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राजनीतिबुधवार, 17 जून 2026

G7 शिखर सम्मेलन में दक्षिण कोरिया ने ट्रंप से कोरियाई शांति की गुहार लगाई

राष्ट्रपति ली जे-म्युंग ने ट्रंप से कहा—जैसे आपने मध्य-पूर्व का संघर्ष सुलझाया, वैसे ही उत्तर कोरिया के साथ शांति स्थापित करने में नेतृत्व करें; ट्रंप ने प्रतिबद्धता जताई।

फ्रांस के एवियां में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के इतर एक संक्षिप्त मुलाकात में दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे-म्युंग ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से कोरियाई प्रायद्वीप में शांति स्थापित करने की दिशा में नेतृत्व करने का आग्रह किया। राष्ट्रपति कार्यालय के बयान के अनुसार, ट्रंप ने पहले अंतर-कोरियाई संबंधों की मौजूदा स्थिति के बारे में पूछा, जिसके जवाब में ली ने कहा कि जिस तरह ट्रंप ने मध्य-पूर्व के संघर्ष को सुलझाने में सफलता पाई है, वैसे ही वे उत्तर कोरिया मसले के शांतिपूर्ण समाधान की अगुआई करें। ट्रंप ने इस मुद्दे पर काम करने की प्रतिबद्धता जताई।

यह अपील ऐसे समय आई है जब कोरियाई प्रायद्वीप में तनाव लगातार बढ़ रहा है। उत्तर कोरिया ने हाल के महीनों में कई मिसाइल परीक्षण किए हैं और अपने परमाणु कार्यक्रम का विस्तार जारी रखा है। दक्षिण कोरिया के नए राष्ट्रपति ली जे-म्युंग ने अपने पूर्ववर्ती यून सुक योल की सख्त नीति के विपरीत प्योंगयांग के प्रति अपेक्षाकृत नरम रुख अपनाया है। सियोल को उम्मीद है कि ट्रंप और किम जोंग उन के बीच 2018-19 के दौरान सिंगापुर, हनोई और डीएमजेड में हुई ऐतिहासिक मुलाकातों तथा व्यक्तिगत पत्राचार से बना सीधा संवाद का रास्ता फिर खुल सकता है। ट्रंप ने हाल ही में सोशल मीडिया पर सिंगापुर शिखर वार्ता की एक तस्वीर साझा की थी, जिसे कोरियाई कूटनीति में उनकी नए सिरे से दिलचस्पी के संकेत के रूप में देखा गया।

ली का मध्य-पूर्व का संदर्भ विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि अमेरिका और ईरान शुक्रवार को युद्ध विराम और शांति स्थापित करने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने वाले हैं। ट्रंप प्रशासन की इस कूटनीतिक सफलता ने यह उम्मीद जगाई है कि वाशिंगटन अब अपना ध्यान कोरियाई प्रायद्वीप की ओर मोड़ सकता है। हालांकि, 2017-2021 के बीच ट्रंप और किम के तीन शिखर सम्मेलनों के बावजूद, अमेरिका की परमाणु निरस्त्रीकरण की मांग पर बातचीत विफल हो गई थी। उत्तर कोरिया ने रविवार को एक बयान में फिर से अपनी सैन्य क्षमताओं के प्रदर्शन का संकेत दिया, जिससे स्पष्ट है कि प्योंगयांग अपनी परमाणु शक्ति को सौदेबाजी की मेज पर रखने को तैयार नहीं है।

विश्लेषकों का मानना है कि यदि ट्रंप वास्तव में कोरियाई मसले पर पहल करते हैं, तो इससे पूर्वी एशिया में बड़े युद्ध का जोखिम कम हो सकता है और वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य प्रभावित होगा। भारत और दक्षिण एशिया के लिए, कोरियाई प्रायद्वीप में स्थिरता व्यापक एशियाई तनावों को कम करने में सहायक होगी, लेकिन अमेरिकी रणनीतिक ध्यान के पुनर्संयोजन से क्षेत्रीय संतुलन पर भी असर पड़ सकता है। चीन की भूमिका और प्रतिबंधों का भविष्य जैसे सवाल अब भी अनसुलझे हैं। फिलहाल, G7 जैसे बहुपक्षीय मंच पर दक्षिण कोरिया की यह सक्रिय पहल बताती है कि सियोल संवाद का कोई भी अवसर छोड़ना नहीं चाहता, लेकिन प्योंगयांग की ओर से सकारात्मक प्रतिक्रिया का इंतजार बना हुआ है।

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

2 संपादकीय समूह · 5 भाषाएँ

48%
लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
Stampa giapponese-coreanaStampa sud-est asiatica
Stampa giapponese-coreana
pragmatismodistacco

दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ने ट्रम्प से उत्तर कोरिया मुद्दे को वैसे ही सुलझाने का अनुरोध किया जैसे मध्य पूर्व में किया। रिपोर्ट संक्षिप्त और तथ्यात्मक है।

Stampa sud-est asiatica
allarmeurgenzapragmatismo

सियोल ने ट्रम्प से तत्काल हस्तक्षेप करने का आग्रह किया ताकि किम जोंग उन के प्रकोप को शांत किया जा सके और पूर्वी एशिया में बड़े युद्ध को रोका जा सके। पिछले सीधे शिखर सम्मेलनों से बने ट्रम्प के व्यक्तिगत प्रभाव को कूटनीति फिर से शुरू करने की कुंजी बताया गया है।

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बुधवार, 17 जून 2026

G7 शिखर सम्मेलन में दक्षिण कोरिया ने ट्रंप से कोरियाई शांति की गुहार लगाई

राष्ट्रपति ली जे-म्युंग ने ट्रंप से कहा—जैसे आपने मध्य-पूर्व का संघर्ष सुलझाया, वैसे ही उत्तर कोरिया के साथ शांति स्थापित करने में नेतृत्व करें; ट्रंप ने प्रतिबद्धता जताई।

फ्रांस के एवियां में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के इतर एक संक्षिप्त मुलाकात में दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे-म्युंग ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से कोरियाई प्रायद्वीप में शांति स्थापित करने की दिशा में नेतृत्व करने का आग्रह किया। राष्ट्रपति कार्यालय के बयान के अनुसार, ट्रंप ने पहले अंतर-कोरियाई संबंधों की मौजूदा स्थिति के बारे में पूछा, जिसके जवाब में ली ने कहा कि जिस तरह ट्रंप ने मध्य-पूर्व के संघर्ष को सुलझाने में सफलता पाई है, वैसे ही वे उत्तर कोरिया मसले के शांतिपूर्ण समाधान की अगुआई करें। ट्रंप ने इस मुद्दे पर काम करने की प्रतिबद्धता जताई।

यह अपील ऐसे समय आई है जब कोरियाई प्रायद्वीप में तनाव लगातार बढ़ रहा है। उत्तर कोरिया ने हाल के महीनों में कई मिसाइल परीक्षण किए हैं और अपने परमाणु कार्यक्रम का विस्तार जारी रखा है। दक्षिण कोरिया के नए राष्ट्रपति ली जे-म्युंग ने अपने पूर्ववर्ती यून सुक योल की सख्त नीति के विपरीत प्योंगयांग के प्रति अपेक्षाकृत नरम रुख अपनाया है। सियोल को उम्मीद है कि ट्रंप और किम जोंग उन के बीच 2018-19 के दौरान सिंगापुर, हनोई और डीएमजेड में हुई ऐतिहासिक मुलाकातों तथा व्यक्तिगत पत्राचार से बना सीधा संवाद का रास्ता फिर खुल सकता है। ट्रंप ने हाल ही में सोशल मीडिया पर सिंगापुर शिखर वार्ता की एक तस्वीर साझा की थी, जिसे कोरियाई कूटनीति में उनकी नए सिरे से दिलचस्पी के संकेत के रूप में देखा गया।

ली का मध्य-पूर्व का संदर्भ विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि अमेरिका और ईरान शुक्रवार को युद्ध विराम और शांति स्थापित करने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने वाले हैं। ट्रंप प्रशासन की इस कूटनीतिक सफलता ने यह उम्मीद जगाई है कि वाशिंगटन अब अपना ध्यान कोरियाई प्रायद्वीप की ओर मोड़ सकता है। हालांकि, 2017-2021 के बीच ट्रंप और किम के तीन शिखर सम्मेलनों के बावजूद, अमेरिका की परमाणु निरस्त्रीकरण की मांग पर बातचीत विफल हो गई थी। उत्तर कोरिया ने रविवार को एक बयान में फिर से अपनी सैन्य क्षमताओं के प्रदर्शन का संकेत दिया, जिससे स्पष्ट है कि प्योंगयांग अपनी परमाणु शक्ति को सौदेबाजी की मेज पर रखने को तैयार नहीं है।

विश्लेषकों का मानना है कि यदि ट्रंप वास्तव में कोरियाई मसले पर पहल करते हैं, तो इससे पूर्वी एशिया में बड़े युद्ध का जोखिम कम हो सकता है और वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य प्रभावित होगा। भारत और दक्षिण एशिया के लिए, कोरियाई प्रायद्वीप में स्थिरता व्यापक एशियाई तनावों को कम करने में सहायक होगी, लेकिन अमेरिकी रणनीतिक ध्यान के पुनर्संयोजन से क्षेत्रीय संतुलन पर भी असर पड़ सकता है। चीन की भूमिका और प्रतिबंधों का भविष्य जैसे सवाल अब भी अनसुलझे हैं। फिलहाल, G7 जैसे बहुपक्षीय मंच पर दक्षिण कोरिया की यह सक्रिय पहल बताती है कि सियोल संवाद का कोई भी अवसर छोड़ना नहीं चाहता, लेकिन प्योंगयांग की ओर से सकारात्मक प्रतिक्रिया का इंतजार बना हुआ है।

स्रोतों में मतभेद

राजनीति · 6 स्रोत · 5 भाषाएँ

48%मध्यम

स्रोत कैसे एक ही तथ्यों को अलग-अलग तरीके से बयाँ करते हैं।

विभाजन कैसे है

न्यूनत्र60%
निंदक40%

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

2 संपादकीय समूह · 5 भाषाएँ

लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
Stampa giapponese-coreanaStampa sud-est asiatica
Stampa giapponese-coreana
pragmatismodistacco

दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ने ट्रम्प से उत्तर कोरिया मुद्दे को वैसे ही सुलझाने का अनुरोध किया जैसे मध्य पूर्व में किया। रिपोर्ट संक्षिप्त और तथ्यात्मक है।

Stampa sud-est asiatica
allarmeurgenzapragmatismo

सियोल ने ट्रम्प से तत्काल हस्तक्षेप करने का आग्रह किया ताकि किम जोंग उन के प्रकोप को शांत किया जा सके और पूर्वी एशिया में बड़े युद्ध को रोका जा सके। पिछले सीधे शिखर सम्मेलनों से बने ट्रम्प के व्यक्तिगत प्रभाव को कूटनीति फिर से शुरू करने की कुंजी बताया गया है।

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