
CNTE हड़ताल जारी, शीनबाम ने सीधे शिक्षकों से संवाद की राह पकड़ी
मेक्सिको में शिक्षक संघ CNTE ने टोल प्लाज़ा खोलकर प्रदर्शन तेज़ किए, जबकि राष्ट्रपति ने भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच स्कूल-दर-स्कूल वार्ता की नई नीति अपनाई।
मेक्सिको की राजधानी में शिक्षकों का राष्ट्रीय आंदोलन सोमवार को और तेज़ हो गया जब राष्ट्रीय शैक्षिक कर्मचारी समन्वयक (CNTE) ने हड़ताल जारी रखने और टोल प्लाज़ा मुक्त करने का फ़ैसला किया। संगठन की राष्ट्रीय प्रतिनिधि सभा ने तय किया कि मेक्सिको सिटी के प्रवेश मार्गों और ओआक्साका, चियापास, गेरेरो व मिचोआकान जैसे राज्यों में कैसेटस (टोल बूथ) पर प्लुमें उठाकर वाहनों को मुफ़्त आवाजाही दी जाएगी। इसी बीच, CNTE की ओआक्साका इकाई में आंतरिक मतदान को लेकर धांधली के आरोप लगे—एक पक्ष ने हड़ताल जारी रखने के पक्ष में 6,337 मत बताए तो दूसरे ने 7,595 मत विरोध में होने का दावा किया। राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाम ने इस विवाद पर नाराज़गी जताई और कहा कि पुरानी व्यवस्था में संघ और सरकार के बीच शिक्षक पदों का बंटवारा भ्रष्टाचार को जन्म देता था।
शीनबाम ने सोमवार को अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में बड़ा रणनीतिक बदलाव करते हुए घोषणा की कि अगस्त से सरकारी अधिकारी स्कूल-दर-स्कूल जाकर सीधे शिक्षकों से संवाद करेंगे, न कि संघ के शीर्ष नेतृत्व से। उन्होंने कहा, "हम अब CNTE या किसी अन्य संघ के आकाओं से नहीं पूछेंगे, सीधे शिक्षकों से जानेंगे कि वे क्या सोचते हैं।" यह कदम तब उठा जब CNTE के प्रदर्शनों के कारण उन्होंने सप्ताहांत में ज़ाकातेकास का अपना दौरा रद्द कर दिया और सैन लुइस पोतोसी में एक खेल मैदान का उद्घाटन कर विश्व कप सामाजिक प्रतियोगिता के विजेताओं को टिकट बांटे। शीनबाम ने कहा, "हम विश्व कप की भावना में हैं, इसलिए अनावश्यक टकराव से बचना बेहतर है।" उनके इस फ़ैसले का सत्तारूढ़ दल के सांसद रिकार्डो मोनरियाल ने समर्थन करते हुए इसे "बुद्धिमानी और संयमित" बताया।
CNTE का विरोध अब सिर्फ़ राजधानी तक सीमित नहीं है। सोमवार सुबह गेरेरो और महानगरीय इकाइयों ने त्लालपान स्थित मेक्सिको-कुएरनावाका टोल प्लाज़ा पर कब्ज़ा कर लिया और घंटों मुफ़्त आवाजाही जारी रखी। CNTE ने चेतावनी दी कि ज़ाकातेकास, मिचोआकान, ओआक्साका और गेरेरो से अतिरिक्त शिक्षक राजधानी में धरना मज़बूत करने पहुंच रहे हैं। मेक्सिको सिटी के ऐतिहासिक केंद्र में 15 दिनों से जारी प्लांतोन के चलते 20 नवंबर मार्ग समेत कई सड़कें बंद रहीं, जिससे आम नागरिकों को वैकल्पिक मार्ग अपनाने पड़े। CNTE की मांग 2007 के ISSSTE क़ानून को निरस्त करने की है, जिसे सरकार बार-बार यह कहकर ख़ारिज कर चुकी है कि इससे पेंशन प्रणाली प्रभावित होगी।
विश्लेषकों का मानना है कि शीनबाम का सीधे शिक्षकों तक पहुंचने का प्रयास संघ नेताओं की सौदेबाज़ी की ताक़त को कमज़ोर कर सकता है, लेकिन इससे टकराव लंबा खिंचने का ख़तरा भी है। CNTE ऐतिहासिक रूप से सड़कों पर दबाव बनाकर सरकार से रियायतें हासिल करती रही है, और विश्व कप जैसे आयोजन के दौरान यह रणनीति और प्रभावी हो जाती है। हालांकि, उद्घाटन समारोह के दौरान पुलिस की पेशेवर तैनाती ने बड़ी हिंसा या अंतरराष्ट्रीय छवि को नुकसान पहुंचाने से बचा लिया। दक्षिण एशिया के संदर्भ में देखें तो भारत में भी शिक्षक संघ अक्सर सीधी भर्ती और पेंशन सुधारों को लेकर आंदोलन करते हैं, लेकिन वहां सरकारें आमतौर पर संघ नेतृत्व से ही बातचीत करती हैं। मेक्सिको का यह प्रयोग यदि सफल रहा तो यह अन्य देशों के लिए भी एक मिसाल बन सकता है। फ़िलहाल, CNTE का आंदोलन शुरुआती दौर में ही है और आने वाले सप्ताहों में इसके और तेज़ होने के संकेत हैं।
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