
G7 का ईरान-अमेरिका समझौते को ऐतिहासिक समर्थन, हिजबुल्लाह निरस्त्रीकरण और होर्मुज में मुक्त आवागमन पर बल
समूह-7 नेताओं ने ट्रंप की मध्यस्थता वाले समझौते का स्वागत करते हुए इसे ईरान को परमाणु हथियार से रोकने का ऐतिहासिक अवसर बताया, साथ ही लेबनान में तत्काल युद्धविराम और हिजबुल्लाह के निरस्त्रीकरण का आह्वान किया।
फ्रांस में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन के बाद जारी एक संयुक्त बयान में नेताओं ने अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते का जोरदार स्वागत किया। बयान में इसे राष्ट्रपति ट्रंप के नेतृत्व और मध्यस्थ देशों के सहयोग से हासिल एक ऐतिहासिक अवसर बताया गया, जो ईरान को किसी भी प्रकार के परमाणु हथियार हासिल करने से रोक सकता है और उसकी क्षेत्रीय व बैलिस्टिक मिसाइल गतिविधियों से जुड़े खतरों का समाधान कर सकता है। समूह ने इस समझौते के क्रियान्वयन में सहयोग की तैयारी भी जताई, जिससे पश्चिमी शक्तियों की एकजुट कूटनीतिक पहल की पुष्टि होती है।
बयान में होर्मुज जलडमरूमध्य से बिना किसी रोक-टोक या शुल्क के पारगमन के अधिकार को अंतरराष्ट्रीय व्यापार की आधारशिला करार दिया गया। जी-7 ने फ्रांस और ब्रिटेन के नेतृत्व में एक स्वतंत्र, बहुराष्ट्रीय रक्षात्मक पहल का समर्थन किया, जिसका उद्देश्य वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा, शिपिंग कंपनियों को आश्वासन और माइन-स्वीपिंग में सहायता करके समुद्री यातायात फिर से शुरू कराना है। साथ ही, नेताओं ने होर्मुज पर निर्भरता घटाने और ऊर्जा भंडार बढ़ाने का संकल्प लिया—यह भारत जैसे दक्षिण एशियाई देशों के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, जो अपनी कच्चे तेल की जरूरतों के लिए इसी मार्ग पर बहुत अधिक निर्भर हैं।
जी-7 ने लेबनान में तत्काल युद्धविराम और हिजबुल्लाह के निरस्त्रीकरण के प्रयासों का भी समर्थन किया। बयान में लेबनानी नेतृत्व द्वारा राज्य के एकाधिकार में हथियार लाने की कोशिशों को मजबूती देने की बात कही गई, जो क्षेत्रीय स्थिरता के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण को दर्शाता है। यह रुख अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वैंस के उस बयान से मेल खाता है, जिसमें उन्होंने कहा कि यह समझौता इजराइल, लेबनान और खाड़ी देशों को भी अपने दायरे में लेता है।
वैंस ने स्पष्ट किया कि जब तक ईरान के व्यवहार में आमूलचूल बदलाव नहीं आता, उसे कुछ हासिल नहीं होगा और कोई भी लाभ समझौते के पूर्ण अनुपालन पर निर्भर करेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ईरान समझौते को लागू नहीं करता, तो उसके परमाणु, सैन्य और मिसाइल कार्यक्रम नष्ट और अस्त-व्यस्त ही रहेंगे। साथ ही, वाशिंगटन किसी भी परिस्थिति में ईरान को धन नहीं देगा। यह सख्त शर्तें बताती हैं कि कूटनीति के साथ दबाव की रणनीति भी जारी रहेगी।
वैश्विक परिप्रेक्ष्य में देखें तो जी-7 का यह एकजुट रुख पश्चिमी गोलबंदी को मजबूत करता है, लेकिन समझौते की सफलता ईरान के अनुपालन और क्षेत्रीय तनावों के समाधान पर टिकी है। भारत के लिए होर्मुज में मुक्त आवागमन की गारंटी ऊर्जा सुरक्षा का प्रश्न है, जबकि लेबनान में स्थायी शांति और हिजबुल्लाह का निरस्त्रीकरण पश्चिम एशिया में एक नए संतुलन का संकेत दे सकता है। आने वाले सप्ताहों में स्विट्जरलैंड में औपचारिक हस्ताक्षर के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि क्या यह ऐतिहासिक अवसर वास्तव में स्थायी शांति में बदल पाता है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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ईरानी मीडिया G7 के बयान को ईरान-अमेरिका समझौते का मजबूत समर्थन बताता है, इसे परमाणु हथियारों की रोकथाम और क्षेत्रीय खतरों से निपटने का ऐतिहासिक अवसर कहता है। समाचार आउटलेट समझौते के कार्यान्वयन में G7 की मदद की तत्परता पर जोर देते हैं, लेकिन ट्रंप के 'मजबूत नेतृत्व' के दावे पर संदेह जताते हैं। वे दोहराते हैं कि ईरान कभी परमाणु हथियार नहीं चाहेगा और हिजबुल्लाह के निरस्त्रीकरण के समर्थन को व्यापक समझौते का हिस्सा बताते हैं।
खाड़ी अरब मीडिया G7 के समर्थन को ईरान का परमाणु हथियारों तक पहुंचने का रास्ता स्थायी रूप से रोकने और उसकी क्षेत्रीय व मिसाइल धमकियों का मुकाबला करने का ऐतिहासिक मौका बताता है। होर्मुज जलडमरूमध्य में बिना शुल्क पारगमन और फ्रांस-ब्रिटेन रक्षा पहल पर जोर को अंतरराष्ट्रीय व्यापार सुरक्षा के लिए अहम माना जा रहा है। यह ब्लॉक लेबनान में तत्काल युद्धविराम और हिजबुल्लाह के निरस्त्रीकरण के आह्वान का स्वागत करता है, जो खाड़ी की सुरक्षा प्राथमिकताओं से मेल खाता है।
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