
अमेरिका-ईरान संघर्ष तीसरे दिन भी जारी, खाड़ी देशों में फैला तनाव
युद्धविराम टूटने के बाद अमेरिकी बमबारी और ईरानी जवाबी हमलों से पश्चिम एशिया में अस्थिरता गहराई, होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल आपूर्ति पर संकट बढ़ा।
अमेरिका ने ईरान पर लगातार तीसरे दिन हवाई हमले किए, जिसके जवाब में ईरान ने कुवैत, बहरीन, जॉर्डन और कतर में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया। ईरानी स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, दो दिनों की अमेरिकी बमबारी में कम से कम 14 लोगों की मौत हुई और 78 घायल हुए हैं, जिनमें अधिकतर सशस्त्र बलों के सदस्य बताए गए हैं। कुवैत की सेना ने तीन बैलिस्टिक मिसाइल, एक क्रूज मिसाइल और दस ड्रोन को मार गिराने की पुष्टि की, जिसके मलबे से एक व्यक्ति घायल हुआ। बहरीन और जॉर्डन ने भी अपने हवाई क्षेत्र में घुसपैठ कर रहे प्रक्षेपास्त्रों को नाकाम करने की जानकारी दी। यह ताजा वृद्धि उस अंतरिम युद्धविराम के पूर्णतः ध्वस्त होने का संकेत है, जो जून में वाशिंगटन और तेहरान के बीच हस्ताक्षरित एक ज्ञापन के तहत लागू हुआ था।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) के अनुसार, ये हमले होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता को खतरे में डालने की ईरान की क्षमता को कम करने के लिए किए गए। सेंटकॉम ने बताया कि दो दिनों में ईरान के लगभग 170 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिनमें मिसाइल लॉन्चर और हवाई पट्टियाँ शामिल हैं। दूसरी ओर, ईरान की इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने कुवैत में अरिफजान और अली अल सलेम स्थित अमेरिकी बेसों पर हमले की जिम्मेदारी ली और चेतावनी दी कि यदि अमेरिकी आक्रमण दोहराया गया तो खाड़ी क्षेत्र में अन्य अमेरिकी प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया जाएगा। खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के सदस्य देशों—सऊदी अरब, ओमान, कुवैत, बहरीन, संयुक्त अरब अमीरात और कतर—ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से ईरानी हमलों की कड़ी निंदा करने और होर्मुज जलडमरूमध्य में निर्बाध आवागमन सुनिश्चित करने की मांग की है।
इस सैन्य टकराव का सीधा प्रभाव वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ा है। होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया का लगभग पाँचवाँ हिस्सा कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस गुजरता है, और युद्ध शुरू होने के बाद से यहाँ जहाजों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है। लॉयड्स लिस्ट इंटेलिजेंस के आँकड़ों के अनुसार, जून में युद्धविराम के दौरान 576 जहाजों ने इस मार्ग का उपयोग किया, जबकि मई में यह संख्या मात्र 233 थी, लेकिन ताजा हमलों के बाद यातायात फिर ठप होने की आशंका है। भारत जैसे दक्षिण एशियाई देशों के लिए, जो अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से आयात करते हैं, यह संकट ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता के लिए सीधा खतरा पैदा करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी गई है।
यह संघर्ष फरवरी में उस समय शुरू हुआ जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमले किए, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई मारे गए। इसके बाद जून में एक अंतरिम युद्धविराम समझौता हुआ, जिसके तहत होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने और स्थायी शांति वार्ता का मार्ग प्रशस्त करने की सहमति बनी थी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान द्वारा वाणिज्यिक जहाजों पर हमले का आरोप लगाते हुए इस युद्धविराम को समाप्त घोषित कर दिया, हालाँकि उन्होंने यह भी कहा कि बातचीत की गुंजाइश बनी रहेगी। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सऊदी अरब, तुर्की, ओमान और पाकिस्तान के सेना प्रमुख से फोन पर बातचीत की, जो क्षेत्रीय कूटनीतिक प्रयासों के जारी रहने का संकेत है।
फिलहाल, स्थिति अत्यंत अस्थिर बनी हुई है। ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर कालीबाफ ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका ने हमले जारी रखे तो उसे करारा जवाब मिलेगा। वहीं, जीसीसी देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से ठोस कार्रवाई की अपील की है, जिससे आने वाले दिनों में इस मंच पर कूटनीतिक गतिविधि बढ़ने की संभावना है। इस बीच, खामेनेई के पार्थिव शरीर को मशहद में सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया, जहाँ भारी भीड़ ने अमेरिका विरोधी नारे लगाए। यह संघर्ष अब केवल द्विपक्षीय न रहकर पूरे पश्चिम एशिया में फैल चुका है, और इसके दक्षिण एशिया सहित वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभावों पर सभी की निगाहें टिकी हैं।
| लैटिन अमेरिकी प्रेस | −0.50 | critical |
|---|---|---|
| महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस | 0.00 | neutral |
| दक्षिण-पूर्व एशियाई प्रेस | −0.20 | neutral |
लैटिन अमेरिका इस बढ़ोतरी की निंदा करता है और नागरिक हताहतों पर ध्यान केंद्रित करते हुए शत्रुता को रोकने की मांग करता है।
हताहतों की संख्या और ईरानी निंदा पर जोर देकर, एक नैतिक तात्कालिकता पैदा की जाती है जो अंतर्राष्ट्रीय समुदाय पर दबाव डालती है।
यूरोप तटस्थता से देखता है, बिना पक्ष लिए केवल बढ़ोतरी को दर्ज करता है।
संघर्ष को एक साधारण समाचार आइटम तक सीमित करके, किसी भी नैतिक या राजनीतिक निर्णय से बचा जाता है।
हताहतों और ईरानी प्रतिक्रियाओं को छोड़ दिया गया है, जो संघर्ष को अधिक मानवीय और ध्रुवीकृत बना देंगे।
दक्षिण पूर्व एशिया युद्धविराम की नाजुकता और आसन्न संकट के बारे में चेतावनी देता है, बिना खुले तौर पर पक्ष लिए।
टूटते युद्धविराम और गहराते संकट पर जोर देकर, तात्कालिकता की भावना पैदा की जाती है जो अंतर्राष्ट्रीय ध्यान को उचित ठहराती है।
विस्तृत हताहत आंकड़ों और ईरानी आधिकारिक बयानों को छोड़ दिया गया है, जो ईरानी पक्ष को अधिक भार देंगे।
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