
शुरुआती झटकों के बाद इक्वाडोर ने जर्मनी को 1-1 पर रोका, नॉकआउट की उम्मीदें बरकरार
दूसरे मिनट में लेरॉय साने के गोल से पिछड़ने के बाद निल्सन आंगुलो ने नौवें मिनट में बराबरी दिलाकर इक्वाडोर को ग्रुप-ई के रोमांचक मुकाबले में जीवित रखा।
न्यू जर्सी के मेटलाइफ स्टेडियम में खेले जा रहे ग्रुप-ई के इस निर्णायक मुकाबले की शुरुआत बिजली की रफ्तार से हुई। दूसरे ही मिनट में जर्मनी के लेरॉय साने ने फ्लोरियन विर्ट्ज के पास को गोल में बदलकर टीम को आगे कर दिया, लेकिन इक्वाडोर के खिलाड़ियों ने इस गोल से पहले पावलोविक द्वारा विटे पर खतरनाक खेल की जोरदार अपील की, जिसे रेफरी टोरी पेंसो ने नजरअंदाज कर दिया। इस झटके से उबरते हुए इक्वाडोर ने सात मिनट बाद ही करारा जवाब दिया: निल्सन आंगुलो ने मिडफील्ड से गेंद लेकर करीब 25 गज की दूरी से जोरदार शॉट लगाया जो मैनुअल नॉयर की पहुंच से दूर कोने में समा गया। यह इस विश्व कप में इक्वाडोर का पहला गोल था, जिसने टीम के गोल के सूखे को समाप्त किया।
यह मुकाबला दो विपरीत परिस्थितियों वाली टीमों के बीच है। जर्मनी पहले ही कुराकाओ को 7-1 और आइवरी कोस्ट को 2-1 से हराकर ग्रुप विजेता के रूप में अंतिम-32 में जगह पक्की कर चुका है, जबकि इक्वाडोर के लिए यह करो या मरो की स्थिति है। सेबेस्टियन बेकासेसे की टीम ने पहले मैच में आइवरी कोस्ट से 1-0 की हार झेली और फिर छोटे से देश कुराकाओ के खिलाफ गोलरहित ड्रॉ खेला, जिससे उनके केवल एक अंक है। तीसरे स्थान पर मौजूद इक्वाडोर को नॉकआउट में पहुंचने के लिए जीत के अलावा दूसरे मैचों के नतीजों पर भी निर्भर रहना होगा।
शुरुआती गोलों के बाद खेल ने तेज रफ्तार पकड़ ली। जर्मनी ने गेंद पर नियंत्रण बनाए रखा और काई हैवर्ट्ज के हेडर से बढ़त बनाने का मौका बनाया, जिसे गालिंडेज ने बचा लिया। दूसरी ओर, इक्वाडोर ने जवाबी हमलों में तेजी दिखाई: एनर वालेंसिया एक बार पेनल्टी एरिया में गिरे पर रेफरी ने पेनल्टी नहीं दी, और मुसियाला का शॉट पोस्ट के पास से बाहर चला गया। स्टेडियम में इक्वाडोर के प्रशंसकों की भारी भीड़ ने लगातार शोर मचाकर माहौल को दक्षिण अमेरिकी पक्ष में झुका दिया।
इक्वाडोर के लिए यह मैच केवल तीन अंकों का नहीं, बल्कि आत्मविश्वास की भी परीक्षा है। टीम ने दक्षिण अमेरिकी क्वालीफायर्स में अर्जेंटीना के बाद दूसरे स्थान पर रहते हुए मजबूत प्रदर्शन किया था, लेकिन विश्व कप में अटैकिंग थर्ड में कमजोरी साफ झलकी। कप्तान वालेंसिया, जो देश के लिए सर्वाधिक गोल करने वाले खिलाड़ी हैं, अभी तक इस टूर्नामेंट में खाता नहीं खोल पाए हैं। दूसरी तरफ, जर्मन कोच जूलियन नागल्समैन ने कुछ बदलावों के साथ टीम उतारी, लेकिन मुख्य चेहरों को आराम नहीं दिया, जिससे साफ है कि वे लय बनाए रखना चाहते हैं।
फिलहाल मैच पहले हाफ में 1-1 से बराबर है। इक्वाडोर को अगर नॉकआउट की उम्मीद जिंदा रखनी है तो दूसरे हाफ में एक और गोल करना होगा, साथ ही फिलाडेल्फिया में हो रहे आइवरी कोस्ट-कुराकाओ मैच के नतीजे पर भी नजर रहेगी। एक ड्रॉ या हार इक्वाडोर को विश्व कप से बाहर कर सकती है, जबकि जर्मनी पहले ही अंतिम-32 के लिए अपनी तैयारी शुरू कर चुका है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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जर्मनी अपने ग्रुप में शीर्ष पर पहले ही पक्का हो चुका है, इसलिए यह मैच उसके लिए औपचारिकता मात्र है। इक्वाडोर को अपनी विश्व कप उम्मीदें जिंदा रखने के लिए हर हाल में जीत चाहिए। दक्षिण पूर्व एशियाई कवरेज शांत और तकनीकी है, जिसमें संभावित बदलाव और रणनीति पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
इक्वाडोर मेटलाइफ स्टेडियम में अपनी पीठ दीवार से लगाए खड़ा है, उसे पहले से क्वालीफाई जर्मनी को हराकर बाहर होने से बचना है। लैटिन अमेरिकी कवरेज इस मैच को अत्यावश्यकता से भर देती है, इसे एक बहुत बड़ी चुनौती बताती है। इक्वाडोर के प्रशंसक टाइम्स स्क्वायर पर छा जाते हैं, और रिपोर्टिंग में व्यावहारिक जानकारी के साथ-साथ टीम के लिए छिपा हुआ समर्थन भी दिखता है।
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