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मंगलवार, 16 जून 2026

अमेरिका ने इज़राइल को ईरान समझौते की जानकारी देने से किया इनकार, तेल अवीव में बढ़ी बेचैनी

पाकिस्तान की मध्यस्थता में हुए 14-सूत्रीय समझौते पर गोपनीयता बरकरार, इज़राइल ने कहा- यह हमें बाध्य नहीं करता

अमेरिका ने इज़राइल के उस अनुरोध को ठुकरा दिया है जिसमें तेल अवीव ने ईरान के साथ होने वाले समझौता ज्ञापन का पूरा पाठ देखने की माँग की थी। यह जानकारी इज़राइली चैनल 12 ने दी, जिसके अनुसार व्हाइट हाउस ने स्पष्ट रूप से इनकार कर दिया और इज़राइली अधिकारी अब भी उस दस्तावेज़ के विवरण से अनभिज्ञ हैं जिस पर शुक्रवार को स्विट्ज़रलैंड में हस्ताक्षर होने हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वह समझौते को "शब्द-दर-शब्द" पढ़ेंगे, लेकिन तारीख तय नहीं की। इस बीच ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाक़र ग़ालिबाफ़ पहले ही ज्ञापन पर हस्ताक्षर कर चुके हैं, जबकि अमेरिकी पक्ष पर ट्रंप और उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस के हस्ताक्षर हैं।

विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इस समझौते में 14 अलग-अलग खंड शामिल हैं, जिनमें दक्षिणी लेबनान से इज़राइली सेना की वापसी, होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोलना, ईरान पर से प्रतिबंध हटाना और लगभग 24 अरब डॉलर की जब्त ईरानी संपत्तियाँ जारी करना शामिल हो सकता है। स्काई न्यूज़ अरबिया के अनुसार यह ज्ञापन एक व्यापक ढाँचा तैयार करेगा जिसके तहत 60 दिनों के भीतर ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अंतिम सहमति बनाने की कोशिश होगी। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने पहले ही घोषणा की थी कि शांति समझौते में लेबनान भी शामिल है, जिससे तीन महीने से अधिक चले सैन्य टकराव को समाप्त करने का मार्ग प्रशस्त होगा।

इज़राइल में इस गोपनीयता से गहरी बेचैनी है। जेरूसलम पोस्ट के एक सूत्र ने पुष्टि की कि अमेरिका ने हस्ताक्षर समारोह से पहले समझौता दिखाने से मना कर दिया। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू राष्ट्रपति ट्रंप के साथ तत्काल बैठक की कोशिश में जुटे हैं। इज़राइली कैबिनेट के कुछ सदस्यों ने साफ़ कहा है कि यह समझौता उनके लिए बाध्यकारी नहीं है और लेबनान से पीछे हटने की उनकी कोई योजना नहीं है। तेल अवीव को आशंका है कि वाशिंगटन और तेहरान के बीच बनी सहमति उसकी सुरक्षा चिंताओं को दरकिनार कर सकती है, ख़ासकर तब जब हिज़्बुल्लाह और ईरान के क्षेत्रीय प्रभाव पर अंकुश लगाना इज़राइल का प्रमुख लक्ष्य रहा है।

दक्षिण एशिया के लिए यह घटनाक्रम कई आयाम रखता है। पाकिस्तान की मध्यस्थता ने उसे कूटनीतिक मंच पर वापस ला खड़ा किया है, लेकिन भारत की निगाहें मुख्य रूप से होर्मुज़ जलडमरूमध्य की सुगमता और ऊर्जा आपूर्ति की स्थिरता पर टिकी हैं। यदि समझौता वास्तव में प्रतिबंधों में ढील और जलमार्ग खोलने की ओर ले जाता है, तो वैश्विक तेल बाज़ार को राहत मिल सकती है, जिसका सीधा लाभ भारत जैसे बड़े आयातक को होगा। हालाँकि, इज़राइल की असहमति और अमेरिकी प्रशासन की गोपनीयता आगे की राह को अनिश्चित बनाती है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि तेल अवीव स्वतंत्र सैन्य कार्रवाई का रास्ता चुनता है तो यह समझौता काग़ज़ी बनकर रह सकता है, जिससे पश्चिम एशिया में तनाव का एक नया चक्र शुरू होने का ख़तरा है।

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

2 संपादकीय समूह · 1 भाषाएँ

56%
लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
Stampa iraniana e affiniStampa israeliana
Stampa iraniana e affini/ regime
pragmatismoscetticismo

अमेरिका ने कथित तौर पर ईरान के साथ समझौता ज्ञापन का पाठ देखने के इज़राइल के अनुरोध को अस्वीकार कर दिया, जिससे शुक्रवार को स्विट्ज़रलैंड में हस्ताक्षर से पहले तेल अवीव विवरणों से अनभिज्ञ है। समझौते की सामग्री के बारे में अटकलों में लेबनान से इज़राइली बलों की वापसी और प्रतिबंधों को हटाना शामिल है, लेकिन कोई आधिकारिक विवरण जारी नहीं किया गया है। अमेरिकी इनकार समझौते के आगे बढ़ने पर इज़राइली मांगों से व्यावहारिक दूरी को रेखांकित करता है।

Stampa israeliana/ sicurezza
allarmeindignazione

अमेरिका ने स्विट्ज़रलैंड में हस्ताक्षर समारोह से पहले इज़राइल को ईरान समझौते तक पहुंच से वंचित कर दिया, एक स्रोत पुष्टि करता है, जिससे यरुशलम में चिंता बढ़ गई है। समझौते में कथित तौर पर दक्षिणी लेबनान से आईडीएफ की वापसी और अरबों डॉलर की जमी हुई ईरानी संपत्तियों को जारी करने के खंड शामिल हैं, फिर भी इज़राइल अनभिज्ञ है। राष्ट्रपति ट्रम्प ने पाठ को ज़ोर से पढ़ने का वादा किया है, लेकिन पारदर्शिता की कमी संभावित सुरक्षा प्रभावों पर आक्रोश को बढ़ावा देती है।

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अपडेट 07:56 pm1 भाषा · 3 स्रोत
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मंगलवार, 16 जून 2026

अमेरिका ने इज़राइल को ईरान समझौते की जानकारी देने से किया इनकार, तेल अवीव में बढ़ी बेचैनी

पाकिस्तान की मध्यस्थता में हुए 14-सूत्रीय समझौते पर गोपनीयता बरकरार, इज़राइल ने कहा- यह हमें बाध्य नहीं करता

अमेरिका ने इज़राइल के उस अनुरोध को ठुकरा दिया है जिसमें तेल अवीव ने ईरान के साथ होने वाले समझौता ज्ञापन का पूरा पाठ देखने की माँग की थी। यह जानकारी इज़राइली चैनल 12 ने दी, जिसके अनुसार व्हाइट हाउस ने स्पष्ट रूप से इनकार कर दिया और इज़राइली अधिकारी अब भी उस दस्तावेज़ के विवरण से अनभिज्ञ हैं जिस पर शुक्रवार को स्विट्ज़रलैंड में हस्ताक्षर होने हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वह समझौते को "शब्द-दर-शब्द" पढ़ेंगे, लेकिन तारीख तय नहीं की। इस बीच ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाक़र ग़ालिबाफ़ पहले ही ज्ञापन पर हस्ताक्षर कर चुके हैं, जबकि अमेरिकी पक्ष पर ट्रंप और उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस के हस्ताक्षर हैं।

विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इस समझौते में 14 अलग-अलग खंड शामिल हैं, जिनमें दक्षिणी लेबनान से इज़राइली सेना की वापसी, होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोलना, ईरान पर से प्रतिबंध हटाना और लगभग 24 अरब डॉलर की जब्त ईरानी संपत्तियाँ जारी करना शामिल हो सकता है। स्काई न्यूज़ अरबिया के अनुसार यह ज्ञापन एक व्यापक ढाँचा तैयार करेगा जिसके तहत 60 दिनों के भीतर ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अंतिम सहमति बनाने की कोशिश होगी। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने पहले ही घोषणा की थी कि शांति समझौते में लेबनान भी शामिल है, जिससे तीन महीने से अधिक चले सैन्य टकराव को समाप्त करने का मार्ग प्रशस्त होगा।

इज़राइल में इस गोपनीयता से गहरी बेचैनी है। जेरूसलम पोस्ट के एक सूत्र ने पुष्टि की कि अमेरिका ने हस्ताक्षर समारोह से पहले समझौता दिखाने से मना कर दिया। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू राष्ट्रपति ट्रंप के साथ तत्काल बैठक की कोशिश में जुटे हैं। इज़राइली कैबिनेट के कुछ सदस्यों ने साफ़ कहा है कि यह समझौता उनके लिए बाध्यकारी नहीं है और लेबनान से पीछे हटने की उनकी कोई योजना नहीं है। तेल अवीव को आशंका है कि वाशिंगटन और तेहरान के बीच बनी सहमति उसकी सुरक्षा चिंताओं को दरकिनार कर सकती है, ख़ासकर तब जब हिज़्बुल्लाह और ईरान के क्षेत्रीय प्रभाव पर अंकुश लगाना इज़राइल का प्रमुख लक्ष्य रहा है।

दक्षिण एशिया के लिए यह घटनाक्रम कई आयाम रखता है। पाकिस्तान की मध्यस्थता ने उसे कूटनीतिक मंच पर वापस ला खड़ा किया है, लेकिन भारत की निगाहें मुख्य रूप से होर्मुज़ जलडमरूमध्य की सुगमता और ऊर्जा आपूर्ति की स्थिरता पर टिकी हैं। यदि समझौता वास्तव में प्रतिबंधों में ढील और जलमार्ग खोलने की ओर ले जाता है, तो वैश्विक तेल बाज़ार को राहत मिल सकती है, जिसका सीधा लाभ भारत जैसे बड़े आयातक को होगा। हालाँकि, इज़राइल की असहमति और अमेरिकी प्रशासन की गोपनीयता आगे की राह को अनिश्चित बनाती है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि तेल अवीव स्वतंत्र सैन्य कार्रवाई का रास्ता चुनता है तो यह समझौता काग़ज़ी बनकर रह सकता है, जिससे पश्चिम एशिया में तनाव का एक नया चक्र शुरू होने का ख़तरा है।

स्रोतों में मतभेद

— · 3 स्रोत · 1 भाषा

56%उच्च

स्रोत कैसे एक ही तथ्यों को अलग-अलग तरीके से बयाँ करते हैं।

विभाजन कैसे है

समर्थक60%
न्यूनत्र20%
निंदक20%

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

2 संपादकीय समूह · 1 भाषाएँ

लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
Stampa iraniana e affiniStampa israeliana
Stampa iraniana e affini/ regime
pragmatismoscetticismo

अमेरिका ने कथित तौर पर ईरान के साथ समझौता ज्ञापन का पाठ देखने के इज़राइल के अनुरोध को अस्वीकार कर दिया, जिससे शुक्रवार को स्विट्ज़रलैंड में हस्ताक्षर से पहले तेल अवीव विवरणों से अनभिज्ञ है। समझौते की सामग्री के बारे में अटकलों में लेबनान से इज़राइली बलों की वापसी और प्रतिबंधों को हटाना शामिल है, लेकिन कोई आधिकारिक विवरण जारी नहीं किया गया है। अमेरिकी इनकार समझौते के आगे बढ़ने पर इज़राइली मांगों से व्यावहारिक दूरी को रेखांकित करता है।

Stampa israeliana/ sicurezza
allarmeindignazione

अमेरिका ने स्विट्ज़रलैंड में हस्ताक्षर समारोह से पहले इज़राइल को ईरान समझौते तक पहुंच से वंचित कर दिया, एक स्रोत पुष्टि करता है, जिससे यरुशलम में चिंता बढ़ गई है। समझौते में कथित तौर पर दक्षिणी लेबनान से आईडीएफ की वापसी और अरबों डॉलर की जमी हुई ईरानी संपत्तियों को जारी करने के खंड शामिल हैं, फिर भी इज़राइल अनभिज्ञ है। राष्ट्रपति ट्रम्प ने पाठ को ज़ोर से पढ़ने का वादा किया है, लेकिन पारदर्शिता की कमी संभावित सुरक्षा प्रभावों पर आक्रोश को बढ़ावा देती है।

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