
लेबनान में युद्धविराम के बावजूद इज़रायली हमले जारी, कई मरे; अमेरिका-ईरान समझौते पर ख़तरा
शुक्रवार को घोषित संघर्ष विराम के बावजूद दक्षिण लेबनान में शनिवार को इज़रायली हमलों में कम से कम 16 लोगों की मौत, हिज़्बुल्लाह और इज़रायल एक-दूसरे पर उल्लंघन का आरोप लगा रहे हैं।
शुक्रवार शाम को अमेरिका और क़तर की मध्यस्थता से घोषित इज़रायल-हिज़्बुल्लाह युद्धविराम महज़ कुछ घंटों में ही टूटता दिखा। लेबनान की सरकारी समाचार एजेंसी एनएनए और नागरिक सुरक्षा एजेंसी के अनुसार, शनिवार तड़के दक्षिणी लेबनान के नबातिह क्षेत्र और आसपास के क़स्बों पर इज़रायली लड़ाकू विमानों और ड्रोनों ने हमले किए, जिसमें कम से कम 16 लोग मारे गए—जिनमें बारीश गाँव में एक ही परिवार के माता-पिता और दो बच्चे शामिल हैं। लेबनानी सेना ने बताया कि नबातिह मार्ग पर एक सैनिक भी मारा गया। हमलों के बाद शहर के ऊपर धुआँ उठता दिखा और कई इमारतें ढह गईं।
इज़रायली सैन्य अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि हिज़्बुल्लाह ने रात के दौरान दक्षिण लेबनान में इज़रायली सैनिकों पर 50 से अधिक रॉकेट दागे, जिसके जवाब में ये कार्रवाई की गई। इज़रायल की अरबी भाषा की सैन्य प्रवक्ता ने कहा, “हम संघर्ष विराम के लिए प्रतिबद्ध हैं, लेकिन अगर हिज़्बुल्लाह शत्रुतापूर्ण गतिविधियाँ बंद करे तो शांति संभव है।” दूसरी ओर, हिज़्बुल्लाह ने इन हमलों की ज़िम्मेदारी नहीं ली और एक वरिष्ठ सूत्र ने दावा किया कि समूह संघर्ष विराम का पालन कर रहा है। हिज़्बुल्लाह के सांसद हसन फ़दलल्लाह ने कहा, “दुश्मन को पूरी तरह से संघर्ष विराम का सम्मान करना चाहिए; जब वह हम पर हमला करता है तो प्रतिरोध को उसका सामना करने का पूरा अधिकार है।” दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर संघर्ष विराम के उल्लंघन का आरोप लगाया और ‘आग का जवाब आग से’ की नीति पर चलने की बात कही।
यह हिंसा बुधवार को अमेरिका और ईरान के बीच हस्ताक्षरित अंतरिम समझौते पर सीधा ख़तरा है, जिसमें लेबनान समेत सभी मोर्चों पर सैन्य अभियान तुरंत और स्थायी रूप से रोकने की शर्त है। तेहरान ने चेतावनी दी है कि यदि इज़रायली हमले जारी रहे तो वह इसे समझौते का उल्लंघन मानेगा। नतीजतन, शुक्रवार को स्विट्ज़रलैंड में होने वाली अमेरिका-ईरान वार्ता अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई, हालाँकि अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ़ बातचीत को पटरी पर लाने के लिए वहाँ पहुँच गए हैं। पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नक़वी ने भी तेहरान में ईरानी विदेश मंत्री से मुलाक़ात की। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ़ औन से फ़ोन पर कहा कि लेबनान के लिए हिज़्बुल्लाह को निरस्त्र करना और अपनी संप्रभुता बहाल करना ज़रूरी है।
यह संघर्ष मार्च की शुरुआत में शुरू हुआ जब हिज़्बुल्लाह ने ईरान के सर्वोच्च नेता की अमेरिकी-इज़रायली हमले में मौत के विरोध में इज़रायल पर रॉकेट दागे। तब से लेबनान में इज़रायली हमलों में 3,900 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं, जबकि इज़रायल में 32 सैनिक और चार नागरिक मारे गए। पिछला संघर्ष विराम, जो अप्रैल में लागू होना था, कभी सफल नहीं हुआ। अब अमेरिकी दबाव में लेबनान और इज़रायल के बीच वाशिंगटन में सीधी बातचीत का पाँचवाँ दौर मंगलवार को प्रस्तावित है। इधर, इज़रायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने शुक्रवार को दोहराया कि जब तक ज़रूरी है, इज़रायली सेना दक्षिण लेबनान में रहेगी। वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए अहम होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाज़ों का गुज़रना फिलहाल जारी है, पर भारत सहित दक्षिण एशियाई देशों की निगाहें इस विकट होते कूटनीतिक संकट पर टिकी हैं।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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Israeli strikes targeted Hezbollah positions in response to projectile fire, despite a newly announced ceasefire. The military acted to defend northern communities, while Hezbollah's continued provocations threaten the fragile truce. The US-Iran deal remains uncertain as both sides blame each other for violations.
Just hours after the announcement of a ceasefire, Israel launched airstrikes that killed at least 10 people, including children, in southern Lebanon. The violence threatens the interim US-Iran deal to end the war in the Middle East. Hezbollah stated it will not allow Israel freedom of movement, while the international community watches with concern.
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