
पुतिन ने नाटो पर लगाया युद्ध की तैयारी का आरोप, रूस ने दी चेतावनी
रूसी राष्ट्रपति ने सैन्य स्नातकों को संबोधित करते हुए कहा कि पश्चिमी देश झूठे बहानों से सैन्य बजट बढ़ा रहे हैं और मास्को आत्मरक्षा के लिए मजबूर है।
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने 23 जून को मास्को में सैन्य अकादमियों के स्नातकों के समक्ष आरोप लगाया कि उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) के सदस्य देश अब खुलेआम रूस के विरुद्ध युद्ध की तैयारी कर रहे हैं और अपने आक्रामक सैन्य बजट में वृद्धि कर रहे हैं। पुतिन के अनुसार, पश्चिमी नेता 'रूसी सैन्य खतरे' के झूठे दावों का उपयोग अपने देशों के कठोर सैन्यीकरण को उचित ठहराने के लिए कर रहे हैं। उन्होंने एक पैटर्न रेखांकित किया जिसमें पश्चिम पहले रूस के लिए खतरे उत्पन्न करता है, फिर मास्को को आत्मरक्षा के कदम उठाने पर मजबूर करता है, और तत्पश्चात रूस पर ही आक्रामकता का आरोप लगाता है। पुतिन ने इसकी तुलना 1941 में सोवियत संघ पर नाज़ी जर्मनी के आक्रमण से की, जिसके बाद बर्लिन ने मास्को पर 'सामूहिक पश्चिम' के खिलाफ आक्रामकता का दोष मढ़ने का प्रयास किया था।
पश्चिमी राजधानियों और नाटो मुख्यालय से भिन्न दृष्टिकोण सामने आता है। यूरोपीय खुफिया आकलनों ने चेतावनी दी है कि रूस दशक के अंत तक नाटो क्षेत्र पर हमला करने की क्षमता विकसित कर सकता है, जिसके मद्देनज़र गठबंधन 2030 तक परिचालन तत्परता हासिल करने की योजना पर काम कर रहा है। नाटो सूत्रों के अनुसार, यूक्रेन में रूस की सैन्य कार्रवाई ने गठबंधन की पूर्वी सीमा पर सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है, जिससे सदस्य देशों के रक्षा व्यय में वृद्धि स्वाभाविक प्रतिक्रिया है। रूसी पक्ष ने बार-बार कहा है कि नाटो देशों पर हमले की उसकी कोई योजना नहीं है, और उप विदेश मंत्री अलेक्ज़ांडर ग्रुश्को ने मंगलवार को कहा कि प्रत्यक्ष सैन्य टकराव का जोखिम बढ़ रहा है, परंतु मास्को के पास 'किसी भी परिदृश्य' का सामना करने के लिए पर्याप्त संसाधन हैं।
यूक्रेनी सरकार के अनुसार, रूसी तेल रिफाइनरियों पर ड्रोन हमलों का उद्देश्य मास्को के युद्ध वित्तपोषण को कमजोर करना और रूसी जनता को यह दिखाना है कि वे संघर्ष से अछूते नहीं हैं। पुतिन ने इन हमलों को 'नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमले' बताते हुए कहा कि इनका लक्ष्य रूसी समाज को अस्थिर करना है। उन्होंने यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की के साथ किसी भी शांति वार्ता की संभावना को खारिज कर दिया और कहा कि रूसी सेनाएँ डोनेत्स्क क्षेत्र में कोस्त्यांतिनिव्का पर लगभग नियंत्रण स्थापित कर चुकी हैं।
इस बयानबाजी और सैन्य मुद्राओं के बीच, विशेषज्ञ आकलन बताते हैं कि गलत अनुमान का जोखिम बढ़ रहा है, विशेषकर नाटो की पूर्वी सीमा पर। दक्षिण एशिया के लिए, इस संघर्ष ने ऊर्जा कीमतों और वैश्विक खाद्य आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित किया है; भारत ने तटस्थ रुख बनाए रखते हुए संवाद और कूटनीति का आह्वान किया है। वर्तमान में, कूटनीतिक गतिरोध जारी है। आगामी नाटो शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों की रक्षा योजनाओं पर और ठोस कदम उठाए जाने की संभावना है, जबकि रूस ने पूर्वी यूक्रेन में अपनी सैन्य कार्रवाई जारी रखने के संकेत दिए हैं।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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क्रेमलिन का कहना है कि नाटो देश यूक्रेन के समर्थन से हटकर खुलेआम युद्ध की तैयारी कर रहे हैं और अपने सैन्य बजट बढ़ा रहे हैं। उसका आरोप है कि पश्चिमी नेता रूसी खतरे की मनगढ़ंत कहानियाँ फैलाकर व्यापक सैन्यीकरण को सही ठहरा रहे हैं। 1941 के उदाहरण का हवाला देते हुए मॉस्को किसी भी खतरे का त्वरित और उचित जवाब देने के लिए तैयार है।
राष्ट्रपति पुतिन ने नाटो सदस्यों पर रूस के खिलाफ खुलेआम युद्ध की तैयारी करने का आरोप लगाया और कहा कि वे कथित रूसी खतरे को सैन्य खर्च बढ़ाने का बहाना बना रहे हैं। यह बयान सैन्य अकादमी के स्नातकों के एक समारोह में दिया गया।
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