning for redistributive policies.
The increase in the number of millionaires is presented as an economic fact without moral judgment. The focus is on market stability and the ability to generate wealth, in line with a narrative that prioritizes national growth and economic sovereignty. Inequalities are not emphasized; instead, the system's resilience is highlighted.
अपना नज़रिया बढ़ाएँ
अली ख़ामेनेई का सप्ताहव्यापी अंतिम संस्कार शुरू: ईरान की शक्ति प्रदर्शन की कोशिश, नए नेतृत्व पर सवाल
11 भाषाएँ · 44 स्रोत
Technology सेएआई युग में मानवीय कौशल और बाल सुरक्षा की नई चुनौतियाँ
8 भाषाएँ · 12 स्रोत
Science & Health सेकांगो में इबोला से 473 मौतें, WHO ने बुंडीबुग्यो वायरस के पहले आणविक परीक्षण को मंजूरी दी
3 भाषाएँ · 5 स्रोत