
IBM ने पेश की 0.7 नैनोमीटर चिप तकनीक, प्रदर्शन में 50% की छलांग का दावा
नई 'नैनोस्टैक' आर्किटेक्चर से ट्रांजिस्टर घनत्व दोगुना, उत्पादन में पांच साल लग सकते हैं।
आईबीएम ने एक नई सेमीकंडक्टर तकनीक का खुलासा किया है जो सैद्धांतिक रूप से 0.7 नैनोमीटर (एनएम) नोड के बराबर घनत्व प्रदान करती है। कंपनी के अनुसार, यह शोध-स्तरीय उपलब्धि नाखून के आकार की चिप पर लगभग 100 अरब ट्रांजिस्टर समेट सकती है—जो उसकी 2021 में घोषित 2 एनएम चिप के मुकाबले दोगुना घनत्व है। प्रारंभिक परीक्षणों में यह डिज़ाइन 2 एनएम नोड की तुलना में 50% अधिक प्रसंस्करण क्षमता या 70% अधिक ऊर्जा दक्षता प्रदर्शित करता है। साथ ही, एसआरएएम मेमोरी चिप्स में 40% का सुधार दर्ज किया गया, जिसे आईबीएम अनुसंधान के निदेशक जय गैम्बेटा ने 'दशकों में नहीं देखा गया' बताया।
इस प्रगति का मूल 'नैनोस्टैक' नामक त्रि-आयामी आर्किटेक्चर है, जो ट्रांजिस्टरों को एक ही सतह पर बिछाने के बजाय परत-दर-परत खड़ा करता है। आईबीएम के उपाध्यक्ष हुइमिंग बू के अनुसार, यह संरचना लघुकरण की राह को 2040 तक 0.1 एनएम (एंगस्ट्रॉम) तक ले जा सकती है। यह डिज़ाइन सीपीयू, जीपीयू और एसआरएएम सभी पर लागू होगा, जिससे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) कार्यभार से जूझ रहे डेटा सेंटरों को राहत मिलने की संभावना है। फिलहाल यह तकनीक प्रयोगशाला चरण में है; आईबीएम का कहना है कि बड़े पैमाने पर उत्पादन की राह 'अगले पांच साल में' बन सकती है।
वैश्विक चिप उद्योग में यह घोषणा ऐसे समय आई है जब ताइवान की टीएसएमसी 2 एनएम चिप्स का बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू कर चुकी है और 2028 तक 1.4 एनएम पर जाने की योजना बना रही है। इंटेल ने भी अपनी 18ए (1.8 एनएम) प्रक्रिया को जोखिम उत्पादन में डाला है। आईबीएम स्वयं चिप निर्माण नहीं करता; वह अपनी डिज़ाइन का लाइसेंस जापान की रैपिडस और सैमसंग जैसी कंपनियों को देता है। फिलहाल कंपनी का ध्यान 2 एनएम के व्यावसायीकरण पर है, जिसका बड़े पैमाने पर उत्पादन रैपिडस 2027 की दूसरी छमाही में शुरू करेगी। इस खबर के बाद आईबीएम के शेयर प्रीमार्केट कारोबार में 6% से अधिक चढ़ गए।
दक्षिण एशिया, विशेषकर भारत के लिए यह विकास दीर्घकालिक महत्व रखता है। भारत अपनी सेमीकंडक्टर विनिर्माण क्षमता खड़ी करने में अरबों डॉलर का निवेश कर रहा है, हालाँकि फिलहाल उसका जोर परिपक्व नोड्स पर है। आईबीएम जैसी अग्रणी डिज़ाइन का लाइसेंसिंग मॉडल भविष्य में भारतीय फैब्स को उन्नत तकनीक तक पहुँच का रास्ता दे सकता है। साथ ही, एआई और डेटा सेंटरों की बढ़ती बिजली खपत को देखते हुए ऊर्जा-दक्ष चिप्स का आकर्षण वैश्विक स्तर पर बढ़ेगा।
अगला ठोस पड़ाव टीएसएमसी का 1.4 एनएम उत्पादन (2028) और रैपिडस द्वारा 2 एनएम का व्यावसायिक उत्पादन (2027) होगा। आईबीएम की 0.7 एनएम तकनीक के लिए अभी किसी विनिर्माण साझेदार की घोषणा नहीं हुई है।
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