
गवाही, ग़ाफ़ का पेड़ और पिता का बदलता चेहरा: एक वैश्विक दिन की तस्वीरें
अबू धाबी में दिव्यांग बच्चों के पिता की आँखों में चमक, घाना के चर्च का आह्वान, और नाइजीरिया की आदर्श सूची—पितृत्व की नई कहानियाँ।
अबू धाबी के एक सभागार में एक पिता खड़ा हुआ और उसने अपने तीन बेटों की कहानी सुनानी शुरू की—तीनों ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम पर थे। उसने सालों के धैर्य, प्रेम और ज़िद की बात की, और कमरे में बैठे दूसरे पिताओं की आँखों में एक पहचानी-सी चमक दौड़ गई। यह नज़ारा ‘ابتسم... فابتسامتك تكفي لإسعادهم’ (मुस्कुराइए... आपकी मुस्कान ही उन्हें ख़ुश करने के लिए काफ़ी है) अभियान के उस आयोजन का था, जो शेख़ा मोज़ा बिन्त सुहैल के संरक्षण में विश्व पिता दिवस पर ‘असहाब अल-हिमम’ (दृढ़ संकल्प वाले लोग) के पिताओं को समर्पित था। मंच पर ‘آباء أصحاب الهمم.. غاف الإمارات وصُنّاع الأثر’ का नारा चमक रहा था—यानी दिव्यांग बच्चों के पिता, अमीरात के ग़ाफ़ के पेड़ और प्रभाव के निर्माता। संयोग से यह वर्ष 2026 संयुक्त अरब अमीरात में ‘परिवार वर्ष’ घोषित है, और यह आयोजन उसी दिशा में एक जीवित गवाही बन गया।
क़रीब साढ़े पाँच हज़ार किलोमीटर दूर, पश्चिम अफ़्रीका के दो देशों में पितृत्व की बातचीत एक अलग सुर में बह रही थी। घाना के कडजेबी ज़िले में स्थानीय चर्च परिषद के अध्यक्ष रेवरेंड विंसेंट डाकपो ने पिताओं से आह्वान किया कि वे बच्चों को ईश्वरीय भय में प्रशिक्षित करें, क्योंकि यही राष्ट्रीय विकास की नींव है। उन्होंने कहा कि पिता बनना केवल विशेषाधिकार नहीं, बल्कि एक दैवीय ज़िम्मेदारी है जो अनुशासन, प्रेम और आदर्श नेतृत्व माँगती है। इसी दिन घाना की संसद के प्रथम उपाध्यक्ष बर्नार्ड अहियाफ़ोर ने पिताओं को परिवार और समाज की धुरी बताते हुए उनके बलिदानों की सराहना की। और नाइजीरिया में ‘मेन ऑफ़ वैलर’ नामक एक ईसाई समूह ने दस ‘अनुकरणीय पितृत्व के प्रतिमान’ घोषित किए, जिनमें अरबपति फ़ेमी ओटेडोला शीर्ष पर रहे—उन्होंने अपनी बेटियों के अपरंपरागत करियर (डीजे कप्पी और टेमी) का समर्थन किया, न कि कॉरपोरेट अनुपालन थोपा—और पादरी पॉल एनेन्चे को उनके स्थिर वैवाहिक जीवन और युवाओं के आध्यात्मिक मार्गदर्शन के लिए चुना गया। सूची में पूर्व फ़ुटबॉल स्टार विक्टर इकपेबा भी थे, जिन्होंने गहरी व्यक्तिगत क्षति के बाद अकेले पिता के रूप में अपनी बेटियों की परवरिश की।
केन्या की राजधानी नैरोबी में एक क़ानूनी शिक्षा परिषद के मुख्य कार्यकारी प्रोफ़ेसर बुसालिले जैक म्विमाली ने बिज़नेस डेली अफ़्रीका से बातचीत में पितृत्व के एक अलग ही सत्य को उघाड़ा। उन्होंने बताया कि उनका सबसे बड़ा डर यह है कि जिन चीज़ों के लिए उन्होंने ग़रीबी में संघर्ष किया—अच्छी नौकरी, कार, घर—वही चीज़ें देखकर बड़े हुए उनके बच्चे आख़िर किस चीज़ से प्रेरित होंगे। “एक पीढ़ी में मेरी सारी मेहनत खो जाने का डर है,” उन्होंने कहा। वे दार एस सलाम में रह रहे अपने बच्चों से दूर नैरोबी में काम करते हैं, और हर मुलाक़ात पर पाते हैं कि बच्चे उम्मीद से कहीं तेज़ी से बड़े हो गए। उनका यह कथन—कि पितृत्व किसी कंपनी चलाने जैसा नहीं, जहाँ फ़ॉर्मूले काम करते हैं; यहाँ तो हर बच्चे के लिए अलग रास्ता गढ़ना पड़ता है—पूरे आयोजनों की गंभीरता के बीच एक नर्म, आत्मविश्लेषी स्वर बन गया।
इसी बीच, संयुक्त अरब अमीरात में पिता को केवल भावनात्मक नहीं, बल्कि संस्थागत समर्थन भी मिल रहा है। शेख़ मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम ने ‘وقف الأب’ (पिता की बंदोबस्ती) अभियान चलाया, जिसके तहत एक अरब दिरहम का कोष बनाया गया जिसका लाभांश ज़रूरतमंदों के इलाज पर ख़र्च होता है—और लोग अपने पिता के नाम पर दान कर सकते हैं। अबू धाबी की प्रारंभिक बचपन प्राधिकरण ने ‘माता-पिता के लिए सहायक कार्य वातावरण गुणवत्ता चिह्न’ शुरू किया, ताकि संस्थाएँ परिवार-अनुकूल नीतियाँ अपनाएँ और पिता को बच्चों की देखभाल में अधिक स्थान मिले। यह सब उस विरासत से जुड़ा है जो संस्थापक शेख़ ज़ायद ने छोड़ी—एक ऐसे पिता-नेता की, जिनका नाम आज भी अमीरात की सामाजिक नीतियों में करुणा और दायित्व का पर्याय है।
अबू धाबी के उस सभागार में जिन पिताओं को ‘ग़ाफ़’ कहा गया, वह रेगिस्तान का एक ऐसा पेड़ है जो बिना ज़्यादा पानी के सदियों तक खड़ा रहता है—उसकी छाँव में थके हुए राहगीर सुस्ताते हैं, और उसकी जड़ें ज़मीन की गहराइयों से नमी खींचती रहती हैं। ठीक वैसे ही जैसे ये पिता अपने बच्चों की दुनिया को थामे रहते हैं, चाहे अबू धाबी का सभागार हो, कडजेबी का चर्च, लागोस का कोई बोर्डरूम, या नैरोबी का कोई दफ़्तर—हर जगह पिता का चेहरा कुछ और ही कहानी कह रहा था।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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संयुक्त अरब अमीरात में, पिता दिवस दृढ़ संकल्प वाले लोगों के पिताओं का उत्सव बन जाता है, जिनके धैर्य और अपने बच्चों की क्षमताओं में विश्वास को प्रेरणादायक सफलता की कहानियों की आधारशिला के रूप में सराहा जाता है। राज्य की नीतियाँ पिता को परिवार विधान के केंद्र में रखती हैं, कार्य-जीवन संतुलन और सामुदायिक मूल्यों को बढ़ावा देती हैं, यह सब आगामी परिवार वर्ष 2026 के संदर्भ में है।
घाना, नाइजीरिया और केन्या में, पिता दिवस पिताओं से बच्चों को नैतिक और धार्मिक मूल्यों के साथ पालने का आह्वान करता है, जो राष्ट्रीय विकास का एक स्तंभ है। जहाँ कुछ लोग अरबपति और धार्मिक हस्तियों को सहायक पितृत्व के आदर्श के रूप में मनाते हैं, वहीं अन्य इस बात पर विचार करते हैं कि सच्चा पितृत्व कॉर्पोरेट तर्क को चुनौती देता है, विनम्रता और तात्कालिकता की माँग करता है।
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