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G7 में ट्रंप को यूक्रेन की जीत का यकीन दिलाने की कोशिश, ज़ेलेंस्की ने पुतिन को बुलाया

फ्रांस के एवियाँ में जारी G7 शिखर सम्मेलन में ज़ेलेंस्की ने पुतिन को सीधी बातचीत का प्रस्ताव दिया, जबकि पश्चिमी नेता ट्रंप को यूक्रेन की सैन्य बढ़त का भरोसा दिलाने की कोशिश में हैं।

फ्रांस के एवियाँ-ले-बैं में सोमवार से शुरू हुए जी7 शिखर सम्मेलन के पहले दिन यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने एक अप्रत्याशित कूटनीतिक पहल करते हुए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को सीधी बातचीत का प्रस्ताव दिया। ज़ेलेंस्की ने कीव में पत्रकारों को बताया कि उन्होंने मध्यस्थों, राजनयिकों और ख़ुफ़िया माध्यमों से संदेश भिजवाया था कि वे जी7 के दौरान पुतिन से मिलने को तैयार हैं, क्योंकि वहाँ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों भी मौजूद रहेंगे। यूक्रेनी पक्ष के अनुसार, यह यूरोप और अमेरिका को एक साथ लाने का “बहुत अच्छा अवसर” था, लेकिन मॉस्को ने कोई स्पष्ट उत्तर नहीं दिया। रूसी राष्ट्रपति के सहायक फ़्योदोर उशाकोव ने इसके बदले यूक्रेनी प्रतिनिधियों को मॉस्को आने का सुझाव दिया, जिसे कीव ने व्यावहारिक इनकार के रूप में देखा। इसके तुरंत बाद रूसी सेना की ओर से हुए हमलों को भी यूक्रेन ने प्रस्ताव का एक प्रकार का “जवाब” माना।

इसी सम्मेलन के इर्द-गिर्द एक और बड़ी रणनीति आकार ले रही है। जी7 सूत्रों के हवाले से खबरें बताती हैं कि समूह के नेता—विशेष रूप से मैक्रों—ट्रंप को यह समझाने की कोशिश कर रहे हैं कि यूक्रेन वास्तव में युद्ध के मैदान में बढ़त बना रहा है। शुरू में ज़ेलेंस्की को शिखर बैठक में आमंत्रित नहीं किया गया था, लेकिन अब मंगलवार को उनके साथ दो घंटे की विशेष बैठक आयोजित करने की योजना है। यूरोपीय नेता इस बात पर ज़ोर देना चाहते हैं कि कीव को सैन्य और वित्तीय सहायता में यूरोप का योगदान अमेरिकी सहायता से कम नहीं है। यह कूटनीतिक प्रयास ऐसे समय में हो रहा है जब ट्रंप प्रशासन यूक्रेन को दी जा रही भारी सहायता पर सवाल उठा चुका है और संघर्ष को जल्द समाप्त करने की बात करता रहा है।

ज़ेलेंस्की का यह प्रस्ताव कोई पहली पहल नहीं थी। इससे पहले 4 जून को एक खुले पत्र में उन्होंने पुतिन से व्यक्तिगत भेंट का आह्वान किया था, जिस पर रूसी राष्ट्रपति ने कहा था कि उन्हें कीव की ओर से बातचीत की कोई वास्तविक तैयारी नहीं दिखती। ताज़ा प्रस्ताव में ज़ेलेंस्की ने ट्रंप और मैक्रों की उपस्थिति को एक बहुपक्षीय गारंटी के रूप में पेश किया, ताकि रूस को अलग-थलग महसूस न हो। लेकिन क्रेमलिन की प्रतिक्रिया—या उसका अभाव—यह संकेत देती है कि मॉस्को फ़िलहाल किसी ऐसे मंच पर बातचीत को तैयार नहीं है जहाँ पश्चिमी शक्तियाँ सामूहिक रूप से मौजूद हों। रूसी पक्ष ने बार-बार कहा है कि कोई भी वार्ता सीधी और बिना पूर्व शर्तों के होनी चाहिए, लेकिन ज़मीनी हक़ीक़त यह है कि दोनों देशों के बीच विश्वास का स्तर लगभग शून्य पर है।

यह घटनाक्रम वैश्विक कूटनीति के लिए कई सवाल खड़े करता है। यूरोपीय संघ और अमेरिका के बीच यूक्रेन नीति पर मतभेद कम करने की कोशिशें तेज़ हुई हैं, लेकिन रूस को सीधे बातचीत की मेज़ पर लाने में अब तक कोई सफलता नहीं मिली है। दक्षिण एशिया, विशेषकर भारत, के लिए यह ध्रुवीकरण ऊर्जा सुरक्षा और कूटनीतिक संतुलन की चुनौतियाँ खड़ी कर सकता है। फ़िलहाल, जी7 मंच से निकलने वाला संदेश यही है कि पश्चिम यूक्रेन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को और मज़बूती से प्रदर्शित करना चाहता है, जबकि रूस किसी भी बहुपक्षीय दबाव वाली वार्ता से दूरी बनाए हुए है। आने वाले दिनों में ट्रंप की प्रतिक्रिया और मैक्रों की मध्यस्थता की सफलता इस बात का संकेत देंगी कि क्या यह शिखर सम्मेलन युद्ध की दिशा बदलने में कोई भूमिका निभा पाएगा या केवल एक और कूटनीतिक प्रयास बनकर रह जाएगा।

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

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लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
Stampa russa e CSIStampa europea continentale
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scetticismoschadenfreude

ज़ेलेंस्की ने G7 शिखर सम्मेलन में पुतिन से मुलाकात का प्रस्ताव रखा, लेकिन मॉस्को ने कोई जवाब नहीं दिया। इस बीच, G7 नेता ट्रंप को यह विश्वास दिलाने की योजना बना रहे हैं कि यूक्रेन जीत रहा है, ताकि संघर्ष पर उनका रुख बदला जा सके। क्रेमलिन की चुप्पी को पश्चिम द्वारा आयोजित बातचीत की अस्वीकृति के रूप में देखा जा रहा है।

Stampa europea continentale
distaccopragmatismo

यूक्रेन ने G7 शिखर सम्मेलन के मौके पर ज़ेलेंस्की और पुतिन के बीच बैठक का प्रस्ताव रखा, जिसमें G7 नेता मौजूद रहते, लेकिन मॉस्को ने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। रूसी राष्ट्रपति के एक सहायक ने इसके बजाय ज़ेलेंस्की को मॉस्को आने का सुझाव दिया। यह प्रस्ताव राजनयिक और खुफिया माध्यमों से भेजा गया, लेकिन कोई उत्तर नहीं मिला।

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अपडेट 03:17 pm1 भाषा · 6 स्रोत
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G7 में ट्रंप को यूक्रेन की जीत का यकीन दिलाने की कोशिश, ज़ेलेंस्की ने पुतिन को बुलाया

फ्रांस के एवियाँ में जारी G7 शिखर सम्मेलन में ज़ेलेंस्की ने पुतिन को सीधी बातचीत का प्रस्ताव दिया, जबकि पश्चिमी नेता ट्रंप को यूक्रेन की सैन्य बढ़त का भरोसा दिलाने की कोशिश में हैं।

फ्रांस के एवियाँ-ले-बैं में सोमवार से शुरू हुए जी7 शिखर सम्मेलन के पहले दिन यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने एक अप्रत्याशित कूटनीतिक पहल करते हुए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को सीधी बातचीत का प्रस्ताव दिया। ज़ेलेंस्की ने कीव में पत्रकारों को बताया कि उन्होंने मध्यस्थों, राजनयिकों और ख़ुफ़िया माध्यमों से संदेश भिजवाया था कि वे जी7 के दौरान पुतिन से मिलने को तैयार हैं, क्योंकि वहाँ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों भी मौजूद रहेंगे। यूक्रेनी पक्ष के अनुसार, यह यूरोप और अमेरिका को एक साथ लाने का “बहुत अच्छा अवसर” था, लेकिन मॉस्को ने कोई स्पष्ट उत्तर नहीं दिया। रूसी राष्ट्रपति के सहायक फ़्योदोर उशाकोव ने इसके बदले यूक्रेनी प्रतिनिधियों को मॉस्को आने का सुझाव दिया, जिसे कीव ने व्यावहारिक इनकार के रूप में देखा। इसके तुरंत बाद रूसी सेना की ओर से हुए हमलों को भी यूक्रेन ने प्रस्ताव का एक प्रकार का “जवाब” माना।

इसी सम्मेलन के इर्द-गिर्द एक और बड़ी रणनीति आकार ले रही है। जी7 सूत्रों के हवाले से खबरें बताती हैं कि समूह के नेता—विशेष रूप से मैक्रों—ट्रंप को यह समझाने की कोशिश कर रहे हैं कि यूक्रेन वास्तव में युद्ध के मैदान में बढ़त बना रहा है। शुरू में ज़ेलेंस्की को शिखर बैठक में आमंत्रित नहीं किया गया था, लेकिन अब मंगलवार को उनके साथ दो घंटे की विशेष बैठक आयोजित करने की योजना है। यूरोपीय नेता इस बात पर ज़ोर देना चाहते हैं कि कीव को सैन्य और वित्तीय सहायता में यूरोप का योगदान अमेरिकी सहायता से कम नहीं है। यह कूटनीतिक प्रयास ऐसे समय में हो रहा है जब ट्रंप प्रशासन यूक्रेन को दी जा रही भारी सहायता पर सवाल उठा चुका है और संघर्ष को जल्द समाप्त करने की बात करता रहा है।

ज़ेलेंस्की का यह प्रस्ताव कोई पहली पहल नहीं थी। इससे पहले 4 जून को एक खुले पत्र में उन्होंने पुतिन से व्यक्तिगत भेंट का आह्वान किया था, जिस पर रूसी राष्ट्रपति ने कहा था कि उन्हें कीव की ओर से बातचीत की कोई वास्तविक तैयारी नहीं दिखती। ताज़ा प्रस्ताव में ज़ेलेंस्की ने ट्रंप और मैक्रों की उपस्थिति को एक बहुपक्षीय गारंटी के रूप में पेश किया, ताकि रूस को अलग-थलग महसूस न हो। लेकिन क्रेमलिन की प्रतिक्रिया—या उसका अभाव—यह संकेत देती है कि मॉस्को फ़िलहाल किसी ऐसे मंच पर बातचीत को तैयार नहीं है जहाँ पश्चिमी शक्तियाँ सामूहिक रूप से मौजूद हों। रूसी पक्ष ने बार-बार कहा है कि कोई भी वार्ता सीधी और बिना पूर्व शर्तों के होनी चाहिए, लेकिन ज़मीनी हक़ीक़त यह है कि दोनों देशों के बीच विश्वास का स्तर लगभग शून्य पर है।

यह घटनाक्रम वैश्विक कूटनीति के लिए कई सवाल खड़े करता है। यूरोपीय संघ और अमेरिका के बीच यूक्रेन नीति पर मतभेद कम करने की कोशिशें तेज़ हुई हैं, लेकिन रूस को सीधे बातचीत की मेज़ पर लाने में अब तक कोई सफलता नहीं मिली है। दक्षिण एशिया, विशेषकर भारत, के लिए यह ध्रुवीकरण ऊर्जा सुरक्षा और कूटनीतिक संतुलन की चुनौतियाँ खड़ी कर सकता है। फ़िलहाल, जी7 मंच से निकलने वाला संदेश यही है कि पश्चिम यूक्रेन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को और मज़बूती से प्रदर्शित करना चाहता है, जबकि रूस किसी भी बहुपक्षीय दबाव वाली वार्ता से दूरी बनाए हुए है। आने वाले दिनों में ट्रंप की प्रतिक्रिया और मैक्रों की मध्यस्थता की सफलता इस बात का संकेत देंगी कि क्या यह शिखर सम्मेलन युद्ध की दिशा बदलने में कोई भूमिका निभा पाएगा या केवल एक और कूटनीतिक प्रयास बनकर रह जाएगा।

स्रोतों में मतभेद

— · 6 स्रोत · 1 भाषा

48%मध्यम

स्रोत कैसे एक ही तथ्यों को अलग-अलग तरीके से बयाँ करते हैं।

विभाजन कैसे है

न्यूनत्र60%
निंदक40%

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

2 संपादकीय समूह · 1 भाषाएँ

लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
Stampa russa e CSIStampa europea continentale
Stampa russa e CSI
scetticismoschadenfreude

ज़ेलेंस्की ने G7 शिखर सम्मेलन में पुतिन से मुलाकात का प्रस्ताव रखा, लेकिन मॉस्को ने कोई जवाब नहीं दिया। इस बीच, G7 नेता ट्रंप को यह विश्वास दिलाने की योजना बना रहे हैं कि यूक्रेन जीत रहा है, ताकि संघर्ष पर उनका रुख बदला जा सके। क्रेमलिन की चुप्पी को पश्चिम द्वारा आयोजित बातचीत की अस्वीकृति के रूप में देखा जा रहा है।

Stampa europea continentale
distaccopragmatismo

यूक्रेन ने G7 शिखर सम्मेलन के मौके पर ज़ेलेंस्की और पुतिन के बीच बैठक का प्रस्ताव रखा, जिसमें G7 नेता मौजूद रहते, लेकिन मॉस्को ने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। रूसी राष्ट्रपति के एक सहायक ने इसके बजाय ज़ेलेंस्की को मॉस्को आने का सुझाव दिया। यह प्रस्ताव राजनयिक और खुफिया माध्यमों से भेजा गया, लेकिन कोई उत्तर नहीं मिला।

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